बीएससी पास युवा किसान: मछली-पशुओं का आहार बनाया, गुलाब उगाया, कमा रहा 15 लाख रुपये सालाना
जतिन हसायन विकासखंड के बपंडई में मछली आहार और पशु आहार का प्लांट चलाने के साथ ही गुलाब की खेती करते हैं। तीनों काम मिला कर हर साल करीब 15 लाख रुपये तक की कमाई कर लेते हैं।
विस्तार
युवा वर्ग बेरोजगारी को कोसते हुए नहीं थकते हैं। वहीं, हाथरस जिले के बीएससी पास युवा किसान जतिन ने मछली आहार का व्यवसाय शुरू किया और एक अच्छे कारोबार की ओर बढ़ा। जतिन हसायन विकासखंड के बपंडई में मछली आहार और पशु आहार का प्लांट चलाने के साथ ही गुलाब की खेती करते हैं। तीनों काम मिला कर हर साल करीब 15 लाख रुपये तक की कमाई कर लेते हैं।
उन्होंने खेती के साथ वर्ष 2022 में मछली का आहार बनाने का व्यवसाय शुरू किया। 32 लाख रुपये की लागत से गांव में ही प्लांट लगाया। जिसमें 12 लाख रुपये का अनुदान मत्सय विभाग की तरफ से मिला। मत्स्य विभाग से ही उन्हें इस व्यवसाय की पूरी जानकारी मिली। मछली का दाना बनाने के लिए वह कच्चा माल यानी मक्का, बाजरा, सोया आदि अलीगढ़ और राजस्थान से लेकर आते हैं। उनका तैयार किया उत्पाद स्थानीय किसान ही खरीद लेते हैं। वह मांग और जरूरत के अनुसार पशु आहार भी बनाते हैं। वह मछली के आहार से सात लाख रुपये, पशु आहर से पांच लाख रुपये व गुलाब की खेती से तीन लाख रुपये की कमाई करते हैं। इस तरह वह सालाना 15 लाख रुपये की कमाई करते हैं।
यह है मुनाफे का गणित
मछली आहार बनाने में 38 रुपये प्रति किलोग्राम की लागत आती है। जतिन इसे 42 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचते हैं। इस पर उन्हें चार रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मुनाफा होता है। पशु आहार 23 रुपये प्रति किलोग्राम की लागत पर बन रहा है, जो 25 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचते हैं। इसमें दो रुपये प्रति किलो का मुनाफा कमाते हैं।
कभी नौकरी करने की नहीं रही इच्छा
जतिन बताते हैं कि पढ़ाई करने के बाद उन्हें कभी नौकरी करने की इच्छा नहीं थी। वह अपना काम करना चाहते थे। मत्स्य विभाग से उन्हें मछली के आहार के व्यापार के बारे में जानकारी मिली। तब उन्होंने काम शुरू किया। उत्पाद बेचने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं है। उत्पादों का भाव बाजार भाव से कम रखते हैं। इसलिए स्थानीय किसान ही खरीदार हैं। विभाग भी उनकी सहायता करता है।

मछली, पशु आहार के व्यवसाय के साथ गुलाब की खेती कर मैं हर साल करीब 15 लाख रुपये कमा लेता हूं। नौकरी में यह संभव नहीं है। -जतिन कुमार, युवा किसान।
मत्स्य विभाग की लघु आहार मील योजना 30 लाख रुपये की है। जिसमें 40 प्रतिशत अनुदान विभाग देता है। लाभार्थी को पहले पूरा खर्च खुद ही करना होता है। इसके बाद अनुदान डीबीटी के माध्यम से लाभार्थी के खाते में स्थानांतरित किया जाता है। वहीं अनुसूचित जाति व महिलाओं के लिए इसमें 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है।-मोहम्मद आरिफ, मत्स्य निरीक्षक।