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Hathras News: दूध पिलाने में सावधानी जरूरी, 24 घंटे में तीन मासूमों की मौत
Thu, 05 Nov 2026 11:26 PM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 05 Nov 2026 11:26 PM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
हाथरस/अलीगढ़। छोटे बच्चों को दूध पिलाते समय बरती गई जरा सी असावधानी जानलेवा साबित हो सकती है। बीते 24 घंटे में दूध पीने के बाद तबीयत बिगड़ने से तीन मासूमों की मौत हो गई। तीनों मामलों में सांस नली में दूध पहुंचने की बात सामने आई है। घटनाओं के बाद बच्चों को दूध पिलाने के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत एक बार फिर सामने आई है।
पहली घटना चंदपा क्षेत्र के गांव बाघना की है। यहां मायके आई एक महिला के 14 माह के बच्चे की दूध पीने के बाद तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से गंभीर हालत में एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा रेफर कर दिया गया। वहां उपचार के दौरान बच्चे की मौत हो गई।
दूसरी घटना इगलास क्षेत्र के गांव मतरौई की है। यहां एक वर्षीय आरव को मां ने दूध पिलाया था। इसके बाद बच्चे को लिटाकर वह कुछ देर के लिए चली गईं। लौटने पर बच्चा हिचकियां ले रहा था और अचेत हो गया था। परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
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तीसरी घटना गोंडा के गांव निठावरी की है। यहां 14 दिन के नवजात की बुधवार को मौत हो गई। गांव निवासी सुशील की पत्नी रीता देवी ने ऑपरेशन से 14 दिन पहले बेटे को जन्म दिया था। सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास कुमार ने बताया कि मां ने बच्चे को दूध पिलाया था। इसके बाद उसे डकार दिलाना जरूरी होता है। दूध श्वास नली में फंस गया इससे बच्चे की मौत हो गई।
आंकड़े बताते हैं कि बीते 10 माह में आठ ऐसे मामले जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में दर्ज हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दूध पिलाने के दौरान सही स्थिति और बाद में सुरक्षित तरीके से सुलाने की सावधानी बरतना जरूरी है।
दूध पिलाने के बाद तुरंत न लिटाएं :
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, छोटे बच्चों को दूध पिलाते समय उनका सिर शरीर के बाकी हिस्से से थोड़ा ऊंचा रखना चाहिए। दूध पिलाने के बाद बच्चे को कंधे से लगाकर हल्के हाथ से पीठ थपथपाएं, ताकि डकार आ सके। इसके बाद बच्चे को तुरंत न लिटाएं। हालांकि, सोने के लिए बच्चे को हमेशा पीठ के बल, समतल और सख्त सतह पर ही लिटाना चाहिए। उसके आसपास तकिया, ढीली चादर या अन्य वस्तु नहीं रखनी चाहिए। संवाद/ब्यूरो
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पहली घटना चंदपा क्षेत्र के गांव बाघना की है। यहां मायके आई एक महिला के 14 माह के बच्चे की दूध पीने के बाद तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से गंभीर हालत में एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा रेफर कर दिया गया। वहां उपचार के दौरान बच्चे की मौत हो गई।
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दूसरी घटना इगलास क्षेत्र के गांव मतरौई की है। यहां एक वर्षीय आरव को मां ने दूध पिलाया था। इसके बाद बच्चे को लिटाकर वह कुछ देर के लिए चली गईं। लौटने पर बच्चा हिचकियां ले रहा था और अचेत हो गया था। परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
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तीसरी घटना गोंडा के गांव निठावरी की है। यहां 14 दिन के नवजात की बुधवार को मौत हो गई। गांव निवासी सुशील की पत्नी रीता देवी ने ऑपरेशन से 14 दिन पहले बेटे को जन्म दिया था। सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास कुमार ने बताया कि मां ने बच्चे को दूध पिलाया था। इसके बाद उसे डकार दिलाना जरूरी होता है। दूध श्वास नली में फंस गया इससे बच्चे की मौत हो गई।
आंकड़े बताते हैं कि बीते 10 माह में आठ ऐसे मामले जिला अस्पताल के आपातकालीन विभाग में दर्ज हैं। डॉक्टरों का कहना है कि दूध पिलाने के दौरान सही स्थिति और बाद में सुरक्षित तरीके से सुलाने की सावधानी बरतना जरूरी है।
दूध पिलाने के बाद तुरंत न लिटाएं :
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, छोटे बच्चों को दूध पिलाते समय उनका सिर शरीर के बाकी हिस्से से थोड़ा ऊंचा रखना चाहिए। दूध पिलाने के बाद बच्चे को कंधे से लगाकर हल्के हाथ से पीठ थपथपाएं, ताकि डकार आ सके। इसके बाद बच्चे को तुरंत न लिटाएं। हालांकि, सोने के लिए बच्चे को हमेशा पीठ के बल, समतल और सख्त सतह पर ही लिटाना चाहिए। उसके आसपास तकिया, ढीली चादर या अन्य वस्तु नहीं रखनी चाहिए। संवाद/ब्यूरो