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आरक्षण घोषित होते ही बढ़ीं चुनावी सरगर्मियां
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस/ विकास शर्मा
Updated Fri, 13 Oct 2017 11:48 PM IST
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चुनाव
- फोटो : SELF
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नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण घोषित होने के बाद जिले में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राजनीतिक दलों के दफ्तरों और सभी पार्टियों के दिग्गज नेताओं के यहां टिकटार्थियों की चहल-पहल भी बढ़ गई है।
अपना टिकट पक्का करने के लिए टिकटार्थी हर फॉर्मूला आजमाने को तैयार हैं। जो राजनीतिक पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्होंने तो लखनऊ तक की भागदौड़ भी शुरू कर दी है। टिकट के लिए कोई पार्टी के दिग्गज नेताओं की सिफारिश लगा रहा है तो कोई मंत्री और विधायकों की सिफारिश के बूते टिकट का ख्वाब पाले हुए हैं। पार्टियों में भी आरक्षण के हिसाब से नगर पालिका व नगर पंचायत अध्यक्षों और वार्ड सभासदों के प्रत्याशियों के चयन पर मंथन शुरू हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा हो या बसपा, सपा, रालोद या कांग्रेस। सभी पार्टियों को हाईकमान से आदेश मिला है कि वह हर निकाय अध्यक्ष के लिए संभावित प्रत्याशियों के नामों का पैनल उनकी पूरी डिटेल के साथ भिजवाएं। हाईकमान इस पर विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लेगा।
बसपा ने चुनाव के लिए कसी कमर
पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने जा रही बसपा ने तो आरक्षण की घोषणा के तत्काल बाद शुक्रवार को ही अहम बैठक की और इसमें जिले की सभी नौ निकायों के अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशियों के चयन पर चर्चा की गई। वार्ड सभासदों के लिए प्रत्याशी तय करने पर भी मंथन किया गया। उम्मीद है कि अगले हफ्ते में पार्टी अपने प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप दे देगी।
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प्रत्याशी चयन को जल्द होगी भाजपा की बैठक
भाजपा अब तक निकाय चुनाव को लेकर कई बैठकें कर चुकी है, लेकिन आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से अब तक प्रत्याशी चयन को लेकर कोई बात नहीं हो सकी थी। लिहाजा अब भाजपा जल्द ही इस सिलसिले में अहम बैठक करेगी, जिसमें सभी नगर पालिका व नगर पंचायतों के अध्यक्ष और सभासद पदों के लिए आवेदन लिए जाएंगे। आवेदनों के आधार पर जिला नेतृत्व प्रत्याशियों का पैनल तैयार करके बृज प्रदेश इकाई को भेजेगा। बृज प्रदेश इकाई इसे अपनी संस्तुति के साथ प्रदेश नेतृत्व को भेजेगी, जहां से प्रत्याशियों के नाम की अंतिम घोषणा की जाएगी। टिकट पाने के लिए आवेदकों की सबसे लंबी कतार भी इसी पार्टी में है। ऐसे में पार्टी के लिए अध्यक्ष पदों पर सर्वमान्य चेहरा तय करना बिल्कुल आसान नहीं होगा।
लखनऊ से तय होंगे कांग्रेस के प्रत्याशी
कांग्रेस का फिलहाल प्रदेश में ज्यादा असर नहीं है, लेकिन चुनाव लड़ने के दावेदारों की कतार यहां भी है। पार्टी के जिला और शहर नेतृत्व को नगर पालिका व नगर पंचायत अध्यक्ष और सभासदों के पदों के लिए अच्छी-खासी संख्या में आवेदन मिले हैं, लेकिन पार्टी का पूरा जोर हर निकाय से ऐसे चेहरे को लड़ाने पर है, जोकि दूसरे दलों को कड़ी चुनौती पेश कर सके और जीत के लिए अपना दावा मजबूत कर सके। कांग्रेस जिला व शहर नेतृत्व को भी निर्देश मिला है कि वह जल्द से जल्द संभावित प्रत्याशियों के नाम का पैनल तैयार करके लखनऊ भिजवाएं। जहां से अंतिम प्रत्याशी की घोषणा की जाएगी।
सपा में भी दावेदारों की लंबी फेहरिस्त
समाजवादी पार्टी में भी चुनाव लड़ने के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। सपा भी इस बार चुनाव चिह्न पर अपने प्रत्याशी लड़ाने जा रही है। पार्टी में इस पर चर्चा शुरू हो चुकी है। शनिवार को जिला नेतृत्व ने इस संबंध में अहम बैठक बुलाई है, जिसमें प्रत्याशी चयन पर चर्चा की जाएगी। कई ऐसे दावेदार भी सपा जिला नेतृत्व से संपर्क बनाए हुए हैं, जिनकी अपनी पार्टी में टिकट के लिए दाल गलने की संभावना कम है, जबकि कुछ खुद को पुराना और वफादार कार्यकर्ता बताते हुए टिकट के लिए दावा ठोक रहे हैं।
बागियों पर रहेगी रालोद की नजर
राष्ट्रीय लोकदल भी पहली बार चुनाव चिह्न पर निकाय चुनाव में किस्मत आजमाने जा रहा है। रालोद ने भी सभी नगर पालिका और नगर पंचायतों में आवेदन लेने शुरू कर दिए हैं। वैसे पार्टी की नजर दूसरे दलों के उन बागियों पर रहेगी, जिनका अपने क्षेत्र में प्रभाव है। रालोद ने भी चुनाव के लिए आवेदन लेने शुरू कर दिए हैं। विधानसभा चुनाव में भी रालोद ने इसी फॉर्मूले पर अपने प्रत्याशी लड़ाए थे।
अभी से ही शुरू हो गया प्रचार अभियान
जो लोग निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का मन बना चुके हैं, उन्होंने तो अभी से ही शहर में प्रचार अभियान की शुरुआत भी कर दी है। इन लोगों के लाउडस्पीकर लगे वाहन शहर में घूमने लगे हैं और लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं देने लगे हैं। अब इन दावेदारों की योजना दिवाली से पहले घर-घर जाकर मुबारकबाद के बहाने लोगों के बीच पैठ बनाने की है। कोई मिठाई तो कोई दूसरे उपहार देकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश करेगा। जाहिर है कि निकाय चुनाव से ठीक पहले दिवाली का त्योहार मतदाताओं को मालामाल कर सकता है।
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अपना टिकट पक्का करने के लिए टिकटार्थी हर फॉर्मूला आजमाने को तैयार हैं। जो राजनीतिक पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्होंने तो लखनऊ तक की भागदौड़ भी शुरू कर दी है। टिकट के लिए कोई पार्टी के दिग्गज नेताओं की सिफारिश लगा रहा है तो कोई मंत्री और विधायकों की सिफारिश के बूते टिकट का ख्वाब पाले हुए हैं। पार्टियों में भी आरक्षण के हिसाब से नगर पालिका व नगर पंचायत अध्यक्षों और वार्ड सभासदों के प्रत्याशियों के चयन पर मंथन शुरू हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा हो या बसपा, सपा, रालोद या कांग्रेस। सभी पार्टियों को हाईकमान से आदेश मिला है कि वह हर निकाय अध्यक्ष के लिए संभावित प्रत्याशियों के नामों का पैनल उनकी पूरी डिटेल के साथ भिजवाएं। हाईकमान इस पर विचार-विमर्श के बाद अंतिम निर्णय लेगा।
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बसपा ने चुनाव के लिए कसी कमर
पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने जा रही बसपा ने तो आरक्षण की घोषणा के तत्काल बाद शुक्रवार को ही अहम बैठक की और इसमें जिले की सभी नौ निकायों के अध्यक्ष पद के लिए प्रत्याशियों के चयन पर चर्चा की गई। वार्ड सभासदों के लिए प्रत्याशी तय करने पर भी मंथन किया गया। उम्मीद है कि अगले हफ्ते में पार्टी अपने प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप दे देगी।
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प्रत्याशी चयन को जल्द होगी भाजपा की बैठक
भाजपा अब तक निकाय चुनाव को लेकर कई बैठकें कर चुकी है, लेकिन आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से अब तक प्रत्याशी चयन को लेकर कोई बात नहीं हो सकी थी। लिहाजा अब भाजपा जल्द ही इस सिलसिले में अहम बैठक करेगी, जिसमें सभी नगर पालिका व नगर पंचायतों के अध्यक्ष और सभासद पदों के लिए आवेदन लिए जाएंगे। आवेदनों के आधार पर जिला नेतृत्व प्रत्याशियों का पैनल तैयार करके बृज प्रदेश इकाई को भेजेगा। बृज प्रदेश इकाई इसे अपनी संस्तुति के साथ प्रदेश नेतृत्व को भेजेगी, जहां से प्रत्याशियों के नाम की अंतिम घोषणा की जाएगी। टिकट पाने के लिए आवेदकों की सबसे लंबी कतार भी इसी पार्टी में है। ऐसे में पार्टी के लिए अध्यक्ष पदों पर सर्वमान्य चेहरा तय करना बिल्कुल आसान नहीं होगा।
लखनऊ से तय होंगे कांग्रेस के प्रत्याशी
कांग्रेस का फिलहाल प्रदेश में ज्यादा असर नहीं है, लेकिन चुनाव लड़ने के दावेदारों की कतार यहां भी है। पार्टी के जिला और शहर नेतृत्व को नगर पालिका व नगर पंचायत अध्यक्ष और सभासदों के पदों के लिए अच्छी-खासी संख्या में आवेदन मिले हैं, लेकिन पार्टी का पूरा जोर हर निकाय से ऐसे चेहरे को लड़ाने पर है, जोकि दूसरे दलों को कड़ी चुनौती पेश कर सके और जीत के लिए अपना दावा मजबूत कर सके। कांग्रेस जिला व शहर नेतृत्व को भी निर्देश मिला है कि वह जल्द से जल्द संभावित प्रत्याशियों के नाम का पैनल तैयार करके लखनऊ भिजवाएं। जहां से अंतिम प्रत्याशी की घोषणा की जाएगी।
सपा में भी दावेदारों की लंबी फेहरिस्त
समाजवादी पार्टी में भी चुनाव लड़ने के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। सपा भी इस बार चुनाव चिह्न पर अपने प्रत्याशी लड़ाने जा रही है। पार्टी में इस पर चर्चा शुरू हो चुकी है। शनिवार को जिला नेतृत्व ने इस संबंध में अहम बैठक बुलाई है, जिसमें प्रत्याशी चयन पर चर्चा की जाएगी। कई ऐसे दावेदार भी सपा जिला नेतृत्व से संपर्क बनाए हुए हैं, जिनकी अपनी पार्टी में टिकट के लिए दाल गलने की संभावना कम है, जबकि कुछ खुद को पुराना और वफादार कार्यकर्ता बताते हुए टिकट के लिए दावा ठोक रहे हैं।
बागियों पर रहेगी रालोद की नजर
राष्ट्रीय लोकदल भी पहली बार चुनाव चिह्न पर निकाय चुनाव में किस्मत आजमाने जा रहा है। रालोद ने भी सभी नगर पालिका और नगर पंचायतों में आवेदन लेने शुरू कर दिए हैं। वैसे पार्टी की नजर दूसरे दलों के उन बागियों पर रहेगी, जिनका अपने क्षेत्र में प्रभाव है। रालोद ने भी चुनाव के लिए आवेदन लेने शुरू कर दिए हैं। विधानसभा चुनाव में भी रालोद ने इसी फॉर्मूले पर अपने प्रत्याशी लड़ाए थे।
अभी से ही शुरू हो गया प्रचार अभियान
जो लोग निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का मन बना चुके हैं, उन्होंने तो अभी से ही शहर में प्रचार अभियान की शुरुआत भी कर दी है। इन लोगों के लाउडस्पीकर लगे वाहन शहर में घूमने लगे हैं और लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं देने लगे हैं। अब इन दावेदारों की योजना दिवाली से पहले घर-घर जाकर मुबारकबाद के बहाने लोगों के बीच पैठ बनाने की है। कोई मिठाई तो कोई दूसरे उपहार देकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश करेगा। जाहिर है कि निकाय चुनाव से ठीक पहले दिवाली का त्योहार मतदाताओं को मालामाल कर सकता है।