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हाथरस कचहरी की सुरक्षा में झोल ही झोल
Hathras
Updated Sat, 02 Aug 2014 05:30 AM IST
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हाथरस। अलीगढ़ कोर्ट में गुरुवार को जिस तरह से सुरक्षा व्यवस्था तार-तार हुई, वैसे घटनाएं यहां भी कई बार हो चुकी हैं। यहां कोर्ट परिसर में पुलिस मुठभेड़ हो चुकी हैं और मर्डर भी। कैदी ने पुलिस अभिरक्षा में ही गवाह का ठीक डीजे कोर्ट के सामने गला तक रेत दिया है। सबसे खेदजनक पहलू यह है कि इसके बाद भी पुलिस प्रशासन नहीं चेतता और कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था में झोल ही झोल हैं। हाथरस जिला एवं सत्र न्यायालय को स्थापित हुए एक दशक से ज्यादा हो गए। उससे पहले से भी यहां सीजेएम कोर्ट दशकों के स्थापित थी। यहां जिला न्यायालय अपनी भूमि के भवन में स्थापित नहीं है। सालों से न्यायालय यहां राजा दयाराम के किला परिसर में ही चल रहा है। कोर्ट की सुरक्षा के मानक यहां तब पूरे हों, जबकि कोर्ट अपनी भूमि के भवन में स्थापित हो। यहां जहां कोर्ट स्थापित है, उनके परिसर स्थल पूरी तरह से खुले हुए है। कब कोई भी बिना चेकिंग के किसी भी न्यायालय में पहुंच जाता है। वैसे भी पुलिस चेकिंग करने में सुस्त दिखाई देती है। हालांकि मुख्य रास्ते पर पुलिसकर्मी बैठे दिखाई देते हैं, फिर भी धड़ल्ले से वाहन अंदर प्रवेश कर जाते हैं। जिला न्यायालय परिसर में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। चारों तरफ सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। एक तरफ के द्वार पर तो मैटल डिटेक्टर से चेकिंग होती है, लेकिन अन्य रास्तों पर कोई तलाशी के लिए खड़ा ही दिखाई नहीं देता। यही कारण है कि यहां बेहद संगीन वारदातें कोर्ट परिसर और कोर्ट के ठीक बाहर हो चुकी हैं।
पुलिस और भीड़ ने मार गिराए थे तीन हमलावर
वर्ष 2009 में 21 फरवरी को हाथरस कोर्ट परिसर में खून की होली खेली गई थी। दो कैदियों का खून कर भाग रहे तीन बदमाशों को पुलिस ने पब्लिक के साथ मिलकर ढेर कर दिया था। एटा से अपनी तारीख पर पेशी पर आए कमलेश और सत्यवीर को कुछ हमलावरों ने मार दिया था तो तीन हमलावरों को कोर्ट परिसर में ही मार गिराया था। इस घटना के बाद यहां वकीलोें ने जमकर हंगामा काटा था और कोर्ट की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे।
एक बंदी ने दो गवाहों को किया था घायल
इसके कुछ दिन बाद ही 12 अगस्त 2009 को दीवानी की हवालात के बाहर परिसर में पुलिस की गिरफ्त में ही एक कैदी ने एक बच्चे सहित दो लोगों को घायल कर दिया था। इस कैदी के दो साथियों ने बड़ी आसानी से उसे चाकू पकड़ा दिया था और उसने कोर्ट के सामने ही हमला कर दिया था। घटना के बाद वहां काफी अफरा-तफरी मची थी।
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कैदियों में कई बार हो चुकी है भिड़ंत
13 अप्रैल 2011 को कोर्ट में दीवानी में कैदी आपस में लड़ गए थे और लहूलुहान हो गए थे। एक कैदी के सीने पर दस टांके आए थे। कैदियों में अक्सर यहां लड़ाई होती रहती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि यहां हवालात काफी छोटी है। जेल है नहीं। कैदियों को रोजाना पेशी के लिए अलीगढ़ कारागार से हाथरस लाया और ले जाया जाता है।
कोर्ट के बाहर विस्फोट में गई थी दो की जान
बात यदि इससे पुरानी करें तो 25 फरवरी 2006 को कचहरी परिसर में एक मारुति वैन में बम फटा था। बम फटने से अजहरुद्दीन और विष्णु नाम के दो युवकों की मौत हो गई थी। उस समय भी वकीलों ने काफी आक्रोश जाहिर किया था और हंगामा मचाया था, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हुए थे।
2009 में 55 फाइलें हो गई थीं चोरी
यही नहीं 18 अप्रैल 2009 को सीजेएम कोर्ट से 55 फाइलें चोरी हो गई थीं। उसके बाद कोर्र्ट के ताले भी टूट चुके हैं। ऐसे में कोर्ट कार्यालय से चोरी से लेकर यहां खून-खराबा तक हो चुका है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता नहीं हैं। हालांकि इस परिसर में एक प्लाटून पीएसी की तैनाती रहती है, लेकिन उसके जवान ज्यादातर बाहर ड्यूटी पर ही जाते हैं।
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पुलिस और भीड़ ने मार गिराए थे तीन हमलावर
वर्ष 2009 में 21 फरवरी को हाथरस कोर्ट परिसर में खून की होली खेली गई थी। दो कैदियों का खून कर भाग रहे तीन बदमाशों को पुलिस ने पब्लिक के साथ मिलकर ढेर कर दिया था। एटा से अपनी तारीख पर पेशी पर आए कमलेश और सत्यवीर को कुछ हमलावरों ने मार दिया था तो तीन हमलावरों को कोर्ट परिसर में ही मार गिराया था। इस घटना के बाद यहां वकीलोें ने जमकर हंगामा काटा था और कोर्ट की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे।
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एक बंदी ने दो गवाहों को किया था घायल
इसके कुछ दिन बाद ही 12 अगस्त 2009 को दीवानी की हवालात के बाहर परिसर में पुलिस की गिरफ्त में ही एक कैदी ने एक बच्चे सहित दो लोगों को घायल कर दिया था। इस कैदी के दो साथियों ने बड़ी आसानी से उसे चाकू पकड़ा दिया था और उसने कोर्ट के सामने ही हमला कर दिया था। घटना के बाद वहां काफी अफरा-तफरी मची थी।
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कैदियों में कई बार हो चुकी है भिड़ंत
13 अप्रैल 2011 को कोर्ट में दीवानी में कैदी आपस में लड़ गए थे और लहूलुहान हो गए थे। एक कैदी के सीने पर दस टांके आए थे। कैदियों में अक्सर यहां लड़ाई होती रहती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि यहां हवालात काफी छोटी है। जेल है नहीं। कैदियों को रोजाना पेशी के लिए अलीगढ़ कारागार से हाथरस लाया और ले जाया जाता है।
कोर्ट के बाहर विस्फोट में गई थी दो की जान
बात यदि इससे पुरानी करें तो 25 फरवरी 2006 को कचहरी परिसर में एक मारुति वैन में बम फटा था। बम फटने से अजहरुद्दीन और विष्णु नाम के दो युवकों की मौत हो गई थी। उस समय भी वकीलों ने काफी आक्रोश जाहिर किया था और हंगामा मचाया था, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हुए थे।
2009 में 55 फाइलें हो गई थीं चोरी
यही नहीं 18 अप्रैल 2009 को सीजेएम कोर्ट से 55 फाइलें चोरी हो गई थीं। उसके बाद कोर्र्ट के ताले भी टूट चुके हैं। ऐसे में कोर्ट कार्यालय से चोरी से लेकर यहां खून-खराबा तक हो चुका है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता नहीं हैं। हालांकि इस परिसर में एक प्लाटून पीएसी की तैनाती रहती है, लेकिन उसके जवान ज्यादातर बाहर ड्यूटी पर ही जाते हैं।