Lok Sabha Elections 2024: रालोद के खाते में सीट जाने की चर्चा से सक्रिय हुए दावेदार, यह हाथरस सीट का गणित
1991 में भाजपा ने हाथरस सुरक्षित सीट से लाल बहादुर को प्रत्याशी बनाया और उन्होंने नता दल के प्रत्याशी मूलचंद हराकर सीट जीती थी। 1996 से 2004 तक में भाजपा के किशन लाल दिलेर सांसद रहे। उन्होंने चार बार यह सीट जीती। 2014 भाजपा के राजेश दिवाकर और 2019 में भाजपा के राजवीर सिंह दिलेर ने जीत हासिल की।
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हाथरस लोकसभा सीट गठबंधन में रालोद के खाते में जाने की चर्चा से कार्यकर्ता सक्रिय हो गए हैं। पार्टी के ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष बृजेश चाहर ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की और उनकी नब्ज टटोली। इस बैठक में 10 से अधिक कार्यकर्ताओं ने टिकट के लिए दावेदारी की है।
20 जनवरी को सहपऊ रोड स्थित पार्टी कार्यालय पर हुई बैठक में पार्टी के लोकसभा संयोजक पूर्व जिलाध्यक्ष रामरसपाल सिंह पौनियां और बृज क्षेत्र अध्यक्ष बृजेश चाहर ने हाथरस लोकसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी के चयन को लेकर भी विचार विमर्श किया। साथ ही चार फरवरी को मथुरा में होने जा रहे पार्टी की युवा संसद कार्यक्रम को भी सफल बनाने पर मंथन किया।
विधायक गुड्डू चौधरी ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर कार्यकर्ता और पदाधिकारी जुट जाएं। गांव-गांव लोगों के बीच जाकर उन्हें पार्टी की रीति नीतियों, पूर्व पीएम चरण सिंह व चौ. अजित सिंह के कार्यों की जानकारी दें। युवा संसद में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इसे पार्टी अध्यक्ष चौधरी जयंत चौधरी संबोधित करेंगे। रामरसपाल सिंह पौनिया ने कहा कि हाथरस और मथुरा लोकसभा पार्टी की मजबूत सीट है। पार्टी जिसे भी प्रत्याशी बनाए, हम सभी को उसका तनमनधन से सहयोग करना है और उसे विजयी बनाना है। उन्होंने बताया कि हाथरस लोकसभा क्षेेत्र में 25-25 सेक्टर बनाए जाएंगे। बैठक में पूर्व विधायक प्रताप चौधरी, जिपं सदस्य सुआ पहलवान ने भी विचार व्यक्त किए।
बैठक में ब्लाक प्रमुख बहादुर सिंह, नीरज शर्मा, कालीचरण, वीरपाल दिवाकर, टीकम सूर्यवंशी, रामअवतार दीपू चौधरी, भूरा पहलवान वनगढ़, वीरेंद्र बघेल, वीरेंद्र धनगर, नवाब सिंह छौंकर, कोमल सिंह, भीमा राजा, महेंद्र सिंह धनगर, मनोज चौधरी, यदुवीर सिसौदिया, ओमवीर प्रधान, रामसहाय चौधरी आदि मौजूद रहे।
साल 2009 में भाजपा गठबंधन से चुनाव लड़कर रालोद ने जीती थी सीट
समाजवादी पार्टी व राष्ट्रीय लोकदल के बीच हुए गठबंधन में हाथरस की लोकसभा सीट से रालोद प्रत्याशी उतारे जाने से मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है। लोकसभा हाथरस में अलीगढ़ की विधानसभा इगलास व छर्रा भी शामिल हैं। इगलास में जाट वोट संख्या अधिक है। सादाबाद विधानसभा भी जाट बाहुल्य क्षेत्र है। सिकन्दराराऊ में सपा मुकाबले में रही है। 2009 के लोकसभा चुनाव में रालोद ने यह सीट जीती थी, लेकिन तब उसका गठबंधन भाजपा के साथ था और सारिका सिंह सांसद चुनी गई थी।
भाजपा का रहा है इस सीट पर दबदबा
पिछले आंकड़ों को देखें तो 1991 में भाजपा ने हाथरस सुरक्षित सीट से लाल बहादुर को प्रत्याशी बनाया और उन्होंने नता दल के प्रत्याशी मूलचंद हराकर सीट जीती थी। 1996 से 2004 तक में भाजपा के किशन लाल दिलेर सांसद रहे। उन्होंने चार बार यह सीट जीती। 2014 भाजपा के राजेश दिवाकर और 2019 में भाजपा के राजवीर सिंह दिलेर ने जीत हासिल की।
सपा से दावेदार हुए मायूस
हाथरस लोकसभा सीट से सपा में कई नेता दावेदारी कर रहे हैं और क्षेत्र में सक्रिय है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन, सपा से राम नारायण काके भी प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। ऐसे में सीट रालोद के खाते में जाने से उनको मायूसी का सामना करना पड़ सकता है।
गठबंधन को लेकर हाथरस लोकसभा सीट रालोद के खाते में जाना लगभग तय है, लेकिन इस पर अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उम्मीद है कि रविवार को स्थिति साफ होगी तब आगे की रणनीति बनाई जाएगी।-देवेन्द्र कुशवाह, जिलाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी।