{"_id":"640dee642aded77a770a64e3","slug":"black-wheat-being-grown-from-organic-farming-treasure-of-nutrients-2023-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Exclusive: जैविक खेती से उगाया जा रहा काला गेहूं, बीपी-शुगर और कैंसर समेत कई रोगों में है फायदेमंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Exclusive: जैविक खेती से उगाया जा रहा काला गेहूं, बीपी-शुगर और कैंसर समेत कई रोगों में है फायदेमंद
Mon, 13 Mar 2023 03:40 AM IST
चमन शर्मा
प्रशांत भारती, अमर उजाला, अलीगढ़
प्रशांत भारती, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Mon, 13 Mar 2023 03:40 AM IST
सार
काले गेंहूं के नियमित सेवन से शरीर को सही मात्रा में फाइबर प्राप्त होता है, जिससे पेट के रोगों में लाभ मिलता है। दिल की बीमारियों के होने का खतरा कम होता है। हाई ब्लड प्रेशर में भी लाभकारी है। इसके सेवन से रक्त शर्करा को कम करने में मदद मिलती है।
विज्ञापन
काला गेंहू
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हाथरस के गांव खरबा व ऐंहन में प्रगतिशील किसान वीरपाल सिंह जैविक खेती से पोषक तत्वों का खजाना उगा रहे हैं। यह खेती न केवल नई आय का जरिया है बल्कि खेतों के लिए भी वरदान साबित हो रही है। उन्होंने 29 बीघा में जैविक खेती के माध्यम काला गेहूं और सरसों की खेती की। नतीजतन 12 क्विंटल काला गेहूं का उत्पादन हुआ है और खेत में सरसों की फसल लहरा रही है।
विज्ञापन
सहकारिता विभाग से वर्ष 2011 में सेवानिवृत्त होने के बाद वीरपाल सिंह ने खेतीबाड़ी संभाली। उन्होंने प्रगतिशील किसान के रूप में जैविक खेती को बढ़ावा देने का प्रण लिया। वह दो देसी गायों के सहारे वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य गेहूं की तुलना में काले गेहूं में ज्यादा प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट होता है जो हृदय, पेट के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके बाद पंजाब से काला गेहूं का बीज मंगाया और सरसों के साथ काला गेहूं की खेती शुरू कर दिया। उनसे सहारनपुर के आयुर्वेद दवा निर्माताओं ने संपर्क किया है। अब कृषि विभाग की ओर से किसान वीरपाल का रजिस्ट्रेशन जैविक खेती के लिए उत्तर प्रदेश जैविक प्रमाणीकरण संस्था लखनऊ में करा दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
गायों के गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद, मूत्र से घनामृत व जीवामृत होते हैं तैयार
जैविक खेती के लिए गांव में ही वीरपाल सिंह ने एक गोशाला का निर्माण कराया है। गोशाला में दो देशी गाय है। गोबर व मूत्र को एकत्रित करने की व्यवस्था भी की गई है। इन गायों के गोबर व मूत्र से वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार की जाती है। साथ फसलों के लिए घनामृत, जीवामृत अन्य दवाएं बनाई जाती हैं। इनका प्रयोग जैविक खेती के दौरान किया जाता है। अपने ही खेतों में इन गायों के लिए चारा उगाते हैं।
तत्व सामान्य गेहूं - काला गेंहू
एंथोसायनिन 5 पीपीएम - 140 पीपीएम
जिंक 28 फीसदी - 35 फीसदी से अधिक
आयरन 25 फीसदी - 60 फीसदी से अधिक
काले गेंहू के सेवन से शरीर को होने वाले लाभ
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसआर सिंह ने बताया कि काले गेंहूं के नियमित सेवन से शरीर को सही मात्रा में फाइबर प्राप्त होता है, जिससे पेट के रोगों में लाभ मिलता है। इसमें मौजूद फास्फोरस तत्व शरीर में नए ऊतक बनाने के साथ उनके रखरखाव में भी भूमिका निभाता है। दिल की बीमारियों के होने का खतरा कम होता है। काले गेहूं से ट्राई ग्लिसराइड तत्व व मैग्नीशियम उच्च मात्रा में पाया जाता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य रहता है।
काले गेंहू के नियमित सेवन से शरीर को उचित मात्रा में फाइबर प्राप्त होता है। काले गेहूं में मौजूद फाइबर से पाचन तंत्र मजबूत होता है। पाचन सम्बन्धी समस्या व पेट के कैंसर से भी लाभ मिलता है। हाई ब्लड प्रेशर में भी लाभकारी है। इसके सेवन से रक्त शर्करा को कम करने में मदद मिलती है। आंतों के संक्रमण में लाभ देता है। नए ऊतकों के निर्माण में सहायक है और शरीर के विकास में मदद करता है।