संवाद न्यूज एजेंसी, सासनी।
बाल विकास परियोजना कार्यालय पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियाें ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खसरे की रोकथाम के लिए सजग किया। कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को इस बीमारी की रोकथाम में उनकी भूमिका भी बताई गई। आंगनबाड़ी कर्मियों से कहा गया कि वह इस बीमारी के संदिग्ध रोगी की सूचना तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दें।
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी चतुर सिंह एवं डब्लूएचओ से मोनू शंकर ने बताया कि खसरे का कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है। खसरे की वैक्सीन और खुराक ही एकमात्र उपाय है। पहली खुराक नौ से 12 माह के बीच और दूसरी 16 से 24 माह के मध्य देनी चाहिए। बच्चे को उम्र के हिसाब से खुराक दी जाए। खसरे के संदिग्ध मरीजों की पहचान बुखार का आना, नाक बहना, खांसी, आंखों का लाल होना हैं। आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर ऐसे रोगियों को खोजना चाहिए। खसरे के रोगियों को विटामिन ए की खुराक देनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं का नियमित टीकाकरण करना चाहिए, ताकि गर्भ में पल रहा बच्चा सुरक्षित रह सके। मुख्य सेविका पुष्पलता शर्मा एवं ऊषारानी के अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सर्वेश, सुमन शर्मा, चंद्रवती, गायत्री, आशा, सरिता, ममता, संतोष, सीमा, माधुरी, राजरानी, नफीसा बेगम, कुसुमलता, प्रेमकांती शर्मा, ललिता, प्रेम कुमारी, विनोद बाला, मंजू, संतोष, रेखा, धर्मेश आदि मौजूद थीं।