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दवा निर्माता कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सहित तीन के खिलाफ वाद दायर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस)।
Updated Sat, 20 Jan 2018 12:09 AM IST
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जिला अस्पताल के दवा स्टोर रूम से गत वर्ष 2016 के ग्लूकोज (आरएल) की बोतलों में फफूंद लगने के मामले में औषधि निरीक्षक ने दवा निर्माता कंपनी के डायरेक्टर और दो अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में वाद दायर कर दिया है।
वर्ष 2016 में 27 मई को जिला अस्पताल में ग्लूकोज की बोतलों में फफूंद लगने की शिकायत सामने आई थी। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत ही इसके प्रयोग पर रोक लगा दी थी। दवा कंपनी के भुगतान को भी रोक दिया था। इसके बाद औषधि निरीक्षक ने वहां पहुंचकर ग्लूकोज की बोतलों में लगी फफूंद को देखा था और मौके पर पहुंच 24 हजार ग्लूकोज की बोतलों को सील कर दिया था।
इनकी आपूर्ति को भी अस्पताल से वापस कर दिया था। इसी दौरान ग्लूकोज की बोतलों से ग्लूकोज का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा था। जांच में भी ग्लूकोज मेें फफूंद होने की पुष्टि भी हुई थी और इसे मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया था।
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औषधि निरीक्षक पूरनचंद ने बताया कि इस मामले की विवेचना के लिए ड्रग कंट्रोलर द्वारा आदेश दिए गए थे, जिसके बाद वह स्वयं इंदौर में स्थित इस दवा कंपनी की फैक्ट्री में गए थे और वहां जाकर विवेचना की थी। विवेचना में भी दवा निर्माता फर्म स्पष्ट रूप से दोषी पाई गई थी।
फर्म द्वारा बोतलों का सही तरीके से निर्माण नहीं किया गया था। इस वजह से उन्होंने निर्माता फर्म के मैनेजिंग डायरेक्टर, दवा बनाने वाले केमिस्ट और जांच कर रिलीज करने वाले केमिस्ट के खिलाफ ड्रग एक्ट की कठोर धाराओं में हाथरस के सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया है। वाद दायर होने कोर्ट से सम्मन भी जारी कर दिए हैं।
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वर्ष 2016 में 27 मई को जिला अस्पताल में ग्लूकोज की बोतलों में फफूंद लगने की शिकायत सामने आई थी। अस्पताल प्रशासन ने तुरंत ही इसके प्रयोग पर रोक लगा दी थी। दवा कंपनी के भुगतान को भी रोक दिया था। इसके बाद औषधि निरीक्षक ने वहां पहुंचकर ग्लूकोज की बोतलों में लगी फफूंद को देखा था और मौके पर पहुंच 24 हजार ग्लूकोज की बोतलों को सील कर दिया था।
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इनकी आपूर्ति को भी अस्पताल से वापस कर दिया था। इसी दौरान ग्लूकोज की बोतलों से ग्लूकोज का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा था। जांच में भी ग्लूकोज मेें फफूंद होने की पुष्टि भी हुई थी और इसे मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया था।
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औषधि निरीक्षक पूरनचंद ने बताया कि इस मामले की विवेचना के लिए ड्रग कंट्रोलर द्वारा आदेश दिए गए थे, जिसके बाद वह स्वयं इंदौर में स्थित इस दवा कंपनी की फैक्ट्री में गए थे और वहां जाकर विवेचना की थी। विवेचना में भी दवा निर्माता फर्म स्पष्ट रूप से दोषी पाई गई थी।
फर्म द्वारा बोतलों का सही तरीके से निर्माण नहीं किया गया था। इस वजह से उन्होंने निर्माता फर्म के मैनेजिंग डायरेक्टर, दवा बनाने वाले केमिस्ट और जांच कर रिलीज करने वाले केमिस्ट के खिलाफ ड्रग एक्ट की कठोर धाराओं में हाथरस के सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया है। वाद दायर होने कोर्ट से सम्मन भी जारी कर दिए हैं।