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आयोजक समेत दो के विरुद्ध मुकदमा दर्ज
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2016 12:08 AM IST
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सादाबाद की डॉ. अंबेडकर शोभायात्रा में प्रदर्शित किया गया विवादित पोस्टर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
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सादाबाद/ हाथरस। सादाबाद में रविवार को अंबेडकर शोभायात्रा में मायावती के काली स्वरूप वाले विवादित पोस्टर को लेकर भाजपाइयों में खासा आक्रोश नजर आया। भाजपा नेताओं ने इस संबंध में सीओ सादाबाद नरेंद्र देव से मुलाकात कर विरोध प्रकट किया और थाने में शोभायात्रा के आयोजक और पोस्टर निर्माता के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की। इसके बाद सादाबाद पुलिस ने जिलाध्यक्ष रामवीर सिंह परमार की शिकायत पर आयोजक ब्रजमोहन लेखक निवासी सादाबाद और पोस्टर निर्माता ध्रुव सिंह कर्दम निवासी हाथरस के विरुद्ध धारा 295(ए) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया।
मालूम हो कि पोस्टर में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को काली मां के रूप में दर्शाया था। मंत्री स्मृति ईरानी का कटा हुआ सिर इनके एक हाथ में था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काली को हाथ जोड़कर नमन करते हुए दिखाया गया था। वहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को मायावती के पैरों में पड़े हुए थे। इस पोस्टर के बारे में पता चलते ही पुलिस ने इस झांकी को शोभायात्रा से हटवा दिया था और विवादित भी फड़वा दिया था।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने अपनी शिकायत में पुलिस से कहा कि पोस्टर को बनाने और शोभायात्रा में शामिल किए जाने से भाजपा कार्यकर्ताओं को भारी ठेस पहुंची है और धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई हैं। पोस्टर में सरसंघचालक मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपमानित किया गया है। स्मृति ईरानी का कटा हुआ सिर हाथ में लटकाकर आम लोगों को स्मृति ईरानी की हत्या के लिए उकसाने का कृत्य किया गया है। इससे प्रेरित होकर कोई व्यक्ति उनकी हत्या कर सकता है। ऐसे में मेला संयोजक और कार्य समिति ही उत्तरदायी होगी। परमार ने कहा कि इससे समाज में घृणा का वातावरण उत्पन्न हो गया है और असंतोष फैल रहा है। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है और शांति व्यवस्था को पलीता लग सकता है।
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आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है और इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. अजय पाल शर्मा, एसपी हाथरस
देवी नहीं हो सकतीं मायावती
भाजपा जिलाध्यक्ष रामवीर सिंह परमार ने थाना पुलिस को दी अपनी तहरीर में बसपा सुप्रीमो पर निशाना साधा। उन्होंने बसपा सुप्रीमों को संकुचित विचार वाली नेता बताते हुए कहा कि उन पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है। उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्य जेल में हैं। कई पर गाज गिरने वाली है। ऐसे में मायावती को हिंदुओं की देवी के रूप में प्रदर्शित करना सही नहीं है। इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
हाथरस में शोभायात्रा पर रही नजर
सादाबाद में अंबेडकर शोभायात्रा के दौरान विवादित पोस्टर सामने आने पर अगले दिन हाथरस में निकाली गई अंबेडकर शोभायात्रा पर पुलिस की नजर रही। कोतवाली पुलिस ने पहले ही आयोजकों को ऐसा कुछ नहीं करने की सख्त हिदायत दे दी। सभी झांकियों और पोस्टरों को अधिकारियों ने शोभायात्रा से पहले खुद देखा। शोभायात्रा का समय शाम पांच बजे का था। आयोजकों से कहकर इसे दोपहर ढाई बजे कराया गया और रात से पहले शोभायात्रा समाप्त करने को कहा गया। शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर फोर्स का इंतजाम किया गया था। एक सीओ, सात थानाध्यक्ष, 11 इंस्पेक्टर, 24 सब इंस्पेक्टर, 33 हेड कांस्टेबल, 117 सिपाही, 20 महिला सिपाही, 9 ट्रैफिक पुलिस के सिपाही, एक फायर ब्रिगेड, एक टीयर गैस स्क्वॉयड और डेढ़ प्लाटून पीएसी को सुरक्षा के लिए लगाया गया।
हिंदूवादियों ने फूंका आयोजक का पुतला
हाथरस। सादाबाद में अंबेडकर शोभायात्रा में विवादित पोस्टर में संघ और भाजपा नेताओं को अपमानित किए जाने पर मुरसान में हिंदूवादियों ने शोभायात्रा के आयोजक का पुतला फूंक कर आक्रोश जताया। रेलवे स्टेशन के पास प्रदर्शन करते हुए हिंदूवादियों ने कहा कि अगर इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों में रवेंद्र सिंह ठेनुआं, भोला चौधरी, पीयूष, नीरज, कपिल शर्मा आदि शामिल रहे।
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मालूम हो कि पोस्टर में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को काली मां के रूप में दर्शाया था। मंत्री स्मृति ईरानी का कटा हुआ सिर इनके एक हाथ में था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काली को हाथ जोड़कर नमन करते हुए दिखाया गया था। वहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को मायावती के पैरों में पड़े हुए थे। इस पोस्टर के बारे में पता चलते ही पुलिस ने इस झांकी को शोभायात्रा से हटवा दिया था और विवादित भी फड़वा दिया था।
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भाजपा जिलाध्यक्ष ने अपनी शिकायत में पुलिस से कहा कि पोस्टर को बनाने और शोभायात्रा में शामिल किए जाने से भाजपा कार्यकर्ताओं को भारी ठेस पहुंची है और धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई हैं। पोस्टर में सरसंघचालक मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपमानित किया गया है। स्मृति ईरानी का कटा हुआ सिर हाथ में लटकाकर आम लोगों को स्मृति ईरानी की हत्या के लिए उकसाने का कृत्य किया गया है। इससे प्रेरित होकर कोई व्यक्ति उनकी हत्या कर सकता है। ऐसे में मेला संयोजक और कार्य समिति ही उत्तरदायी होगी। परमार ने कहा कि इससे समाज में घृणा का वातावरण उत्पन्न हो गया है और असंतोष फैल रहा है। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है और शांति व्यवस्था को पलीता लग सकता है।
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आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है और इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. अजय पाल शर्मा, एसपी हाथरस
देवी नहीं हो सकतीं मायावती
भाजपा जिलाध्यक्ष रामवीर सिंह परमार ने थाना पुलिस को दी अपनी तहरीर में बसपा सुप्रीमो पर निशाना साधा। उन्होंने बसपा सुप्रीमों को संकुचित विचार वाली नेता बताते हुए कहा कि उन पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है। उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्य जेल में हैं। कई पर गाज गिरने वाली है। ऐसे में मायावती को हिंदुओं की देवी के रूप में प्रदर्शित करना सही नहीं है। इससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
हाथरस में शोभायात्रा पर रही नजर
सादाबाद में अंबेडकर शोभायात्रा के दौरान विवादित पोस्टर सामने आने पर अगले दिन हाथरस में निकाली गई अंबेडकर शोभायात्रा पर पुलिस की नजर रही। कोतवाली पुलिस ने पहले ही आयोजकों को ऐसा कुछ नहीं करने की सख्त हिदायत दे दी। सभी झांकियों और पोस्टरों को अधिकारियों ने शोभायात्रा से पहले खुद देखा। शोभायात्रा का समय शाम पांच बजे का था। आयोजकों से कहकर इसे दोपहर ढाई बजे कराया गया और रात से पहले शोभायात्रा समाप्त करने को कहा गया। शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर फोर्स का इंतजाम किया गया था। एक सीओ, सात थानाध्यक्ष, 11 इंस्पेक्टर, 24 सब इंस्पेक्टर, 33 हेड कांस्टेबल, 117 सिपाही, 20 महिला सिपाही, 9 ट्रैफिक पुलिस के सिपाही, एक फायर ब्रिगेड, एक टीयर गैस स्क्वॉयड और डेढ़ प्लाटून पीएसी को सुरक्षा के लिए लगाया गया।
हिंदूवादियों ने फूंका आयोजक का पुतला
हाथरस। सादाबाद में अंबेडकर शोभायात्रा में विवादित पोस्टर में संघ और भाजपा नेताओं को अपमानित किए जाने पर मुरसान में हिंदूवादियों ने शोभायात्रा के आयोजक का पुतला फूंक कर आक्रोश जताया। रेलवे स्टेशन के पास प्रदर्शन करते हुए हिंदूवादियों ने कहा कि अगर इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों में रवेंद्र सिंह ठेनुआं, भोला चौधरी, पीयूष, नीरज, कपिल शर्मा आदि शामिल रहे।