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Hathras News: टंकी बनी, मीठा पानी मिला, लेकिन रास्ते बन गए दलदल
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नगला मया में मीठे पानी की पाइपलाइन से हुए रिसाव के कारण सड़क पर बहता पानी।
- फोटो : samvad
खारे पानी से निजात पाने के लिए जिस गांव के लोगों ने सालों संघर्ष किया, अब वही पेयजल व्यवस्था उनके लिए मुसीबत बन गई है। नगला मया में पानी की टंकी से आपूर्ति शुरू होने के बाद पाइपलाइन बार-बार फट रही है। इससे गांव के मुख्य रास्तों पर पानी भरने से कीचड़ और फिसलन की समस्या पैदा हो गई है।
नगला मया स्थित इसी पेयजल टंकी से पाइपलाइन के जरिए पड़ोसी गांव राजनगर और महासिंहपुर तक पानी की आपूर्ति की जा रही है। पानी की शुद्धता से ग्रामीणों को कोई शिकायत नहीं है, मगर जैसे ही पानी छोड़ा जाता है, रास्तों पर बिछी पाइपलाइन फव्वारे की तरह बहने लगती है। हजारों लीटर पेयजल नालियों में बहने के बजाय सीधे मुख्य मार्गों पर भर जाता है। इसके चलते रास्तों पर घुटनों तक कीचड़ और फिसलन की स्थिति बन गई है। स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए इन रास्तों से निकलना जोखिम भरा हो गया है।
मरम्मत के दो दिन बाद फिर वही बदहाली
ग्रामीणों में सबसे बड़ा रोष विभागीय कार्यशैली को लेकर है। टंकी निर्माण के बाद से अब तक दर्जनों बार पाइपलाइन की मरम्मत कराई जा चुकी है, लेकिन हर बार महज औपचारिकता पूरी कर पल्ला झाड़ लिया जाता है। पैचिंग और मरम्मत के दो से चार दिन बाद पाइपलाइन फिर से उन्हीं जगहों से लीक करने लगती है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पाइपलाइन डालने में भारी तकनीकी लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ है।
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पानी और कीचड़ से राह चलना मुश्किल
- सालों के संघर्ष के बाद गांव में पानी की टंकी मंजूर हुई थी, लेकिन अब सड़कों पर बहता पानी मुसीबत बन गया है। बच्चे स्कूल जाते समय कीचड़ में फिसलकर गिर रहे हैं। हर सप्ताह पाइपलाइन लीकेज होना विभागीय लापरवाही को दर्शाता है। - श्रीमती देवी, स्थानीय निवासी, नगला मया।
मरम्मत के नाम पर हो रही खानापूरी
- विभागीय कर्मचारी गड्ढा खोदकर काम चलाऊ मरम्मत कर देते हैं। दो दिन बाद पानी का प्रेशर बढ़ते ही पाइपलाइन फिर टूट जाती है। इससे सरकारी बजट की बर्बादी हो रही है। पूरी लाइन दुरुस्त होने पर ही समस्या का स्थायी समाधान संभव है। - नीरज कुमार, स्थानीय निवासी, नगला मया।
जांच कराकर डाली जाए नई पाइपलाइन
- राजनगर और महासिंहपुर को पानी देने पर ग्रामीणों को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसका खामियाजा नगला मया के लोग भुगत रहे हैं। बार-बार पाइप फटना घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका पैदा करता है। उच्चाधिकारी मौके पर जांच कराकर नई लाइन डलवाएं। - पुष्पेंद्र कुमार, स्थानीय निवासी, नगला मया
- जब नई टंकी बनाई जाती है तब, करीब छह माह तक उसकी टेस्टिंग आदि की जाती है। अक्सर प्रेशर के कारण लाइन लीकेज करने लगती है, पाइप फट जाते हैं। नगला मया के बारे में अब हम जानकारी करते हैं। हम पूरी तरह पाइपलाइन को ठेकेदार से सही कराएंगे, इसे लेकर मौका मुआयना भी किया जाएगा। - मोहित कुमार, अधिशासी अभियंता ग्रामीण, जल निगम, हाथरस।
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नगला मया स्थित इसी पेयजल टंकी से पाइपलाइन के जरिए पड़ोसी गांव राजनगर और महासिंहपुर तक पानी की आपूर्ति की जा रही है। पानी की शुद्धता से ग्रामीणों को कोई शिकायत नहीं है, मगर जैसे ही पानी छोड़ा जाता है, रास्तों पर बिछी पाइपलाइन फव्वारे की तरह बहने लगती है। हजारों लीटर पेयजल नालियों में बहने के बजाय सीधे मुख्य मार्गों पर भर जाता है। इसके चलते रास्तों पर घुटनों तक कीचड़ और फिसलन की स्थिति बन गई है। स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए इन रास्तों से निकलना जोखिम भरा हो गया है।
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मरम्मत के दो दिन बाद फिर वही बदहाली
ग्रामीणों में सबसे बड़ा रोष विभागीय कार्यशैली को लेकर है। टंकी निर्माण के बाद से अब तक दर्जनों बार पाइपलाइन की मरम्मत कराई जा चुकी है, लेकिन हर बार महज औपचारिकता पूरी कर पल्ला झाड़ लिया जाता है। पैचिंग और मरम्मत के दो से चार दिन बाद पाइपलाइन फिर से उन्हीं जगहों से लीक करने लगती है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पाइपलाइन डालने में भारी तकनीकी लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ है।
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पानी और कीचड़ से राह चलना मुश्किल
- सालों के संघर्ष के बाद गांव में पानी की टंकी मंजूर हुई थी, लेकिन अब सड़कों पर बहता पानी मुसीबत बन गया है। बच्चे स्कूल जाते समय कीचड़ में फिसलकर गिर रहे हैं। हर सप्ताह पाइपलाइन लीकेज होना विभागीय लापरवाही को दर्शाता है। - श्रीमती देवी, स्थानीय निवासी, नगला मया।
मरम्मत के नाम पर हो रही खानापूरी
- विभागीय कर्मचारी गड्ढा खोदकर काम चलाऊ मरम्मत कर देते हैं। दो दिन बाद पानी का प्रेशर बढ़ते ही पाइपलाइन फिर टूट जाती है। इससे सरकारी बजट की बर्बादी हो रही है। पूरी लाइन दुरुस्त होने पर ही समस्या का स्थायी समाधान संभव है। - नीरज कुमार, स्थानीय निवासी, नगला मया।
जांच कराकर डाली जाए नई पाइपलाइन
- राजनगर और महासिंहपुर को पानी देने पर ग्रामीणों को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसका खामियाजा नगला मया के लोग भुगत रहे हैं। बार-बार पाइप फटना घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका पैदा करता है। उच्चाधिकारी मौके पर जांच कराकर नई लाइन डलवाएं। - पुष्पेंद्र कुमार, स्थानीय निवासी, नगला मया
- जब नई टंकी बनाई जाती है तब, करीब छह माह तक उसकी टेस्टिंग आदि की जाती है। अक्सर प्रेशर के कारण लाइन लीकेज करने लगती है, पाइप फट जाते हैं। नगला मया के बारे में अब हम जानकारी करते हैं। हम पूरी तरह पाइपलाइन को ठेकेदार से सही कराएंगे, इसे लेकर मौका मुआयना भी किया जाएगा। - मोहित कुमार, अधिशासी अभियंता ग्रामीण, जल निगम, हाथरस।