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हत्या में दो को आजीवन कारावास
अमर उजाला, हाथरस
Updated Tue, 20 Sep 2016 11:55 PM IST
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अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने हत्या के एक मामले में दो अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। दोनों को सश्रम आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में अभियुक्तों को 10-10 महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भोगना होगा। जुर्माने की धनराशि का 70 फीसदी मृतक आश्रितों को प्रतिकर के रूप में दिया जाएगा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक तीन जुलाई 1998 को चंद्रपाल सिंह पुत्र मुरलीधर निवासी मेंडू थाना हाथरस जंक्शन ने तहरीर देकर कहा कि उसके परिवार और मुंशीलाल आदि के परिवार से पुरानी रंजिश चल रही थी, लेकिन अब काफी समय से एक-दूसरे के यहां आना-जाना हो गया था। दो जुलाई को जब उनका भाई छोटे रात में घर नहीं पहुंचा तो मां के कहने पर वह और उनका भाई वासुदेव छोटे को तलाशने निकले, लेकिन वह उन्हें कहीं नहीं मिला।
तीन जुलाई की सुबह करीब चार बजे वह और उनके भाई वासुदेव सपली के घर के करीब आए तो उन्होंने देखा कि उनके गांव के ही झब्बू पुत्र मुंशीलाल, पप्पू पुत्र गनपत, चंदन पुत्र सोनपाल, सत्यपाल उर्फ सल्ली पुत्र भोजा, प्यारे पुत्र गनपत और लूला पुत्र चंदन निवासीगण मोहल्ला अहेरियान कस्बा मेंडू उनके भाई छोटे की लाश को हाथ-पैरों से पकड़कर ले जा रहे थे।
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उन्होंने चिल्लाया तो ये लोग महेंद्र के पीपल के पेड़ के नीचे डालकर भाग गए। सभी के हाथ में चाकू, छुरी और अन्य धारदार हथियार थे। हम दोनों भाइयों ने चिल्लाते हुए उनका पीछा किया, लेकिन वह पकड़ में नहीं आए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सजा 3का फैसला सुनाया।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक तीन जुलाई 1998 को चंद्रपाल सिंह पुत्र मुरलीधर निवासी मेंडू थाना हाथरस जंक्शन ने तहरीर देकर कहा कि उसके परिवार और मुंशीलाल आदि के परिवार से पुरानी रंजिश चल रही थी, लेकिन अब काफी समय से एक-दूसरे के यहां आना-जाना हो गया था। दो जुलाई को जब उनका भाई छोटे रात में घर नहीं पहुंचा तो मां के कहने पर वह और उनका भाई वासुदेव छोटे को तलाशने निकले, लेकिन वह उन्हें कहीं नहीं मिला।
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तीन जुलाई की सुबह करीब चार बजे वह और उनके भाई वासुदेव सपली के घर के करीब आए तो उन्होंने देखा कि उनके गांव के ही झब्बू पुत्र मुंशीलाल, पप्पू पुत्र गनपत, चंदन पुत्र सोनपाल, सत्यपाल उर्फ सल्ली पुत्र भोजा, प्यारे पुत्र गनपत और लूला पुत्र चंदन निवासीगण मोहल्ला अहेरियान कस्बा मेंडू उनके भाई छोटे की लाश को हाथ-पैरों से पकड़कर ले जा रहे थे।
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उन्होंने चिल्लाया तो ये लोग महेंद्र के पीपल के पेड़ के नीचे डालकर भाग गए। सभी के हाथ में चाकू, छुरी और अन्य धारदार हथियार थे। हम दोनों भाइयों ने चिल्लाते हुए उनका पीछा किया, लेकिन वह पकड़ में नहीं आए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सजा 3का फैसला सुनाया।