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Hathras News: चांदी आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में लाने से संकट में बिसावर का उद्योग
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कस्बा बिसावर में बंद पड़ी घुंघरू व पायल बनाने की फैक्टरी। संवाद
- फोटो : Samvad
सादाबाद तहसील का बिसावर कस्बा चांदी की पायल और घुंघरू निर्माण कला के लिए देशभर में पहचान रखता है, लेकिन यह उद्योग इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। पहले से ही चांदी का भाव बहुत बढ़ा है और अब केंद्र सरकार द्वारा चांदी की छड़ों के आयात नियमों को सख्त किए जाने के बाद यहां का कारोबार प्रभावित हो रहा है। हजारों कारीगरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन इसे मुक्त श्रेणी से हटाकर प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल कर दिया है। अब चांदी आयात करने के लिए कारोबारियों को सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इस फैसले के बाद बाजार में कच्चे माल की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
बिसावर में परंपरागत चांदी के घुंघरू और पायल निर्माण से जुड़े करीब 40 बड़े कारोबारी हैं। इनके कारखानों और उनसे जुड़े कुटीर उद्योगों में लगभग 7,000 कारीगर और मजदूर जुड़े हैं। चांदी की आपूर्ति बाधित होने के कारण कई इकाइयों में काम धीमा पड़ गया है। कुछ स्थानों पर उत्पादन लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है। व्यापार मंडलों का कहना है कि यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला तो बिसावर की वर्षों पुरानी चांदी शिल्प परंपरा पर खतरा मंडरा सकता है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार साकरात्मक कदम उठाएगी।
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चांदी की उपलब्धता कम होने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। पहले नियमित उत्पादन होता था, अब सीमित स्टॉक के सहारे काम चलाना पड़ रहा है। यदि जल्द राहत नहीं मिली तो कई इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
-मुकेश शर्मा, कारखाना व्यापारी।
नई लाइसेंस व्यवस्था छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए बड़ी चुनौती है। चांदी का आयात बाधित होने से न केवल उत्पादन प्रभावित हुआ है, बल्कि तैयार माल की आपूर्ति भी कम हो रही है, जिससे व्यापारियों को परेशानी हो रही है। -नीरज कुमार, कारीगर।
इस उद्योग से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। कारीगरों को नियमित काम नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। पारंपरिक उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। -कृष्णपाल सिंह, चांदी व्यापारी।
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केंद्र सरकार ने चांदी के आयात को पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन इसे मुक्त श्रेणी से हटाकर प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल कर दिया है। अब चांदी आयात करने के लिए कारोबारियों को सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इस फैसले के बाद बाजार में कच्चे माल की उपलब्धता कम हो गई है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
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बिसावर में परंपरागत चांदी के घुंघरू और पायल निर्माण से जुड़े करीब 40 बड़े कारोबारी हैं। इनके कारखानों और उनसे जुड़े कुटीर उद्योगों में लगभग 7,000 कारीगर और मजदूर जुड़े हैं। चांदी की आपूर्ति बाधित होने के कारण कई इकाइयों में काम धीमा पड़ गया है। कुछ स्थानों पर उत्पादन लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है। व्यापार मंडलों का कहना है कि यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला तो बिसावर की वर्षों पुरानी चांदी शिल्प परंपरा पर खतरा मंडरा सकता है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार साकरात्मक कदम उठाएगी।
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चांदी की उपलब्धता कम होने से निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है। पहले नियमित उत्पादन होता था, अब सीमित स्टॉक के सहारे काम चलाना पड़ रहा है। यदि जल्द राहत नहीं मिली तो कई इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
-मुकेश शर्मा, कारखाना व्यापारी।
नई लाइसेंस व्यवस्था छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए बड़ी चुनौती है। चांदी का आयात बाधित होने से न केवल उत्पादन प्रभावित हुआ है, बल्कि तैयार माल की आपूर्ति भी कम हो रही है, जिससे व्यापारियों को परेशानी हो रही है। -नीरज कुमार, कारीगर।
इस उद्योग से हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। कारीगरों को नियमित काम नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। पारंपरिक उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। -कृष्णपाल सिंह, चांदी व्यापारी।