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पति ने ही रेता था रजनी का गला
ब्यूूूराे, अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Sat, 07 Jan 2017 11:12 PM IST
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injured lady
- फोटो : amar ujala
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हाथरस। बरेली के नवाबगंज की रहने वाली रजनी के साथ लूटपाट और जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने शनिवार को पर्दा उठाते हुए कहा कि पति मुकेश ने ही उसका गला रेता था। वह पहले भी एक बार घर में रजनी को मारने की कोशिश कर चुका था। पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जल्द खुलासे के लिए आईजी जोन सुजीत पांडेय ने हाथरस जंक्शन थाने की पुलिस को पांच हजार रुपये का इनाम दिया है।
एसपी दिलीप कुमार के मुताबिक आरोपी मुकेश दहेज में कार मांग रहा था। अचानक दो महीने पहले वह नई कार ले आया। घटना की रात को नौ बजे वह बरेली से आगरा के लिए चला था। पुलिस के मुताबिक मुकेश ने उन्हें पूछताछ में बताया है कि 29 दिसंबर को ही उसने रस्सी और चाकू गाड़ी में छिपाकर रख दिया था। 28 हजार रुपये पर तय किए गए हमलावरों को वह बस स्टैंड पर छोड़कर रजनी के घर पहुंचा था। योजना के मुताबिक बदायूं के पास हमलावरों ने मुकेश से लिफ्ट मांग कार में सवार हो गए। इसके बाद नाटकीय तौर पर उन्होंने रस्सी का फंदा कार चला रहे मुकेश के गले में डाल दिया।
इससे घबराई रजनी के चीखने पर हमलावरों ने उसके गले को ईयर फोन की लीड से घोटने की कोशिश की। रजनी के बेहोश होते ही हमलावर डर गए और भाग निकले। हमलावरों के साथ छोड़ने पर मुकेश ने अगसौली के पास कार रोकी और रजनी को सड़क से खींचकर झाड़ियों तक लाने के बाद उसका गला रेत दिया। उसे यह भरोसा था कि खून बहने से रजनी की मौत हो जाएगी। मुकेश ने वाहनपुर के पास पहुंचकर पुलिस को फोन किया और तय कहानी बताकर गुमराह किया।
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उधर, होश में आई रजनी ने एक हाथ से अपने कटे हुए गले को सहारा दिया और सरकते हुए सड़क तक आ गई। हाथ से इशारा करने पर कई लोग उसे पागल महिला समझ रहे थे, लेकिन एक कार सवार ने उसे गौर से देखा और यूपी 100 को सूचना दी।
जलाकर मारने की हुई थी कोशिश
एसपी दिलीप कुमार के मुताबिक मुकेश रजनी को नापसंद भी करता था। संतान न होने के कारण भी उसको रजनी से छुटकारा पाने का बहाना मिल गया था। अपनी मां, बहन और एक भाई को भी उसने अपने पक्ष में तैयार कर लिया था। करीब पांच महीने पहले रसोई में सिलेंडर चालू कर रजनी को अंदर बंद कर दिया गया था। इस हादसे में पड़ोसियों के मदद करने के कारण वह बच गई। इसके बाद मुकेश के पिता के माफी मांगने पर रजनी के पिता रिटायर्ड सूबेदार मेजर सीएल सक्सेना ने सबको माफ कर दिया था।
पर्स में जेवरात मिलने पर हुआ शक
एसपी दिलीप कुमार को मुकेश पर पहले से ही शक था। मौके पर पहुंचे एसपी को मुकेश की बिना नंबर की नई गाड़ी वहीं खड़ी मिली। गाड़ी में रजनी का पर्स भी मिला जिसमें जेवरात मौजूद थे। इससे लूटपाट की बात पर शक पैदा हुआ। लुटेरों के मुकेश को चोट न पहुंचाने की बात भी संदेह पैदा कर रही थी। शक होने पर एंबुलेंस में मुकेश के साथ पुलिस को भी भेजा गया। इसके बाद मुकेश का फोन सर्विलांस पर लगा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर मुकेश को हिरासत में लेकर जब पूछताछ की गई तो उसने सारा सच उगल दिया।
मां की शिकायत पर तरमीम किया केस
हाथरस जंक्शन पुलिस ने रजनी की मां दुर्गा सक्सेना की शिकायत पर केस को दहेज उत्पीड़न और धारा 307 के तहत तरमीम कर दिया है। मुकेश पुत्र राजाराम खटीमा, ऊधमसिंह नगर, उत्तराखंड के अलावा उसकी मां नन्नी देवी, बहन विमला, भाई राजेश को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मुकेश की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल खून से सना चाकू और पीड़िता की शॉल बरामद की है।
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एसपी दिलीप कुमार के मुताबिक आरोपी मुकेश दहेज में कार मांग रहा था। अचानक दो महीने पहले वह नई कार ले आया। घटना की रात को नौ बजे वह बरेली से आगरा के लिए चला था। पुलिस के मुताबिक मुकेश ने उन्हें पूछताछ में बताया है कि 29 दिसंबर को ही उसने रस्सी और चाकू गाड़ी में छिपाकर रख दिया था। 28 हजार रुपये पर तय किए गए हमलावरों को वह बस स्टैंड पर छोड़कर रजनी के घर पहुंचा था। योजना के मुताबिक बदायूं के पास हमलावरों ने मुकेश से लिफ्ट मांग कार में सवार हो गए। इसके बाद नाटकीय तौर पर उन्होंने रस्सी का फंदा कार चला रहे मुकेश के गले में डाल दिया।
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इससे घबराई रजनी के चीखने पर हमलावरों ने उसके गले को ईयर फोन की लीड से घोटने की कोशिश की। रजनी के बेहोश होते ही हमलावर डर गए और भाग निकले। हमलावरों के साथ छोड़ने पर मुकेश ने अगसौली के पास कार रोकी और रजनी को सड़क से खींचकर झाड़ियों तक लाने के बाद उसका गला रेत दिया। उसे यह भरोसा था कि खून बहने से रजनी की मौत हो जाएगी। मुकेश ने वाहनपुर के पास पहुंचकर पुलिस को फोन किया और तय कहानी बताकर गुमराह किया।
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उधर, होश में आई रजनी ने एक हाथ से अपने कटे हुए गले को सहारा दिया और सरकते हुए सड़क तक आ गई। हाथ से इशारा करने पर कई लोग उसे पागल महिला समझ रहे थे, लेकिन एक कार सवार ने उसे गौर से देखा और यूपी 100 को सूचना दी।
जलाकर मारने की हुई थी कोशिश
एसपी दिलीप कुमार के मुताबिक मुकेश रजनी को नापसंद भी करता था। संतान न होने के कारण भी उसको रजनी से छुटकारा पाने का बहाना मिल गया था। अपनी मां, बहन और एक भाई को भी उसने अपने पक्ष में तैयार कर लिया था। करीब पांच महीने पहले रसोई में सिलेंडर चालू कर रजनी को अंदर बंद कर दिया गया था। इस हादसे में पड़ोसियों के मदद करने के कारण वह बच गई। इसके बाद मुकेश के पिता के माफी मांगने पर रजनी के पिता रिटायर्ड सूबेदार मेजर सीएल सक्सेना ने सबको माफ कर दिया था।
पर्स में जेवरात मिलने पर हुआ शक
एसपी दिलीप कुमार को मुकेश पर पहले से ही शक था। मौके पर पहुंचे एसपी को मुकेश की बिना नंबर की नई गाड़ी वहीं खड़ी मिली। गाड़ी में रजनी का पर्स भी मिला जिसमें जेवरात मौजूद थे। इससे लूटपाट की बात पर शक पैदा हुआ। लुटेरों के मुकेश को चोट न पहुंचाने की बात भी संदेह पैदा कर रही थी। शक होने पर एंबुलेंस में मुकेश के साथ पुलिस को भी भेजा गया। इसके बाद मुकेश का फोन सर्विलांस पर लगा दिया गया। परिजनों की शिकायत पर मुकेश को हिरासत में लेकर जब पूछताछ की गई तो उसने सारा सच उगल दिया।
मां की शिकायत पर तरमीम किया केस
हाथरस जंक्शन पुलिस ने रजनी की मां दुर्गा सक्सेना की शिकायत पर केस को दहेज उत्पीड़न और धारा 307 के तहत तरमीम कर दिया है। मुकेश पुत्र राजाराम खटीमा, ऊधमसिंह नगर, उत्तराखंड के अलावा उसकी मां नन्नी देवी, बहन विमला, भाई राजेश को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मुकेश की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल खून से सना चाकू और पीड़िता की शॉल बरामद की है।