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Hathras News: उत्तरी राज्यों से अगवा बच्चे बेचे जा रहे देश के दक्षिणी राज्यों में

Fri, 16 May 2025 01:31 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 May 2025 01:31 AM IST
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Children kidnapped from northern states are being sold in the southern states of the country.
बच्चे  के अपहरण के आरोपी पुलिस हिरासत में।संवाद - फोटो : samvad
इसे मासूम कविश की किस्मत कहें या पुलिस की मेहनत का नतीजा, जो कविश अपने परिवार के पास लौट आया। वरना जिस गिरोह ने कविश को आगे बेचने के लिए अगवा किया था। वहां से वापसी शायद ही संभव हो पाती। इस कांड को ऐसे गिरोह ने अंजाम दिया, जो देश के उत्तरी राज्यों से बच्चा चोरी कर दक्षिण के राज्यों में बेचने के धंधे में जुड़ा है। इस मासूम के अपहरण की साजिश भी विशाखापट्टनम जेल में ही रची गई। इन तथ्यों का खुलासा बच्चे को मुक्त कराने के बाद हुई अब तक की जांच में हुआ है।
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पुलिस जांच के अनुसार बच्चे के अपहरण में पकड़े गए मोहल्ले के ही मोनू पाठक की सास गांजा तस्करी के मामले में विशाखा पट्टनम की जेल में थी। तभी उसकी मुलाकात बच्चा चोरी गिरोह से जुड़ी सुब्बा लक्ष्मी से जेल में ही हुई। दोनों को एक साथ रहे। इसी बीच दोनों में जमानत के 1.80 लाख रुपये खर्च पर चर्चा हुई। मगर मोनू पर जमानत के लिए रुपया नहीं था। तभी सुब्बा लक्ष्मी ने प्रस्ताव रख दिया कि अगर तुम बच्चे अगवाकर यहां लाओ तो 1.80 लाख रुपये से ज्यादा अच्छी रकम मिलेगी। इस पर मोनू की सास ने दामाद मोनू व अपनी बेटी को इस काम के लिए तैयार कर लिया। उसके बाद से ही मोनू बच्चे की तलाश में जुट गया। इसी बीच सुब्बा लक्ष्मी जेल से छूट आई और मोनू और नेहा को अपनी गैंग का हिस्सा बना लिया। सुब्बा लक्ष्मी को व्हाट्सएप के जरिए फोटो जाने शुरू हो गए। कविश का फोटो पसंद आने पर उसे अगवा किया गया।
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चार बच्चों के फोटो भेजे थे बच्चा खरीदने वाले को

पुलिस के अनुसार मोनू पाठक ने जागेश्वर कॉलोनी के चार बच्चों के फोटो भेजे थे। तीन बच्चों को खरीदने वाले ने मना कर दिया था। इसके बाद आखिर में कविश का फोटो खरीदने वाले को व्हाट्सएप के जरिए भेजा गया था। खरीदार के सहमत होने पर बच्चे के अपहरण की कहानी बनाई गई थी।
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गिरोह का सरगना मल्लिकार्जुन विशाखापट्टनम से

इस अंर्तराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का मुख्य सरगना मल्लिकार्जुन निवासी पडेरु विशाखापट्टनम है। पुलिस मुख्य सरगना की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। मुख्य सरगना व अन्य सदस्यों की तलाश में टीमें गठित की गई है। यह टीमें लगातार सर्विलांस के जरिए तलाश में लग गई हैं। गिरोह के पकड़े गए सदस्य जागेश्वर निवासी दंपती व आंध्र प्रदेश के दंपती इसी सरगना के लिए काम करते हैं।

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पिछले दिनों सीतापुर-हरदोई के बच्चे आंध्रप्रदेश से मिले

अपने प्रदेश से अगवा बच्चे के आंध्रप्रदेश पहुंचने का यह पहला मामला नहीं। इससे पहले पिछले दिनों सीतापुर व हरदोई से इसी तरह चोरी गए बच्चे वहीं से मुक्त कराए गए। इस गिरोह की जांच में कुछ सदस्यों के दिल्ली में भी डेरा डाले होने के इनपुट मिले। इस तरह तार जुड़ रहे हैं कि दक्षिण भारत में सक्रिय यह गिरोह उत्तर भारत के राज्यों में सक्रिय है।

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बच्चे की उम्र-सुंदरता से तय होगी रकम

हाथरस। इस गिरोह का बच्चों को चोरी करने का अपना एक तरीका था। पहले तो यह बच्चे को निशाना बनाते। फिर उसके फोटो खरीदार तक पहुंचाते। उसकी उम्र व उसकी सुंदरता उसकी रकम तय करती। जब खरीदार को बच्चा पसंद आता तो फिर बच्चा व उसके परिवार से नजदीकियां बढ़ाकर उसके अपहरण पर काम शुरू होता। इस गिरोह के सदस्य कई प्रदेशों में फैले हुए हैं। मानव तस्करी करने वाला गिरोह अपने तरीके से बच्चों को अपहरण करता था।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि हमारा एक संगठित गिरोह है जिसमें करीब 1 दर्जन सदस्य हैं, जो नवजात शिशु से लेकर 3-4 वर्ष के बच्चों को चोरी कर लेते हैं। बच्चे की शुरुआती रकम पचास हजार से शुरू होती है। बच्चा नवजात है तो उसकी रकम अधिक होती है। उम्र व सुंदरता पर भी बच्चे की रकम दो से तीन लाख रुपये तक पहुंचती है। उनके एजेंट पहले बच्चा चिह्नित करते। फिर उसके फोटो को पसंद कराने के बाद उस इलाके में किराए का मकान लेते हैं फिर टारगेट कर फैमिली से घनिष्ठता बना लेते हैं। या उस इलाके के किसी परिवार को अपने गिरोह का सदस्य बनाते हैं। इस दौरान बच्चे का लक्ष्य तय कर उसका फोटो अपने गैंग के अन्य सदस्यों को भेजते हैं जब टारगेट का फोटो ओके हो जाता है तो पैसे की बात होती है। नवजात शिशु का मूल्य अधिक होता है और उम्र के हिसाब से मूल्य का निर्धारण करते हैं । टारगेट को लगातार वॉच करते हैं और मौका पाते ही टारगेट को बहला फुसलाकर व अत्यन्त छोटे बच्चों/नवजात की मां की व्यवस्तता का फायदा उठाकर उसे ले जाते हैं और तुरन्त दूसरे सदस्य को हैंड ओवर करते हैं और खुद वहीं पर बने रहते हैं, ताकि किसी को शक न हो । टारगेट को एक सदस्य से दूसरे सदस्य तक हैंड ओवर करते हुए अन्तिम क्रेता तक पहुंचाते हैं। अपहरण के बाद बच्चे को जानबूझकर अत्यन्त दूरस्थ स्थान पर ले जाया जाता है। ताकि वहां तक पुलिस व उसके घर के पहुंच न पाए । अभी तक प्रारम्भिक पूछताछ में करीब 8 बच्चो के खरीद-फरोख्त की जानकारी सामने आई है ।

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इस गिरोह ने 10 बच्चों का किया अपहरण

हाथरस पुलिस के अनुसार इस बच्चा चोर गिरोह के अंर्तराज्यीय गिरोह ने करीब आठ से 10 बच्चों का अपहरण कर इन बच्चों को अन्य परिवारों में बेचा गया है। पुलिस अधीक्षक चिंरजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि बच्चों के अपहरण कर बेचे जाने की बात सामने आई है। इस आधार पर अब उन बच्चों को कहां कहां से अपहरण किया गया है और किन-किन परिवारों में बेचा गया है। इसकी जानकारी लगाई जा रही है। इसके बाद इन सभी परिवारों से संपर्क कर उनके बच्चों को माता पिता से मिलवाने का कार्य किया जाएगा। इसे लेकर टीमें कार्य कर रही हैं।


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1.80 लाख रुपये कविश को बेचने का हुआ था सौंदा

हाथरस बच्चा चोर गिरोह ने मासूम कविश के फोटो को पसंद आने के बाद बच्चा खरीदने वाले से दामों की तय किया था। कविश को बेचने के लिए 1.80 लाख रुपये की रकम तय हुई थी। जैसे ही रकम तय हो गई थी तो एडवांस के तौर पर करीब 20 हजार रुपये लिए गए थे। इसके बाद मोनू पाठक ने अपहरण की तिथि 9 मई से करीब पांच दिन पूर्व से कविश से नजदीकियां बनाना शुरू कर दिया गया था। कविश को अपने घर ले जाना, टॉफी, चॉकलेट दिलाना शुरू कर दिया गया था। इसके बाद घटना को अंजाम दिया था।
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