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Hathras News: जानलेवा बना कोल्ड डायरिया, तीन माह के बच्चे की मौत
Fri, 28 Nov 2025 02:22 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 28 Nov 2025 02:22 AM IST
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जिले में सर्दी व बुखार के साथ बच्चों पर डायरिया का भी कहर बरप रहा है। बृहस्पतिवार को एक और बच्चे की कोल्ड डायरिया के कारण जान चली गई। तीन माह के बच्चे को परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसे मृत घोषित कर दिया। एक महीने में अब तक बुखार से मरने वालों की संख्या 12 हो गई है। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में भी सर्दी व बुखार के मरीजों की भरमार रही।
हसायन के गांव खिटौली निवासी इसरार के तीन माह के बेटे सादिक की पिछले कई दिनों से तबियत खराब थी। इसरार ने बताया कि दो दिन पहले गांव के पास ही चिकित्सक को दिखा दिया था। उसे सर्दी की शिकायत थी और छाती पर कफ जमा था। सांसें भी तेज चल रही थीं। बच्चे को दो दिन से दस्त भी हो गए थे।
बृहस्पतिवार की सुबह बच्चे की तबीयत अधिक खराब हो गई। हरकत न करने पर परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। मौत की जानकारी पर परिवार में कोहराम मच गया। तीन दिन में लगातार यह चौथे बच्चे की मौत है। सर्दियों में जरा सी लापरवाही से बच्चों की जान को खतरा पैदा हो रहा है।
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पांच से सात दिन की देरी बन रही जानलेवा
बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. पंकज शर्मा ने बताया कि इलाज में देरी बच्चों की जान ले रही है। तबीयत खराब होने के पांच से सात दिन बाद बच्चों को उपचार के लिए लाया जाता है। पूछने पर भी गलत जानकारी दी जाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सर्दी से बचाएं। उनके पोषक तत्व का ध्यान रखें, जिससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़े। बीमार पड़ते ही चिकित्सक की सलाह लें। बागला जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों को विशेष निगरानी की आवश्यकता है। बीमार पड़ने पर खुद उपचार न करें। खासकर एंटीबायोटिक दवाएं चिकित्सक की सलाह से ही लें।
जिला अस्पताल में पहुंचे 1263 मरीज
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या कम रही, लेकिन बुखार व सदी के मरीजों का औसत रोजाना वाला रहा। कुल 1263 मरीजों में से 187 मरीज बुखार के रहे। वहीं सर्दी, खांसी व छाती पर बलगम जमा की शिकायत वाले मरीज 223 रहे। इनके अलावा 67 बच्चों का परीक्षण किया गया।
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हसायन के गांव खिटौली निवासी इसरार के तीन माह के बेटे सादिक की पिछले कई दिनों से तबियत खराब थी। इसरार ने बताया कि दो दिन पहले गांव के पास ही चिकित्सक को दिखा दिया था। उसे सर्दी की शिकायत थी और छाती पर कफ जमा था। सांसें भी तेज चल रही थीं। बच्चे को दो दिन से दस्त भी हो गए थे।
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बृहस्पतिवार की सुबह बच्चे की तबीयत अधिक खराब हो गई। हरकत न करने पर परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। मौत की जानकारी पर परिवार में कोहराम मच गया। तीन दिन में लगातार यह चौथे बच्चे की मौत है। सर्दियों में जरा सी लापरवाही से बच्चों की जान को खतरा पैदा हो रहा है।
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पांच से सात दिन की देरी बन रही जानलेवा
बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. पंकज शर्मा ने बताया कि इलाज में देरी बच्चों की जान ले रही है। तबीयत खराब होने के पांच से सात दिन बाद बच्चों को उपचार के लिए लाया जाता है। पूछने पर भी गलत जानकारी दी जाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सर्दी से बचाएं। उनके पोषक तत्व का ध्यान रखें, जिससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़े। बीमार पड़ते ही चिकित्सक की सलाह लें। बागला जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों को विशेष निगरानी की आवश्यकता है। बीमार पड़ने पर खुद उपचार न करें। खासकर एंटीबायोटिक दवाएं चिकित्सक की सलाह से ही लें।
जिला अस्पताल में पहुंचे 1263 मरीज
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या कम रही, लेकिन बुखार व सदी के मरीजों का औसत रोजाना वाला रहा। कुल 1263 मरीजों में से 187 मरीज बुखार के रहे। वहीं सर्दी, खांसी व छाती पर बलगम जमा की शिकायत वाले मरीज 223 रहे। इनके अलावा 67 बच्चों का परीक्षण किया गया।