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अपहरण, दुष्कर्म में अभियुक्त को सात साल कैद

Sat, 29 Jul 2017 11:30 PM IST
Updated Sat, 29 Jul 2017 11:30 PM IST
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अपहरण, दुष्कर्म में अभियुक्त को सात साल कैद
ब्यूरो, अमर उजाला, हाथरस।
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय ने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को दोषी मानते हुए सात साल कैद की सजा सुनाई है। न्यायालय ने उस पर पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोतवाली सहपऊ में पीड़िता के पिता की तरफ से दी गई तहरीर में कहा गया कि तीन फरवरी 1992 को दिन में करीब 12 बजे एक शख्स आया और उन्होंने अपनी पुत्री की शादी उनके बेटे के साथ करने को कहा। उन्होंने मना कर दिया तो वह धमकी दे चले गए कि देखते हैं दूसरी जगह कैसे शादी करते हो। बकौल वादी, उसने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। तीन फरवरी को ही शाम करीब साढ़े सात बजे यह शख्स अपने पुत्र और अन्य लोगों के साथ असलहे लेकर उनके घर में घुस आए और उनकी 19 वर्षीय पुत्री को रसोई से जबर्दस्ती घसीटते हुए ले गए।
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जब वह, उनकी पत्नी और पुत्र लड़की को बचाने के लिए चिल्लाते हुए दौड़े तो इन सभी लोगों ने उन पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी। लड़की का शोर सुनकर काफी लोग जमा हो गए, लेकिन फायरिंग के चलते कोई विरोध की हिम्मत नहीं जुटा सका। इस मामले की रिपोर्ट रघुवीर, निरोत्तम, भीकम व अरविंद के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने अपहृता का चिकित्सकीय परीक्षण कराने के बाद उसके धारा 164 में बयान भी कराए।
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इस मामले में पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया। गौरतलब है कि मुकदमे के दौरान सह अभियुक्त रघुवीर प्रसाद, भीकम और अरविंद की मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ केस की कार्यवाही उपशमित की जा चुकी है। वर्तमान में एकमात्र अभियुक्त निरोत्तम पर ही केस चल रहा है। न्यायालय ने निरोत्तम को धारा 366, 368, 376, 452,506 के तहत दोषी पाते हुुए अलग-अलग सजा सुनाई है, जबकि धारा 307 के तहत दोषमुक्त कर दिया गया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियुक्त द्वारा जेल में बिताई गई अवधि भी सजा में समायोजित की जाएगी। अर्थदंड की आधी धनराशि प्रतिकर के रूप में पीड़िता को दी जाएगी।
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