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Hathras News: महिलाओं की कलाइयों पर खनक रहीं धागे-घुंघरू वाली चूड़ियां
Sat, 17 Oct 2026 03:02 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 17 Oct 2026 03:02 AM IST
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शहर की एक दुकान पर चूड़ियां पसंद करती महिला। संवाद
- फोटो : Samvad
त्योहारों की रौनक के बीच महिलाओं की कलाइयां इस बार चूड़ियों के दो खास अंदाज से सज रही हैं। रंग-बिरंगे धागों और नन्हे-नन्हे घुंघरुओं से सजी हस्तशिल्प की चूड़ियां जहां अपने आकर्षक लुक से लुभा रही हैं, वहीं लाल-हरी कांच की सदाबहार चूड़ियों के साथ नगीने जड़े कंगनों का पारंपरिक मेल भी खूब पसंद किया जा रहा है।
फैशन और परंपरा का यह संगम बाजार में चूड़ियों की चमक बढ़ा रहा है। बाजार में चूड़ी विक्रेताओं ने त्योहारों के मिजाज को देखते हुए इन दोनों ही प्रकार की चूड़ियों का भरपूर संग्रह जुटा रखा है। दुकानदारों के अनुसार, गरबा-डांडिया रास, नवरात्र के धार्मिक अनुष्ठान और करवाचौथ पर पारंपरिक परिधानों के साथ मेल खाने के कारण इन दोनों डिजाइनों की बिक्री पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक हो रही है।
खासकर रेशमी व सूती धागों के ऊपर बारीक नक्काशी और हाथों के हिलने पर बजने वाले घुंघरुओं की हल्की झंकार युवतियों को खूब लुभा रही है। पूजन और सुहाग के प्रतीक के रूप में लाल और हरे कांच की चूड़ियों की मांग हमेशा की तरह शीर्ष पर बनी हुई है।
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नवरात्र के दिनों में गरबा और पारिवारिक पूजा-पाठ के लिए कुछ अलग और आकर्षक चूड़ियां चाहिए थीं। बाजार में रेशमी रंगीन धागों और नन्हे घुंघरुओं से तैयार चूड़ियों का जो संग्रह आया है, वह पारंपरिक होने के साथ-साथ दिखने में भी बेहद सुंदर और नया लगता है।
-पूनम वार्ष्णेय निवासी विजय नगर।
नवरात्र और करवाचौथ पर लाल और हरे रंग की शुद्ध कांच की चूड़ियों का कोई मुकाबला नहीं है। जब लाल-हरी सादी कांच की चूड़ियों के आगे और पीछे नगीनों वाले भारी कंगन लगाए जाते हैं, तो वह कलाई को संपूर्ण और गरिमामय पारंपरिक रूप देते हैं।
-कुसुम निवासी जामा मस्जिद चौराहा।
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फैशन और परंपरा का यह संगम बाजार में चूड़ियों की चमक बढ़ा रहा है। बाजार में चूड़ी विक्रेताओं ने त्योहारों के मिजाज को देखते हुए इन दोनों ही प्रकार की चूड़ियों का भरपूर संग्रह जुटा रखा है। दुकानदारों के अनुसार, गरबा-डांडिया रास, नवरात्र के धार्मिक अनुष्ठान और करवाचौथ पर पारंपरिक परिधानों के साथ मेल खाने के कारण इन दोनों डिजाइनों की बिक्री पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक हो रही है।
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खासकर रेशमी व सूती धागों के ऊपर बारीक नक्काशी और हाथों के हिलने पर बजने वाले घुंघरुओं की हल्की झंकार युवतियों को खूब लुभा रही है। पूजन और सुहाग के प्रतीक के रूप में लाल और हरे कांच की चूड़ियों की मांग हमेशा की तरह शीर्ष पर बनी हुई है।
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नवरात्र के दिनों में गरबा और पारिवारिक पूजा-पाठ के लिए कुछ अलग और आकर्षक चूड़ियां चाहिए थीं। बाजार में रेशमी रंगीन धागों और नन्हे घुंघरुओं से तैयार चूड़ियों का जो संग्रह आया है, वह पारंपरिक होने के साथ-साथ दिखने में भी बेहद सुंदर और नया लगता है।
-पूनम वार्ष्णेय निवासी विजय नगर।
नवरात्र और करवाचौथ पर लाल और हरे रंग की शुद्ध कांच की चूड़ियों का कोई मुकाबला नहीं है। जब लाल-हरी सादी कांच की चूड़ियों के आगे और पीछे नगीनों वाले भारी कंगन लगाए जाते हैं, तो वह कलाई को संपूर्ण और गरिमामय पारंपरिक रूप देते हैं।
-कुसुम निवासी जामा मस्जिद चौराहा।