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हत्या में दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Mon, 24 Jul 2017 11:07 PM IST
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court
अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने हत्या के दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने दोनों को उम्रकैद और 40-40 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्तों को एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। पीड़ित परिवार को अर्थदंड का 70 प्रतिशत प्रतिकर के रूप में भुगतान किया जाएगा।
कोतवाली हाथरस गेट पुलिस को एक महिला ने तहरीर दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 18-19 अप्रैल 2015 की रात को गांव के शाहिद ने उसकी 13 वर्षीय बेेटी के साथ बुरी नीयत से जबरदस्ती करने की कोशिश की, जिसके संबंध में उसके पति ने कोतवाली कोतवाली हाथरस में शाहिद के खिलाफ मुकदमा लिखवाया, जिस पर पुलिस द्वारा शाहिद को 24 अप्रैल 2015 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। शाहिद के जेल जाने के बाद उसका भाई अब्दुल रहीम पुत्र शहजाद एवं उसका दोस्त असराज उर्फ रावत पुत्र बच्चन खां 24 अप्रैल को दोपहर में करीब 3.30 बजे उसके घर आए। उसके पति बबलू को फैसले की बात कहकर घर से बुला ले गए।
उस समय उसके घर पर रवेंद्र और रामवीर मौजूद थे, जिन्होंने बबलू को इन लोगों के साथ जाते हुए देखा। रात्रि में बबलू घर नहीं लौटा। तलाश करने पर सुबह करीब 8 बजे उसके पति बबलू की लाश खून से लथपथ तरफरा रोड पर प्लाट में पड़ी मिली। आरोप है कि उसके पति की हत्या अब्दुल रहीम और उसके साथ असराज ने मुकदमे की रंजिश को लेकर की है। मामले में न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। इसके बाद एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का आरोपी पक्ष खंडन नहीं कर सका। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी माना और सजा का फैसला सुनाया।
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कोतवाली हाथरस गेट पुलिस को एक महिला ने तहरीर दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 18-19 अप्रैल 2015 की रात को गांव के शाहिद ने उसकी 13 वर्षीय बेेटी के साथ बुरी नीयत से जबरदस्ती करने की कोशिश की, जिसके संबंध में उसके पति ने कोतवाली कोतवाली हाथरस में शाहिद के खिलाफ मुकदमा लिखवाया, जिस पर पुलिस द्वारा शाहिद को 24 अप्रैल 2015 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। शाहिद के जेल जाने के बाद उसका भाई अब्दुल रहीम पुत्र शहजाद एवं उसका दोस्त असराज उर्फ रावत पुत्र बच्चन खां 24 अप्रैल को दोपहर में करीब 3.30 बजे उसके घर आए। उसके पति बबलू को फैसले की बात कहकर घर से बुला ले गए।
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उस समय उसके घर पर रवेंद्र और रामवीर मौजूद थे, जिन्होंने बबलू को इन लोगों के साथ जाते हुए देखा। रात्रि में बबलू घर नहीं लौटा। तलाश करने पर सुबह करीब 8 बजे उसके पति बबलू की लाश खून से लथपथ तरफरा रोड पर प्लाट में पड़ी मिली। आरोप है कि उसके पति की हत्या अब्दुल रहीम और उसके साथ असराज ने मुकदमे की रंजिश को लेकर की है। मामले में न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। इसके बाद एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का आरोपी पक्ष खंडन नहीं कर सका। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी माना और सजा का फैसला सुनाया।
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