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कैद में किताबें: 44.90 लाख से बने राजकीय जिला पुस्तकालय का हाल है बेहाल, परिसर में गंदगी, सुविधाओं का है अभाव

Fri, 21 Jul 2023 03:58 AM IST
चमन शर्मा प्रशांत भारती, अमर उजाला, अलीगढ़
प्रशांत भारती, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 21 Jul 2023 03:58 AM IST
सार

हाथरस में निजी खर्चे पर संचालित पुस्तकालय तो दमखम के साथ चल रही हैं, लेकिन राजकीय जिला पुस्तकालय का हाल बेहाल है। हैरानी की बात यह है कि यहां इस पुस्तकालय में महज कुर्सी व मेज पड़ी हुई हैं। सुविधाओं के नाम तो न पानी है, और न शोचालय की व्यवस्था।

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condition of Hathras Government District Library made of 44.90 lakhs is pathetic
हाथरस जिला पुस्तकाल की किताबें रखने वाले कमरे में लगा ताला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाथरस के राजकीय जिला पुस्तकालय में सुविधाओं के अभाव के चलते यह भवन प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए लाभप्रद साबित नहीं हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस पुस्तकालय में चंद किताबें है, वह किताब भी ताले में बंद हैं। यहां तक कि लेटेस्ट अपडेट वर्जन की किताबें भी पुस्तकालय में नहीं हैं। पुस्तकालय के शुभारंभ के समय आई किताबें ही इस पुस्तकालय की शोभा बढ़ा रही हैं।

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हाथरस राजकीय अस्पताल
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 इस पुस्तकालय में चंद विद्यार्थी लेटेस्टों पुस्तकों को पढ़ने के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। जबकि इस पुस्तकालय भवन का शुभारंभ वर्ष 2013 में हुआ था। इस भवन के निर्माण में 44.90 लाख रुपये खर्च हुए थे। लाखों रुपये खर्च होने के बाबजूद इसका लाभ प्रतियोगियों को नहीं मिल पा रहा है। 
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शहर में निजी खर्चे पर संचालित पुस्तकालय तो दमखम के साथ चल रही हैं, लेकिन राजकीय जिला पुस्तकालय का हाल बेहाल है। हैरानी की बात यह है कि यहां इस पुस्तकालय में महज कुर्सी व मेज पड़ी हुई हैं। सुविधाओं के नाम तो न पानी है, और न शोचालय की व्यवस्था। यहां मौजूद चंद छात्रों ने बताया कि पुस्तकालय का ताला खोलने के लिए तक कोई नहीं आता है, खुद ही ताले की चाबी राजकीय कन्या इंटर कॉलेज से लाकर ताले को खोलना पड़ता है।

जिला पुस्तकालय में पसरा सन्नाटा

परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। पुस्तकालय के लिए आई किताबें ताले में बंद हैं। इस कारण विद्यार्थी खुद ही अपनी किताबों को लेकर पढ़ने के लिए आ जाते हैं। पूरे दिन में महज 5-10 विद्यार्थी ही पुस्तकालय में आते हैं। इस पुस्तकालय की बदहाली के कारण यहां प्रतियोगियों को निजी खर्चें पर निजी पुस्तकालयों का सहारा लेना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि राजकीय जिला पुस्तकालय की बदहाल स्थिति के कारण विद्यार्थियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। जबकि इस भवन के निर्माण में 44 लाख खर्च किए गए हैं। 

पुस्तकालय में कोई भी सुविधा नहीं हैं। बस यह है कि कुर्सी व मेज मिल जाती है। इंटरनेट , शौचालय सहित अन्य सुविधाएं भी नहीं मिल पाती हैं। -शिवम, एमए प्रथम वर्ष
एकांतवास में पढ़ता होता है, तो यहां चले आते हैं। खुद ही चाबी से ताला खोलना पड़ता है। इसकी चाबी जीजीआईसी से लेकर आनी पड़ती है। -संतोष कुमार, बीएससी तृतीय वर्ष
पुस्तकालय के बेहतर संचालन के लिए जीजीआईसी के प्रधानाचार्या से वार्ता की जाएगी। जो भी कमियां हैं, उनको दूर कराया जाएगा। -संत प्रकाश, जिला विद्यालय निरीक्षक, हाथरस

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