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जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट के माध्यम से उद्यमी जानेंगे अपने उत्पाद की रेटिंग
Updated Wed, 17 Oct 2018 12:09 AM IST
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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
हाथरस। जिले में एमएसएमई के तहत रजिस्टर्ड उद्योग अपने उत्पाद की रेटिंग का निर्धारण करा सकते हैं। इसके लिए शासन स्तर से वेबसाइट लांच कर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रेटिंग निर्धारण के बाद व्यापारी अपने कारोबार की गुणवत्ता की जानकारी ले सकेगा। वहीं अपने उत्पाद को रेटिंग मिलने के बाद देश में ही नहीं, अपितु विदेशों में भी उत्पाद की सप्लाई कर सकेगा।
इसके लिए अब वेबसाइट पर उद्यमियों की रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यहां जिले में एमएसएमई के तहत करीब 2,500 उद्योग रजिस्टर्ड है। इन उद्यमियों को अपने उत्पाद की रेटिंग जानने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने होंगे। जेड (जीरो डिफ्ेक्ट जीरो इफ्ेक्ट) द्वारा उत्पादों को रेटिंग दी जाएगी। शासन स्तर से मेक इन इंडिया के तहत जीरो डिफेक्ट जीरो-इफेक्ट के द्वारा अब एमएसएमई में रजिस्टर्ड उद्योगों को रेटिंग देने की व्यवस्था की गई है। यहां रजिस्ट्रेशन होने के बाद जेड की टीम मौके पर पहुंचेगी और उत्पाद की जांच करेगी।
इस जांच के बाद यह टीम उस उत्पाद की रेटिंग तय करेगी। टीम के द्वारा उत्पाद को ब्राउन, गोल्ड, डायमंड और प्लेटिनियम की कैटेगेरी दी जाएगी। इस कैटेगरी के निर्धारण के बाद उत्पादक अपने उत्पाद की गुणवत्ता की पहचान कर सकेगा। इस आधार पर वह अपने उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार के साथ विदेशों तक भी अपने उत्पाद को पहुंचा सकेगा। इनमें सबसे अच्छे उत्पाद को प्लेटिनियम की कैटेगरी दी जाएगी। वहीं प्लेटिनियम की कैटेगरी में आने पर उद्यमी को शासन की योजनाओं में प्राथमिकता के आधार पर लाभ दिया जाएगा।
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जेड के जरिए रजिस्ट्रेेशन कराकर उद्यमी अपने उत्पाद की रेटिंग तय कर सकेगा। वहीं इसके द्वारा अपने उत्पाद की गुणवत्ता की जानकारी भी ले लेगा। गुणवत्ता की पहचान होने पर देश में ही नहीं, विदेशों में भी अपने माल को बेच सकेगा।
-रितेश बंसल, सहायक महाप्रबंधक, डीआईसी
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हाथरस। जिले में एमएसएमई के तहत रजिस्टर्ड उद्योग अपने उत्पाद की रेटिंग का निर्धारण करा सकते हैं। इसके लिए शासन स्तर से वेबसाइट लांच कर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रेटिंग निर्धारण के बाद व्यापारी अपने कारोबार की गुणवत्ता की जानकारी ले सकेगा। वहीं अपने उत्पाद को रेटिंग मिलने के बाद देश में ही नहीं, अपितु विदेशों में भी उत्पाद की सप्लाई कर सकेगा।
इसके लिए अब वेबसाइट पर उद्यमियों की रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यहां जिले में एमएसएमई के तहत करीब 2,500 उद्योग रजिस्टर्ड है। इन उद्यमियों को अपने उत्पाद की रेटिंग जानने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने होंगे। जेड (जीरो डिफ्ेक्ट जीरो इफ्ेक्ट) द्वारा उत्पादों को रेटिंग दी जाएगी। शासन स्तर से मेक इन इंडिया के तहत जीरो डिफेक्ट जीरो-इफेक्ट के द्वारा अब एमएसएमई में रजिस्टर्ड उद्योगों को रेटिंग देने की व्यवस्था की गई है। यहां रजिस्ट्रेशन होने के बाद जेड की टीम मौके पर पहुंचेगी और उत्पाद की जांच करेगी।
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इस जांच के बाद यह टीम उस उत्पाद की रेटिंग तय करेगी। टीम के द्वारा उत्पाद को ब्राउन, गोल्ड, डायमंड और प्लेटिनियम की कैटेगेरी दी जाएगी। इस कैटेगरी के निर्धारण के बाद उत्पादक अपने उत्पाद की गुणवत्ता की पहचान कर सकेगा। इस आधार पर वह अपने उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार के साथ विदेशों तक भी अपने उत्पाद को पहुंचा सकेगा। इनमें सबसे अच्छे उत्पाद को प्लेटिनियम की कैटेगरी दी जाएगी। वहीं प्लेटिनियम की कैटेगरी में आने पर उद्यमी को शासन की योजनाओं में प्राथमिकता के आधार पर लाभ दिया जाएगा।
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जेड के जरिए रजिस्ट्रेेशन कराकर उद्यमी अपने उत्पाद की रेटिंग तय कर सकेगा। वहीं इसके द्वारा अपने उत्पाद की गुणवत्ता की जानकारी भी ले लेगा। गुणवत्ता की पहचान होने पर देश में ही नहीं, विदेशों में भी अपने माल को बेच सकेगा।
-रितेश बंसल, सहायक महाप्रबंधक, डीआईसी