फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   अवैध कब्जों का मारा...यह शहर बेचारा

अवैध कब्जों का मारा...यह शहर बेचारा

Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
Hathras
Hathras Updated Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
हाथरस। किसी शहर की पहचान क्या होती है? अच्छी सड़कें, जनसुविधाएं, चलने के लिए फुटपाथ, चौराहों पर लाइट और ट्रैफिक इंतजाम, हमारे हाथरस में इनमें से क्या है? शायद...कुछ भी नहीं। और जो कुछ अच्छा है भी वह अतिक्रमण और कब्जों की वजह से खस्ता हाल है। अतिक्रमण से यदि इस शहर को मुक्ति मिले तो शहर की सूरत बदल सकती है और इसका विकास भी हो सकता है। शहर के मुख्य मार्गों, गलियोें और बाजारों में इस समय कच्चे-पक्के अतिक्रमण हैं। शायद ही शहर का कोई नाला हो, जोकि अतिक्रमण से न पटा हो। अतिक्रमण की वजह से शहर की अच्छी सफाई नहीं हो पाती। यहां के रास्ते संकरे हो गए हैं इसकी वजह से जाम लगा रहता है। शहर में दाऊजी महाराज मंदिर और किले की भूमि के काफी हिस्से पर अतिक्रमण है। और तो और पीडब्लूडी का गेस्ट हाउस तक अतिक्रमण की जद में है। शहर में अतिक्रमण की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। आगरा-अलीगढ़ एनएच, मथुरा-कासगंज राजमार्ग के अलावा शहर के सभी मार्गों पर अतिक्रमणों की भरमार है। चाहे व कच्चे अतिक्रमण हो या पक्केे। आधे रास्ते तो इन अतिक्रमणकारियों ने घेर रखे हैं। यही स्थिति शहर के बाजारों की। शहर के मुख्य बाजार भी अतिक्रमण से घिरे हुए हैं। मुख्य बाजारों में ही नहीें शहर की गलियों में भी अतिक्रमण है। बाजारोें और गलियों में तो पक्के अतिक्र मण हैं। इसकी वजह से पर चलना तक मुश्किल है। अतिक्रमण की वजह से रास्ते संकरे हो गए हैं। इसलिए एनएच हो या राजमार्ग अथवा बाजार। जाम लगने का सबसे मुख्य कारण अतिक्रमण ही है। सड़कोें की चौड़ाई अतिक्रमणों ने कम कर दी है। स्थायी और अस्थायी अतिक्रमणोें की वजह से बाजारों और मुख्य रास्तों पर तो कहीं-कहीं आधी सड़क तक घिरी हुई है। दुकानों के बाहर सड़क को घेरते हुए पहले तख्त रखे जाते हैं और उसके बाद फिर तिरपाल टांग दी जाती है। परिणामस्वरूप मुख्य बाजारों के रास्ते गलियों जैसे दिखते हैें। ऐसी ही स्थिति गलियों की है। दर्जनों स्थानों पर तो पक्के निर्माण तक कर रखे हैं। शहर का शायद ही कोई ऐसा नाला हो, जिसके अतिक्रमण न कर रखा हो। जहां-जहां शहर के नाले हैं, वहां उनके ऊपर पत्थर डाल रखे हैं और पक्के निर्माण कर रखे हैं। पता ही नहीं चलता कि नाले इन पत्थरोें के नीचे है। आगरा-अलीगढ़ रोड का नाला हो या फिर जलेसर रोड का नाला। गणेशगंज का नाला हो या फिर कोई और नाला। हर जगह यही स्थिति है। इसकी वजह से शहर में सफाई नहीं हो पाती। सालों से इन नालों के अतिक्र मण नहीं हटे और इनके नीचे सिल्ट नहीं निकल सकी है। शहर की गंदगी का सबसे बड़ा कारण भी यही है। नालों से यदि अतिक्र मण हटा दिए जाएं तो सफाई व्यवस्था ठीक हो सकती है। प्रशासन अतिक्रमण को लेकर उदासीन रहता है। शहर के पुरातन महत्व के स्थल किला श्री दाऊजी महाराज के काफी भू-भाग पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर लिया। अतिक्रमणकारियों को दर्जनों बार नोटिस दिए गए लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। अब तो वहां पक्के मकान बन गए हैं। प्रशासन ने कई बार अभियान चलाया लेकिन कोई कारगर उपाय नहीं निकला। और तो और यहां लोनिवि का गैस्ट हाउस तक अतिक्रमण की जद में है। हर बार प्रशासन के अतिक्रमण हटाओ अभियान की हवा निकल जाती है और अतिक्रमण यहां लाइलाज है।
विज्ञापन


क्या चाहिए---
--प्रशासन एक योजना के तहत सख्ती से चलाए अतिक्रमण हटाओ अभियान
--शहर के नालों के ऊपर से सफाई को ठीक कराने को हटवाए जाएं अतिक्रमण
--सड़कों के किनारे खड़े होने वाले वाहनोें को हटवाकर रास्ता कराया जाए चौड़ा
--दुकानों के बाहर सड़क पर निकल रहे तख्तों और तिरपालों को हटवाया जाए

--अतिक्रमण को लेकर जल्द ही नगर पालिका के अधिकारियों और व्यापारियों के साथ बात की जाएगी। जिसके बाद अगली कार्रवाई की जाएगी। -मदनचंद दुबे, एसडीएम सदर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed