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जिन्होंने सब कुछ लुटाया, उन्हें हमने भुलाया
Hathras
Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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सादाबाद। अंग्रेजी हूकुमत से आजादी के लिए जब पूरा देश जूझ रहा था, तब सादाबाद ने भी इस महायज्ञ में बड़ी आहुतियां दीं। यहां के नौजवानों ने अपना खून खोलकर आजादी के उजाले को चमकदार बनाया था। उन्होंने कदम-कदम ब्रितानी जुल्म का सामना किया, फिर भी नहीं टूटे। वे जेेल की कोठरियों में वर्षों घुटते रहे ताकि आने वाली पीढ़ियां आजाद हवा में सांस ले सकें। बेशक उनका शौर्य इतिहास की दीवारों का अमिट लेख हो, लेकिन युवा पीढ़ी उनकी यादें न सहेज सकी। दुर्भाग्य यह भी कि वह आजाद भारत में प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हुए। निंरजन प्रसाद मित्तल, गोपाल प्रसाद मित्तल और गौरीशंकर ऐसे ही नाम हैं। कस्बा सादाबाद निवासी रामचन्द्र के सपूतों निरंजन और गोपाल ने आजादी के आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महात्मा गांधी के भ्रमण के बाद निंरजन मातृभूमि को स्वतंत्र देखने के लिए बैचेन हो उठे। सन 1930 में वह सक्रिय रूप से स्वतंत्रता संग्राम में कूद गए। अंग्रेजों ने जुल्म ढाए पर वह सीना ताने डटे रहे। आसपास के इलाकों में भ्रमण कर जंगे-आजादी की अलख जगाई। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें 26 मार्च 1941, 15 जून 1941 और इससे पहले 15 फरवरी 1932, 30 मई 1930 को गिरफ्तार किया गया। बार-बार गिरफ्तार किए जाते रहे। जेल काटते। फिर लड़ाई में कूद जाते। यह सिलसिला आजादी की सुबह देखने तक जारी रहा। यह स्वतंत्रता सेनानी 1954 में लंबी बीमारी के कारण इस दुनिया से विदा हुआ। निंरजन के भाई गोपाल प्रसाद ने भी इसी दौरान कई आंदोलनों में भाग लिया। कई बार गिरफ्तार भी हुए। जेल में तरह-तरह की यातनाएं सहीं। लेकिन जब भी जेल से निकले तो फिर से आजादी की अलख जगाते। 1980 में इस स्वतंत्रता सेनानी को बीमारी ने हमसे छीन लिया। कस्बे के ही गौरीशंकर ने भी ऐसे ही दीवाने थे जिन्होंने स्वतंत्रता पर जीवन न्योछावर कर दिया। सादाबाद में ही नहीं ग्रामीण इलाकों के युवाओं ने भी आजादी की लड़ाई खूब लड़ी थी। बिसावर के पन्नालाल गौतम, रसमई के गजराज सिंह, एदलपुर के किशोरललाल पालीवाल, मढाका के घुरे सिंह, रसगंवा के बृजेन्द्र सिंह, मीरपुर के शिवलाल, सहपऊ के आंनदीलाल, महारारा के बृजलाल, आरती के बाबूलाल, बेदई के दर्याब सिंह, बरामई के वेदराम, अरोठा के बालमुंकद, ऊचागांव के टीकाराम पुजारी, कुरसंडा के दिगम्बर सिंह आदि के बिना स्वतंत्रता संग्राम की कहानी पूरी नहीं होगी। स्वतंत्रता सेनानी निंरजन प्रसाद के नाम पर नगर पंचायत द्वारा बाजार का नाम निंरजन बाजार रखा गया। उनके भाई गोपाल प्रसाद के नाम से कस्बे की एक गली गोपाल गली के नाम से प्रसिद्ध है। यहां के गांधी पार्क और आगरा के विकास मार्केट में लगी महात्मा गांधी जी की प्रतिमा के नीचे इन दोनों वीरों का भी नाम दर्ज है। जिला प्रशासन भी निंरजन प्रसाद और गोपाल प्रसाद को भुलाए बैठा है। हाथरस के दाऊजी मेले की पट्टिका से इन दोनों स्वतंत्रता सेनानियों के नाम गायब हैं। इससे इनके परिजनों में रोष है। परिवार से जुडे़ महेशचन्द्र मित्तल कहते हैं कि कई बार इस ओर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट भी कराया जा चुका है।
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