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सपा जिलाध्यक्ष पद से मनोज यादव की छुट्टी
Hathras
Updated Fri, 17 May 2013 05:30 AM IST
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हाथरस। सपा में यहां आखिर सत्ता परिवर्तन हो ही गया। पार्टी में फिर एक वरिष्ठ नेता का वजूद कायम रहा और इसी नेता की मर्जी से ही नए जिलाध्यक्ष की ताजपोशी हुई। वैसे पार्टी ने एक मुस्लिम चेहरे को जिले की कमान सौंपकर मुस्लिमों को यहां रिझाने की कवायद भी की है।
सपा की सरकार जैसे ही प्रदेश में पिछले साल सत्तासीन हुई। उस दौरान पार्टी ने एक युवा चेहरे मनोज यादव को यहां का जिलाध्यक्ष बना दिया। मनोज यादव पहले से भी सपा से जुड़े थे और उनके पिता रामप्रकाश यादव सादाबाद से विधायक भी रहे थे। मनोज यादव का जिलाध्यक्ष बनना पार्टी के एक गुट को नागवार गुजरा और इस गुट ने तभी से यादव को पद से हटाने के लिए अंदरखाने अभियान छेड़ दिया। कई बार जब पार्टी के कार्यक्रम हुए तो पार्टी की गुटबंदी खुलकर सामने आई। एक पूर्व प्रत्याशी को भी इसी गुटबंदी के चलते पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। पिछले दिनों पार्टी ने सरकार के एक साल पूरा होने पर जब कार्यक्रम आयोजित किया था। तब भी पार्टी के नेताओं में जमकर खींचतान मची थी। इसे लेकर भी पार्टी का उच्च नेतृत्व यहां की जिला कमेटी से खुश नहीं था।
इस हंगामे से जिलाध्यक्ष विरोधी गुट को मौका मिल गया और उसकी रणनीति सफल भी हो गई। वैसे जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में कुछ और नेता भी शामिल थे। अब आला कमान ने यहां सादाबाद के चेयरमैन रहे पूर्व जिलाध्यक्ष चौ.भाजुद्दीन को फिर से जिले में पार्टी की कमान सौंप दी है। भाजुद्दीन सपा के एक वरिष्ठ नेता के खासे निकट हैं और माना जा रहा है कि इसके चलते उनकी जिलाध्यक्ष पद पर ताजपोशी हुई। वैसे पार्टी ने भाजुद्दीन को जिलाध्यक्ष बनाकर यह कवायद भी की है कि वह यहां लोकसभा चुनाव में मुस्लिमों को रिझा लेगी। कुछ मिलाकर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने यहां फिर साबित कर दिया है कि कम से कम सपा में तो यहां वह जो चाहेंगे, वही होगा।
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सपा की सरकार जैसे ही प्रदेश में पिछले साल सत्तासीन हुई। उस दौरान पार्टी ने एक युवा चेहरे मनोज यादव को यहां का जिलाध्यक्ष बना दिया। मनोज यादव पहले से भी सपा से जुड़े थे और उनके पिता रामप्रकाश यादव सादाबाद से विधायक भी रहे थे। मनोज यादव का जिलाध्यक्ष बनना पार्टी के एक गुट को नागवार गुजरा और इस गुट ने तभी से यादव को पद से हटाने के लिए अंदरखाने अभियान छेड़ दिया। कई बार जब पार्टी के कार्यक्रम हुए तो पार्टी की गुटबंदी खुलकर सामने आई। एक पूर्व प्रत्याशी को भी इसी गुटबंदी के चलते पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। पिछले दिनों पार्टी ने सरकार के एक साल पूरा होने पर जब कार्यक्रम आयोजित किया था। तब भी पार्टी के नेताओं में जमकर खींचतान मची थी। इसे लेकर भी पार्टी का उच्च नेतृत्व यहां की जिला कमेटी से खुश नहीं था।
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इस हंगामे से जिलाध्यक्ष विरोधी गुट को मौका मिल गया और उसकी रणनीति सफल भी हो गई। वैसे जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में कुछ और नेता भी शामिल थे। अब आला कमान ने यहां सादाबाद के चेयरमैन रहे पूर्व जिलाध्यक्ष चौ.भाजुद्दीन को फिर से जिले में पार्टी की कमान सौंप दी है। भाजुद्दीन सपा के एक वरिष्ठ नेता के खासे निकट हैं और माना जा रहा है कि इसके चलते उनकी जिलाध्यक्ष पद पर ताजपोशी हुई। वैसे पार्टी ने भाजुद्दीन को जिलाध्यक्ष बनाकर यह कवायद भी की है कि वह यहां लोकसभा चुनाव में मुस्लिमों को रिझा लेगी। कुछ मिलाकर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने यहां फिर साबित कर दिया है कि कम से कम सपा में तो यहां वह जो चाहेंगे, वही होगा।
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