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पूर्व मंत्री समर्थकों पर दर्ज करें मुकदमा
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 May 2016 11:43 PM IST
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डीएम को ज्ञापन सौंपते विधायक देवेंद्र अग्रवाल।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
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हाथरस। बेटे रजत अग्रवाल पर हमले के मामले में पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई रामेश्वर उपाध्याय समेत पांच आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने के विरोध में सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल मंगलवार को डीएम एके सिंह से मिले। उन्होंने डीएम को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें शहर की कानून एवं शांति व्यवस्था को भंग करने वाले पूर्व मंत्री के भाई जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय और उनके समर्थकों पर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। चेतावनी दी कि अगर 48 घंटे के भीतर मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई तो 12 मई को वह एसपी कार्यालय पर अपने समर्थकों के साथ धरना देने को मजबूर होंगे।
विधायक ने आरोप लगाया कि उनका बेटा रजत अग्रवाल निवासी कंचन नगर 27 मार्च, 2013 को उसके भाइयों के यहां आवास-विकास कॉलोनी में होली मिलने के लिए जा रहा था। उसी समय रामेश्वर और उनके संरक्षित गुंडों ने मारपीट और लूटपाट करते हुए हत्या की नीयत से फायर किए, जिससे वह बाल-बाल बच गया। घटना की रिपोर्ट उनके साले धर्मेंद्र ने सदर कोतवाली में दर्ज कराई, जिसकी जांच कर एटा पुलिस ने रामेश्वर उपाध्याय और उनके सहयोगियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र 31 अक्तूबर, 2014 को दाखिल किया है। रामेश्वर और उनके सहयोगियों पूरी जानकारी और ज्ञान होने पर भी न्यायालय में हाजिर नहीं हुए। न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने जब रामेश्वर की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी तो पूर्व मंत्री परिवार के लोगों के संरक्षित गुंडों ने कानून का मजाक बनाते हुए शांति भंग करने जैस कृत्य किया। अवैधानिक रूप से कोतवाली का घेराव किया गया। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध अमर्यादित नारेबाजी की गई। गैर जमानती वारंट के बाद भी फरार चल रहे रामेश्वर और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि उनके, उनके परिवार या किसी सहयोगी पर किसी तरह का हमला होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन की होगी।
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विधायक ने आरोप लगाया कि उनका बेटा रजत अग्रवाल निवासी कंचन नगर 27 मार्च, 2013 को उसके भाइयों के यहां आवास-विकास कॉलोनी में होली मिलने के लिए जा रहा था। उसी समय रामेश्वर और उनके संरक्षित गुंडों ने मारपीट और लूटपाट करते हुए हत्या की नीयत से फायर किए, जिससे वह बाल-बाल बच गया। घटना की रिपोर्ट उनके साले धर्मेंद्र ने सदर कोतवाली में दर्ज कराई, जिसकी जांच कर एटा पुलिस ने रामेश्वर उपाध्याय और उनके सहयोगियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र 31 अक्तूबर, 2014 को दाखिल किया है। रामेश्वर और उनके सहयोगियों पूरी जानकारी और ज्ञान होने पर भी न्यायालय में हाजिर नहीं हुए। न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने जब रामेश्वर की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी तो पूर्व मंत्री परिवार के लोगों के संरक्षित गुंडों ने कानून का मजाक बनाते हुए शांति भंग करने जैस कृत्य किया। अवैधानिक रूप से कोतवाली का घेराव किया गया। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध अमर्यादित नारेबाजी की गई। गैर जमानती वारंट के बाद भी फरार चल रहे रामेश्वर और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि उनके, उनके परिवार या किसी सहयोगी पर किसी तरह का हमला होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन की होगी।
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