{"_id":"5c8011f7bdec22147337323a","slug":"81551897079-hathras-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्वविद्यालय परीक्षा में माफियाओं की बल्ले-बल्ले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्वविद्यालय परीक्षा में माफियाओं की बल्ले-बल्ले
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की परीक्षा में माफिया की बल्ले-बल्ले हो रही है। परीक्षा की निगरानी के लिए अभी तक विश्वविद्यालय स्तर से कोई सचल दल नहीं बनाया गया है, जिसका माफिया फायदा उठाते हुए नकल के नाम पर विद्यार्थियों से सौदेबाजी कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय की परीक्षा एक मार्च को अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हुई। चार पेपर भी हो गए, लेकिन अभी तक न तो विश्वविद्यालय स्तर से सचल बनाए गए हैं और न ही नोडल स्तर से सचल बने हैं, जिसका माफिया किस्म के लोग फायदा उठाने में लगे हुए हैं।
कहने को तो विश्वविद्यालय ने एक-दूसरे के कॉलेज में परीक्षा केंद्र बनाए हैं, लेकिन यह केवल एक दिखावा मात्र लग रहा है, क्योंकि देहात के डिग्री कॉलेजों में नकल हो रही है। सूत्रों की मानें तो इसके बदले कॉलेज संचालक विद्यार्थियों से मुंह मांगे रुपये भी ले रहे हैं।
विज्ञापन
इधर, विश्वविद्यालय स्तर से सचल दल तो अभी तक बनाए ही नहीं गए हैं, परीक्षा केंद्रों में भी फेरबदल का सिलसिला जारी है। बागला डिग्री कॉलेज के प्राचार्य मेजर राजकमल दीक्षित ने बताया कि अभी तक विश्वविद्यालय स्तर से सचल दल के संबंध में कोई सूचना नहीं है। विश्वविद्यालय के निर्देश के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
विज्ञापन
डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की परीक्षा में माफिया की बल्ले-बल्ले हो रही है। परीक्षा की निगरानी के लिए अभी तक विश्वविद्यालय स्तर से कोई सचल दल नहीं बनाया गया है, जिसका माफिया फायदा उठाते हुए नकल के नाम पर विद्यार्थियों से सौदेबाजी कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय की परीक्षा एक मार्च को अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हुई। चार पेपर भी हो गए, लेकिन अभी तक न तो विश्वविद्यालय स्तर से सचल बनाए गए हैं और न ही नोडल स्तर से सचल बने हैं, जिसका माफिया किस्म के लोग फायदा उठाने में लगे हुए हैं।
विज्ञापन
कहने को तो विश्वविद्यालय ने एक-दूसरे के कॉलेज में परीक्षा केंद्र बनाए हैं, लेकिन यह केवल एक दिखावा मात्र लग रहा है, क्योंकि देहात के डिग्री कॉलेजों में नकल हो रही है। सूत्रों की मानें तो इसके बदले कॉलेज संचालक विद्यार्थियों से मुंह मांगे रुपये भी ले रहे हैं।
विज्ञापन
इधर, विश्वविद्यालय स्तर से सचल दल तो अभी तक बनाए ही नहीं गए हैं, परीक्षा केंद्रों में भी फेरबदल का सिलसिला जारी है। बागला डिग्री कॉलेज के प्राचार्य मेजर राजकमल दीक्षित ने बताया कि अभी तक विश्वविद्यालय स्तर से सचल दल के संबंध में कोई सूचना नहीं है। विश्वविद्यालय के निर्देश के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।