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Hathras News: सजीं अलमारियां, खामोश किताबें...रील्स के दौर में बेगाना हुआ साहित्य

Tue, 04 Aug 2026 01:58 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 01:58 AM IST
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Adorned shelves, silent books... literature has become a stranger in the age of Reels.
राजकीय पुस्तकालय की रैक में सजीं पुस्तकें। संवाद - फोटो : Samvad
प्रशांत भारती
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हाथरस। स्मार्टफोन की स्क्रीन पर अंगुलियां स्क्रॉल करने और रील्स की दुनिया में खोए युवाओं की दूरी अब किताबों से लगातार बढ़ती जा रही है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण शहर स्थित राजकीय पुस्तकालय में देखने को मिल रहा है। जहां महान लेखकों और विचारकों की आठ हजार ज्ञानवर्धक पुस्तकों का विशाल संग्रह है, लेकिन उन्हें पढ़ने वालों की कमी है।
वर्ष 2013 में स्थापित इस पुस्तकालय का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के युवाओं और छात्रों में पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक शांत व समृद्ध माहौल उपलब्ध कराना था। हालांकि, इंटरनेट और डिजिटल युग के प्रभाव के चलते स्थिति इसके ठीक विपरीत नजर आ रही है। इधर, जानकारों का मानना है कि जो गहराई और मानसिक शांति छपी हुई किताबों को पढ़ने से मिलती है, वह डिजिटल स्क्रीन पर संभव नहीं है।
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पुस्तकालय में साहित्य, इतिहास, विज्ञान, संस्कृति और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी आठ हजार से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। महान साहित्यकारों और विचारकों की रचनाएं अलमारियों में सजी अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं, लेकिन आलम यह है कि युवा अब किताबों को घर ले जाकर पढ़ने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। पुस्तकालय प्रबंधन के अनुसार किताबों की बुकिंग कराने का रुझान लगातार घट रहा है।
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210 पंजीकृत सदस्य, रोजाना पहुंच रहे सिर्फ 30-40 छात्र
आंकड़ों पर नजर डालें तो पुस्तकालय में वर्तमान में कुल 210 विद्यार्थी ही पंजीकृत हैं। इनमें से भी रोजाना औसतन 30 से 40 ही अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। आने वाले अधिकांश युवा भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र हैं, जो वहां बैठकर अपनी सेल्फ स्टडी करते हैं। सामान्य साहित्य या ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ने वाले पाठकों की संख्या न के बराबर रह गई है।

मोबाइल की लत से नई पीढ़ी में बढ़ा भटकाव
प्रतियोगी छात्रा रिया चतुर्वेदी ने युवा पीढ़ी के इंटरनेट और मोबाइल की तरफ बढ़ते झुकाव तथा किताबों से दूरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किताबों से पढ़ना ज्यादा बेहतर होता है। मोबाइल से पढ़ते समय भटकाव बहुत अधिक होता है, जैसे सोशल मीडिया पर पढ़ाई के दौरान अन्य प्लेटफॉर्म पर मेसेज या नोटिफिकेशन आते ही ध्यान तुरंत उधर चला जाता है। आजकल के बच्चों में बचपन से ही मोबाइल के प्रति आकर्षण बढ़ा है। छोटे बच्चों के हाथ में भी माता-पिता फोन दे देते हैं, जिससे वे फोन से ज्यादा जुड़ गए हैं और किताबों को उतनी प्राथमिकता नहीं दे पा रहे हैं। यही वजह है कि नई पीढ़ी किताबों से दूर हो रही है और पढ़ाई पर सही तरह ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही है।



पुस्तकालय पर एक नजर पुस्तकालय का शुभारंभ -- 18 अगस्त 2013
निर्माण में लागत-- 44.90 लाख
बैठने की क्षमता -- 60 विद्यार्थी
किताबों की संख्या --- 8000 करीब

पुस्तकालय में विद्यार्थियों का पंजीकरण बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में करीब आठ हजार पुस्तकें उपलब्ध हैं। प्रतियोगी छात्र-छात्राएं एकमुश्त 300 रुपये जमा करके आजीवन सदस्यता ले सकते हैं।
-नीरज गोयल, प्रभारी राजकीय पुस्तकालय।
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