मंहगाई की ऐसी पड़ी मार कि घुंघरू टूट गए: बढ़ती महंगाई, सुरक्षा की कमी, कम मुनाफा, सरकारी प्रोत्साहन का अभाव
बिसावर में घुंघरू बनाने के पांच बड़े और करीब 20 छोटे कारखाने हैं। कारोबारियों के अनुसार इस कारोबार का सालाना टर्न टोवर दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है, लेकिन धीरे-धीरे यह सिमट रहा है।
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हाथरस में सादाबाद तहसील के बिसावर कस्बे में चांदी, कांसा व गिलट के घुंघरू बनाने का काम वैसे तो घर-घर में फैला हुआ है, लेकिन संरक्षण के अभाव में इस कुटीर उद्योग की खनक मंद पड़ती जा रही है। कारोबार से जुड़े कारोबारी और कारीगर इससे दूरी बनाते जा रहे हैं। कारोबारियों के लिए सुरक्षा की कमी, कम मुनाफा, बढ़ती महंगाई और सरकारी प्रोत्साहन का अभाव इसकी बड़ी वजह है।
क्षेत्र में इस उद्योग की शुरुआत गांव नगला शेखा में करीब सात दशक (70 साल) पहले हुई थी। कस्बा बिसावर के अलावा आसपास के गांवों में लोगों ने छोटे-छोटे कारखाने बना लिए। आसपास के लोग घरों में मजदूरी पर यह काम करने लगे। जिन घरों में यह काम होता है, उनकी महिलाएं और बच्चे तक इस काम से जुड़ गए। वर्तमान में करीब 20 हजार लोग इस कारोबार से जुड़े हैं। कई परिवारों में तो पुश्तों से यह काम होता चला आ रहा है।
मजदूरों को मजदूरी के रूप में औसतन 200 से लेकर तीन सौ रुपये तक मिल जाते हैं। बिसावर में घुंघरू बनाने के पांच बड़े और करीब 20 छोटे कारखाने हैं। कारोबारियों के अनुसार इस कारोबार का सालाना टर्न टोवर दो हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है, लेकिन धीरे-धीरे यह सिमट रहा है।
इस उद्योग को अब सरकारी संरक्षण जरूरत है। यदि सरकार इसे संरक्षण दे और इससे जुड़े कारोबारियों को सुविधाएं प्रदान करे तो यह कारोबार और बढ़ेगा। सुरक्षा न मिलने की वजह से कई कारोबारियों ने इस उद्योग से किनारा कर लिया है।- ज्ञानेंद्र सिंह, कारोबारी।
इस कारोबार को कुटीर उद्योग में शामिल किया जाएगा तो लोगों के लिए रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे। व्यापारियों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलने से कारोबार में भी बढ़ोतरी होगी। नई पीढ़ी भी इससे जुड़ेगी।- धर्मवीर सिंह, कारोबारी।
कई सालों से इस काम को कर रहा हूं। बीते करीब पांच साल से इसमे मंदी आती जा रही है। महंगाई की वजह से पहले की अपेक्षा अब काम कम हो रहा है। नई पीढ़ी अब इस काम से दूरी बना रही है।- बहादुर सिंह, कारीगर।
बिसावर को थाना बनाने के लिए भूमि चिह्नित कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों ने भी भूमि पर संतुष्टि जताई है। इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। केवल अनुमति मिलने का इंतजार है। इसके बाद थाने के भवन का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - संजय कुमार, एसडीएम, सादाबाद।
बिसावर के इस उद्योग की बेहतरी का मुद्दा कई बार मैंने विधानसभा में उठाया गया है। कारोबार को बढ़ावा देने के लिए विभाग के मंत्रियों व सचिवों से जल्द वार्ता करूंगा। सुरक्षा की दृष्टि से थाने की स्थापना जल्द हो जाएगी।- प्रदीप कुमार सिंह उर्फ गुड्डू चौधरी, विधायक सादाबाद।
अभी शासन की ओर से घुंघरू उद्योग के संबंध में कोई निर्देश नहीं मिले हैं। नए उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहन की कई योजनाएं चल रही हैं। इनका लाभ कारोबारी ले सकते हैं।- अजिलेश कुमार, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र।
लूट की घटनाओं से व्यापारियों का मोह हो रहा भंग
अधिकांश कारोबारी घुंघरू बनाने के लिए कच्चे माल की खरीद आगरा की नमक मंडी, मथुरा और अलीगढ़ से करते हैं। माल लाते वक्त कई कारोबारियों से लूट की घटनाएं घटित हुई हैं। कुछ घटनाओं में व्यापारियों की जान तक चली गई है। सुरक्षा की दृष्टि से व्यापारी कई वर्षों से कस्बे में थाना बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन यह मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है।
देश के बड़े शहरों में बिकते हैं बिसावर के घुंघरू
मथुरा, आगरा, जयपुर, गुजरात आदि शहरों में बिसावर के घुंघरू बिकते हैं। शहरों के आभूषण निर्माता इन्हें खरीदकर पायल से लेकर अन्य आभूषणों में इनका प्रयोग करते हैं। आभूषणों के साथ दुल्हन के लिए बनने वाले लहंगे में भी घुंघरू का प्रयोग होता है।
15 से अधिक गांवों में फैल हुआ है काम
घुंघरू बनाने का काम कस्बा बिसावर के अलावा तसींगा, नगला छत्ती, नगला मदारी, गढ़ी अंता, ताजपुर, विधिपुर, नगला शेखा, वनगढ़ सहित करीब 15 गांवों में किया जाता है।