जांच में नया तथ्य आया तो फंसेंगे अफसर!

Hathras Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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हाथरस। मेला श्रीदाऊजी महाराज में पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के विधायक निधि के पैसों से 2007 से 2011 के बीच कराए गए काम फिर से जांच के घेरे में हैं। मगर सवाल यह है कि विधायक निधि से जुड़ी जिन शिकायतों की जांच में जिला प्रशासन पूर्व मंत्री को पहले ही क्लीन चिट दे चुका है तो वह उन्हीं शिकायतों की जांच को दुबारा कैसे बदल पाएगा। अगर इस मामले की जांच में कोई नया तथ्य सामने आएगा तो विकास भवन के अफसरों की गर्दन फंसने की आशंका बढ़ जाएगी। खुद अफसर भी यही सोचकर परेशान हैं और फिलहाल शासन से जांच के आदेश मिलने का इंतजार कर रहे हैं। गौरतलब है कि विधायक निधि से मेला श्रीदाऊजी महाराज परिसर में हुए कामों के बारे में यही शिकायतें अश्विनी शर्मा से पहले सपा के सादाबाद विधायक देवेंद्र अग्रवाल भी कर चुके हैं। उस समय भी लोकायुक्त ने सीडीओ से जांच रिपोर्ट मांगी थी। सीडीओ ने जांच के बाद जो रिपोर्ट शासन को भेजी थी, उसमें विधायक निधि के कामों को शत-प्रतिशत सही बताया गया था। मगर अब फिर उन्हीं शिकायतों की दुबारा जांच सीडीओ से ही कराने का आदेश देकर लोकायुक्त ने विकास विभाग के अफसरों को मुश्किल में फंसा दिया है। अफसर यही सोचकर परेशान हैं कि जिन शिकायतों पर वह अपनी जांच रिपोर्ट पहले ही भेज चुके हैं, उन शिकायतों की दुबारा जांच से वह क्या हासिल कर पाएंगे। अगर पूर्व मंत्री की विधायक निधि से हुए कामों में कोई गड़बड़ी या नया तथ्य सामने आता है तो उसे अपनी रिपोर्ट में कैसे दिखाएंगे। इससे तो उनकी गर्दन ही फंस जाएगी और शासन को उनके खिलाफ कार्रवाई का मौका मिल जाएगा। लोकायुक्त की सिफारिशों को लेकर विकास भवन में शनिवार को मंथन और सलाह-मशविरे का दौर चलता रहा। पूर्व ऊर्जा मंत्री ने पिछले साल बसपा शासन में मौजूदा सीडीओ के खिलाफ पद का दुरुपयोग करने और विकास योजनाओं में अनियमितताएं बरतने की शिकायतें की थीं। शासन ने उनकी शिकायताें पर सीडीओ के खिलाफ जांच के आदेश भी दिए थे, लेकिन अब वक्त का तकाजा देखिए कि अब उनकी विधायक निधि के कामों की जांच की कमान फिर से उन्हीं सीडीओ को मिलने जा रही है। पिछली बार लोकायुक्त दफ्तर से उनसे सिर्फ उन कामों की सूची मांगी गई थी, जोकि पूर्व मंत्री की विधायक निधि से 2007 से 2011 के बीच मेला परिसर में कराए गए हैं। अब नया आदेश क्या है, यह तो शासन से ही जांच का आदेश मिलने पर स्पष्ट हो पाएगा। - रवि कुमार, सीडीओ
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