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50 हजार की घूस लेते धरे वित्त एवं लेखाधिकारी
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jun 2016 11:48 PM IST
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कोतवाली में विजिलेंस टीम के साथ बैठे रिश्वत लेने के आरोपी एओ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
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हाथरस। सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) आगरा की टीम ने बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी बृजेश कुमार राजपूत को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए उनके कार्यालय से रंगे हाथ दबोच लिया। उन पर आरोप है कि वह पारिवारिक पेंशन की पत्रावली स्वीकृत करने के नाम पर 50 हजार रुपये ले रहे थे। यह पत्रावली करीब दो साल से उनके कार्यालय में लंबित बताई जा रही है। विजिलेंस की इस कार्रवाई से दफ्तर में खलबली मच गई। विजिलेंस टीम एओ को अपनी अभिरक्षा में कोतवाली ले आई। वहां एओ के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा भी दर्ज करा दिया।
आगरा से आए विजिलेंस के सीओ बलधारी सिंह ने बताया कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय अरौठा में तैनात शिक्षणेत्तर कर्मचारी धीरेंद्र कुमार वर्मा निवासी ढकरई सादाबाद ने 31 मई, 2016 में विजिलेंस को एक शिकायत सौंपी। आरोप था कि उनके पिता भगवान सिंह नगला स्वरूपा सादाबाद में प्रधानाध्यापक के रूप में तैनात थे। उनकी सेवाकाल में ही मौत हो गई, जिसके बाद विभाग में पिता की जगह उनकी तैनाती तो शिक्षणेत्तर कर्मचारी के रूप में हो गई, लेकिन उनकी मां किरन देवी की पारिवारिक पेंशन की पत्रावली वित्त एवं लेखाधिकारी बृजेश कुमार राजपूत द्वारा 50 हजार रुपये की मांग करते हुए स्वीकृत नहीं की जा रही थी। इसे लेकर वह कई बार वित्त एवं लेखाधिकारी से मिले और काफी मिन्नतें भी कीं, लेकिन वित्त एवं लेखाधिकारी ने पत्रावली को स्वीकृति प्रदान नहीं की।
उनकी शिकायत पर बुधवार की सुबह विजिलेंस टीम हाथरस आ गई थी। टीम के प्रभारी सीओ बलधारी सिंह ने डीएम अविनाशकृष्ण सिंह से मिलकर दो सरकारी गवाह नियुक्त करने की मांग की। जिस पर डीएम ने सीआरए शीतल प्रसाद शर्मा और जेए प्रथम रामप्रकाश को सरकारी गवाह के रूप में विजिलेंस टीम के साथ भेजा। इसके बाद टीम ने 2.30 बजे वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर एओ को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। सीओ ने बताया कि जो नोट एओ से बरामद किए गए हैं, उन पर उन्होंने पहले ही अपने हस्ताक्षर कर दिए थे।
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सीओ विजिलेंस ने बताया कि वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक बृजेश कुमार राजपूत के खिलाफ कोतवाली सदर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, जिसमें वित्त एवं लेखाधिकारी पर सरकारी सेवक के दायित्वों के निर्वहन में भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए गए हैं।
विजिलेंस टीम में ये थे शामिल
विजिलेंस टीम में सीओ बलधारी सिंह, एसएचओ अभय सिंह, एसएचओ प्रदीप कौशिक, एसएचओ सियाराम निमेष, एसएचओ विनोद यादव, एसआई राजकुमार दीक्षित, सुरेंद्र सिंह, धर्मेंद्र गौतम आदि प्रमुख थे।
गिरफ्तार किए गए वित्त एवं लेखाधिकारी बृजेश राजपूत को मेरठ में विजिलेंस की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। उन्हें 50 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है।
बलधारी सिंह, सीओ विजिलेंस आगरा
-मैने कोई रिश्वत नहीं ली है। मुझे फंसाया गया है। जब मैने विभाग के 100 शिक्षकों की पेंशन पत्रावली स्वीकृत कर भेज दी तो एक को ही क्यों रोकता। पत्रावली फर्जी थी, इसलिए मैने उसे स्वीकृति प्रदान नहीं की। मैं साजिश का पर्दाफाश करके रहूंगा। मैने नोटों को हाथ ही नहीं लगाया तो रंगे हाथ पकड़ने की बात कैसे कही जा रही है।
-बृजेश कुमार राजपूत, एओ बेसिक हाथरस
डीआईओएस, जेई भी पकड़े जा चुके हैं रिश्वत लेते
हाथरस। जिले में पिछले कुछ सालों में सरकारी अफसरों को रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने का यह तीसरा मामला है। अकेले शिक्षा विभाग के ही दो अफसर रिश्वत लेते हुए विजिलेंस के हत्थे चढ़ चुके हैं। वित्त एवं लेखाधिकारी दूसरे ऐसे अफसर हैं, जोकि विजिलेंस के शिकार बने हैं। इससे पूर्व 2009 में तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक रामाज्ञा कुमार को भी विजिलेंस की टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ने का दावा किया था। उसके बाद बिजली महकमे के एक जेई को भी विजिलेंस ने रिश्वत लेते हुए पकड़ने का दावा किया। हालांकि तत्कालीन डीआईओएस कुछ महीने बाद ही बहाल हो गए।
यह तीनों ही मामले यह जताने के लिए काफी हैं कि जिले के सरकारी तंत्र में रिश्वत खोरी की दीमक जड़ों तक घुस चुकी है। बिना लेन-देन के पब्लिक के काम करने की आदत भी सरकारी मुलाजिम छोड़ चुके हैं। कर्मचारियों की तो बात छोड़ दें, बड़े अफसर भी रिश्वतखोरी के इस खेल में पीछे नहीं हैं। जो लोग समर्थ हैं, वह तो चुपचाप ले-देकर अपने काम करा ले जाते हैं, लेकिन जिनके पास देने को पैसा नहीं है, वह अपने काम के लिए वर्षों तक दफ्तरों के चक्कर ही काटते रह जाते हैं। उन्हें दफ्तरों में नियम-कानून की घुट्टी तो ऐसे पिलाई जाती है मानो वहां सब कुछ नियमों से ही चल रहा हो। जो लोग चुपचाप अफसरों और कर्मियों की भेंट-पूजा कर देते हैं, उनके काम में नियम-कानून का कोई रोड़ा ही नहीं रह जाता। नियमों के विपरीत काम भी चुपचाप हो जाते हैं। अफसोस तो यह है कि इन विभागों में रिश्वतखोरी गैर कानूनी काम से ज्यादा जायज कामों के नाम पर ली जाती है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा वह लोग भुगतते हैं, जोकि आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनके पास कोई राजनीतिक सिफारिश नहीं है।
एओ दफ्तर, कोतवाली पर शिक्षक-कर्मियों का जमघट
हाथरस। वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) को रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने की खबर पूरे जिले में आग की तरह फैल गई। पहले एओ दफ्तर और फिर कोतवाली हाथरस में शिक्षक और कर्मचारियों का जमावाड़ा लग गया। शिक्षकों में इस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई शिक्षक तो इस कार्रवाई का समर्थन करते नजर आए। कुछ शिक्षक और कर्मियों ने एओ से मिलने की कोशिश भी की, लेकिन विजिलेंस ने किसी को उनसे मिलने नहीं दिया गया। सबकी नजरें कोतवाली निरीक्षक के कमरे में बैठे एओ पर टिकी थीं। हर कोई एओ का चेहरा पढ़ने की कोशिश कर रहा था और यह पता लगाने में जुटा था कि आखिर ऐसी नौबत कैसे आई। इस कार्रवाई से बेसिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसर और कर्मचारी भी सहमे नजर आए।
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आगरा से आए विजिलेंस के सीओ बलधारी सिंह ने बताया कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय अरौठा में तैनात शिक्षणेत्तर कर्मचारी धीरेंद्र कुमार वर्मा निवासी ढकरई सादाबाद ने 31 मई, 2016 में विजिलेंस को एक शिकायत सौंपी। आरोप था कि उनके पिता भगवान सिंह नगला स्वरूपा सादाबाद में प्रधानाध्यापक के रूप में तैनात थे। उनकी सेवाकाल में ही मौत हो गई, जिसके बाद विभाग में पिता की जगह उनकी तैनाती तो शिक्षणेत्तर कर्मचारी के रूप में हो गई, लेकिन उनकी मां किरन देवी की पारिवारिक पेंशन की पत्रावली वित्त एवं लेखाधिकारी बृजेश कुमार राजपूत द्वारा 50 हजार रुपये की मांग करते हुए स्वीकृत नहीं की जा रही थी। इसे लेकर वह कई बार वित्त एवं लेखाधिकारी से मिले और काफी मिन्नतें भी कीं, लेकिन वित्त एवं लेखाधिकारी ने पत्रावली को स्वीकृति प्रदान नहीं की।
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उनकी शिकायत पर बुधवार की सुबह विजिलेंस टीम हाथरस आ गई थी। टीम के प्रभारी सीओ बलधारी सिंह ने डीएम अविनाशकृष्ण सिंह से मिलकर दो सरकारी गवाह नियुक्त करने की मांग की। जिस पर डीएम ने सीआरए शीतल प्रसाद शर्मा और जेए प्रथम रामप्रकाश को सरकारी गवाह के रूप में विजिलेंस टीम के साथ भेजा। इसके बाद टीम ने 2.30 बजे वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर एओ को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। सीओ ने बताया कि जो नोट एओ से बरामद किए गए हैं, उन पर उन्होंने पहले ही अपने हस्ताक्षर कर दिए थे।
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सीओ विजिलेंस ने बताया कि वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक बृजेश कुमार राजपूत के खिलाफ कोतवाली सदर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, जिसमें वित्त एवं लेखाधिकारी पर सरकारी सेवक के दायित्वों के निर्वहन में भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए गए हैं।
विजिलेंस टीम में ये थे शामिल
विजिलेंस टीम में सीओ बलधारी सिंह, एसएचओ अभय सिंह, एसएचओ प्रदीप कौशिक, एसएचओ सियाराम निमेष, एसएचओ विनोद यादव, एसआई राजकुमार दीक्षित, सुरेंद्र सिंह, धर्मेंद्र गौतम आदि प्रमुख थे।
गिरफ्तार किए गए वित्त एवं लेखाधिकारी बृजेश राजपूत को मेरठ में विजिलेंस की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। उन्हें 50 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया है।
बलधारी सिंह, सीओ विजिलेंस आगरा
-मैने कोई रिश्वत नहीं ली है। मुझे फंसाया गया है। जब मैने विभाग के 100 शिक्षकों की पेंशन पत्रावली स्वीकृत कर भेज दी तो एक को ही क्यों रोकता। पत्रावली फर्जी थी, इसलिए मैने उसे स्वीकृति प्रदान नहीं की। मैं साजिश का पर्दाफाश करके रहूंगा। मैने नोटों को हाथ ही नहीं लगाया तो रंगे हाथ पकड़ने की बात कैसे कही जा रही है।
-बृजेश कुमार राजपूत, एओ बेसिक हाथरस
डीआईओएस, जेई भी पकड़े जा चुके हैं रिश्वत लेते
हाथरस। जिले में पिछले कुछ सालों में सरकारी अफसरों को रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने का यह तीसरा मामला है। अकेले शिक्षा विभाग के ही दो अफसर रिश्वत लेते हुए विजिलेंस के हत्थे चढ़ चुके हैं। वित्त एवं लेखाधिकारी दूसरे ऐसे अफसर हैं, जोकि विजिलेंस के शिकार बने हैं। इससे पूर्व 2009 में तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक रामाज्ञा कुमार को भी विजिलेंस की टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ने का दावा किया था। उसके बाद बिजली महकमे के एक जेई को भी विजिलेंस ने रिश्वत लेते हुए पकड़ने का दावा किया। हालांकि तत्कालीन डीआईओएस कुछ महीने बाद ही बहाल हो गए।
यह तीनों ही मामले यह जताने के लिए काफी हैं कि जिले के सरकारी तंत्र में रिश्वत खोरी की दीमक जड़ों तक घुस चुकी है। बिना लेन-देन के पब्लिक के काम करने की आदत भी सरकारी मुलाजिम छोड़ चुके हैं। कर्मचारियों की तो बात छोड़ दें, बड़े अफसर भी रिश्वतखोरी के इस खेल में पीछे नहीं हैं। जो लोग समर्थ हैं, वह तो चुपचाप ले-देकर अपने काम करा ले जाते हैं, लेकिन जिनके पास देने को पैसा नहीं है, वह अपने काम के लिए वर्षों तक दफ्तरों के चक्कर ही काटते रह जाते हैं। उन्हें दफ्तरों में नियम-कानून की घुट्टी तो ऐसे पिलाई जाती है मानो वहां सब कुछ नियमों से ही चल रहा हो। जो लोग चुपचाप अफसरों और कर्मियों की भेंट-पूजा कर देते हैं, उनके काम में नियम-कानून का कोई रोड़ा ही नहीं रह जाता। नियमों के विपरीत काम भी चुपचाप हो जाते हैं। अफसोस तो यह है कि इन विभागों में रिश्वतखोरी गैर कानूनी काम से ज्यादा जायज कामों के नाम पर ली जाती है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा वह लोग भुगतते हैं, जोकि आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनके पास कोई राजनीतिक सिफारिश नहीं है।
एओ दफ्तर, कोतवाली पर शिक्षक-कर्मियों का जमघट
हाथरस। वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) को रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने की खबर पूरे जिले में आग की तरह फैल गई। पहले एओ दफ्तर और फिर कोतवाली हाथरस में शिक्षक और कर्मचारियों का जमावाड़ा लग गया। शिक्षकों में इस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई शिक्षक तो इस कार्रवाई का समर्थन करते नजर आए। कुछ शिक्षक और कर्मियों ने एओ से मिलने की कोशिश भी की, लेकिन विजिलेंस ने किसी को उनसे मिलने नहीं दिया गया। सबकी नजरें कोतवाली निरीक्षक के कमरे में बैठे एओ पर टिकी थीं। हर कोई एओ का चेहरा पढ़ने की कोशिश कर रहा था और यह पता लगाने में जुटा था कि आखिर ऐसी नौबत कैसे आई। इस कार्रवाई से बेसिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसर और कर्मचारी भी सहमे नजर आए।