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Hathras News: न्यायालय के आदेश पर ही बनेंगे दो साल पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र
Wed, 14 Oct 2026 02:24 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:24 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
कमल वार्ष्णेय
हाथरस। यदि आपका या आपके किसी परिजन का जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो वर्ष से अधिक पुराना हो चुका है और प्रमाणपत्र नहीं बना है, तो अब इसके लिए जिला न्यायालय का आदेश जरूरी होगा। उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 और संशोधित केंद्रीय प्रावधानों को एक अक्तूबर से लागू कर दिया गया है।
नए नियमों के तहत दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। 30 सितंबर तक की व्यवस्था में एक साल से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदक को एसडीएम के यहां आवेदन करना पड़ता था।
एसडीएम स्तर से जांच पड़ताल के बाद अनुमति आदेश दिया जाता था, जिसके बाद नगर पालिका के स्तर से प्रमाणपत्र जारी किया जाता था। एक साल तक की देरी वाले मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत नगर निकाय स्तर से ही प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता था।
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नयी नियमावली के अनुसार अब दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म व मृत्यु के मामले में अब केवल कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसडीएम) का आदेश पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए अनिवार्य रूप से प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। वहीं एसडीएम का अधिकार क्षेत्र एक वर्ष से दो वर्ष तक सीमित कर दिया गया है। बाकी नियमों में परिवर्तन नहीं किया गया है। संवाद
पालिका से जारी हुए प्रमाणपत्र
नगर पालिका परिषद हाथरस में जनवरी 2026 से सितंबर 2026 तक 1352 जन्म सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनके सापेक्ष जांच के बाद 1227 जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। वहीं इस समयावधि में 143 मृत्यु की सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से 92 के प्रमाणपत्र जारी हुए।
अवधि शुल्क आवश्यक कार्यवाही
-21 दिन के भीतर निशुल्क सामान्य पंजीकरण
-21 दिन से अधिक व 30 दिन तक 20 रजिस्ट्रार द्वारा पंजीकरण
-30 दिन से अधिक व 1 वर्ष तक 50 सक्षम अधिकारी की अनुमति
-1 से 2 वर्ष तक 100 अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट
- 2 वर्ष से अधिक 100 + अन्य शुल्क प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
दो वर्ष से अधिक पुराने प्रमाणपत्रों के मामले में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य हो गया है। किसी भी जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिन के भीतर देना अनिवार्य है। इससे अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं और शुल्क से बचा जा सके।
-रोहित सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद हाथरस
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हाथरस। यदि आपका या आपके किसी परिजन का जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो वर्ष से अधिक पुराना हो चुका है और प्रमाणपत्र नहीं बना है, तो अब इसके लिए जिला न्यायालय का आदेश जरूरी होगा। उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 और संशोधित केंद्रीय प्रावधानों को एक अक्तूबर से लागू कर दिया गया है।
नए नियमों के तहत दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। 30 सितंबर तक की व्यवस्था में एक साल से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदक को एसडीएम के यहां आवेदन करना पड़ता था।
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एसडीएम स्तर से जांच पड़ताल के बाद अनुमति आदेश दिया जाता था, जिसके बाद नगर पालिका के स्तर से प्रमाणपत्र जारी किया जाता था। एक साल तक की देरी वाले मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत नगर निकाय स्तर से ही प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता था।
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नयी नियमावली के अनुसार अब दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म व मृत्यु के मामले में अब केवल कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसडीएम) का आदेश पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए अनिवार्य रूप से प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। वहीं एसडीएम का अधिकार क्षेत्र एक वर्ष से दो वर्ष तक सीमित कर दिया गया है। बाकी नियमों में परिवर्तन नहीं किया गया है। संवाद
पालिका से जारी हुए प्रमाणपत्र
नगर पालिका परिषद हाथरस में जनवरी 2026 से सितंबर 2026 तक 1352 जन्म सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनके सापेक्ष जांच के बाद 1227 जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। वहीं इस समयावधि में 143 मृत्यु की सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से 92 के प्रमाणपत्र जारी हुए।
अवधि शुल्क आवश्यक कार्यवाही
-21 दिन के भीतर निशुल्क सामान्य पंजीकरण
-21 दिन से अधिक व 30 दिन तक 20 रजिस्ट्रार द्वारा पंजीकरण
-30 दिन से अधिक व 1 वर्ष तक 50 सक्षम अधिकारी की अनुमति
-1 से 2 वर्ष तक 100 अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट
- 2 वर्ष से अधिक 100 + अन्य शुल्क प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
दो वर्ष से अधिक पुराने प्रमाणपत्रों के मामले में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य हो गया है। किसी भी जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिन के भीतर देना अनिवार्य है। इससे अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं और शुल्क से बचा जा सके।
-रोहित सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद हाथरस