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Hathras News: मां के दूध से बढ़ी बच्चों की दूरी, बौनापन भी बढ़ा

Sat, 03 Oct 2026 02:02 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sat, 03 Oct 2026 02:02 AM IST
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Children drifting away from breastfeeding; cases of stunted growth on the rise
प्रतीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) की हालिया रिपोर्ट में जिले के बच्चों में खानपान और पोषण जुड़ी चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि हाथरस के बच्चे मां के दूध से दूर हुए हैं। पर्याप्त आहार पाने वालों की संख्या घटी है। बच्चों में बौनापन और दुबलेपन की समस्या बढ़ी है। ये स्थिति बच्चों में कुपोषण के बढ़ते खतरे का दर्शाता है।
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सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, जिले में छह महीने से कम उम्र के उन बच्चों का आंकड़ा कम हुआ है जो सिर्फ मां का दूध पीते हैं। एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 67.4 फीसदी था, जो एनएफएचएस-6 में घटकर 58.1 फीसदी रह गया है। पिछले और वर्तमान सर्वेक्षण के दौरान स्तनपान करने वाले बच्चों की संख्या में भी गिरावट आई है। एनएफएचएस-5 में ऐसे बच्चों की संख्या 92.2 फीसदी थी जो इस बार घटकर 88.8 फीसदी रह गई है। मां के दूध के साथ पानी या अन्य दूध पीने वाले बच्चों का प्रतिशत भी 95.4 फीसदी से गिरकर 88.8 फीसदी हो गया है।
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पर्याप्त आहार पाने वाले बच्चे घटे

सर्वे में यह भी सामने आया है कि स्तनपान के साथ पर्याप्त आहार पाने वाले 6 से 23 महीने बच्चों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले सर्वे में स्तनपान के साथ पर्याप्त आहार पाने वाले बच्चों का आंकड़ा 5.3 फीसदी था जो इस बार के सर्वे में घटकर 3.4 फीसदी रह गया है।
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घट रही लंबाई, दुबलेपन की समस्या भी बढ़ी

सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि पर्याप्त आहार न मिलने के कारण बच्चों के शारीरिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बौनापन 39.1 फीसदी से बढ़कर 40.3 फीसदी हो गया है। बच्चों में दुबलेपन की समस्या 12.0 फीसदी से बढ़कर 12.2 फीसदी तथा गंभीर दुबलापन से पीड़ित बच्चों की तादाद 4.7 फीसदी से बढ़कर 4.8 फीसदी पहुंच चुकी है।

कम वजन (उम्र के हिसाब से) : कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 24.5 फीसदी से बढ़कर 29.0 फीसदी पर पहुंच गया है, जो बेहद चिंताजनक है।

सुधार के कुछ पहलू

जहां एक ओर स्तनपान और पोषण के आंकड़ों में गिरावट आई है, वहीं कुछ क्षेत्रों में मामूली सुधार भी देखा गया है। नवजात शिशु को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने की दर 34.7 फीसदी से बढ़कर 44.7 फीसदी हुई है। 6 से 23 महीने के गैर-स्तनपान वाले बच्चों को पर्याप्त आहार मिलने की दर 7.3 फीसदी से बढ़कर 12.9 फीसदी हुई है।


इनका कहना है

छह महीने के बाद बच्चों को ऊपरी पौष्टिक आहार देने और माताओं को बाल पोषण के प्रति जागरूक करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र व स्वास्थ्य कार्यकर्ता लगातार काम कर रहे हैं। इन अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

डॉ. वेदप्रकाश, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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