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भाजपा में टिकट पाने के लिए घमासान अब आखिरी चरण में
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
भाजपा में टिकट पाने के लिए दावेदारों के बीच घमासान अब आखिरी चरण में चल रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी अगले एक-दो दिन में यहां से उम्मीदवार तय कर देगी। ज्यादातर दावेदार दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं तो कुछ आरएसएस के पदाधिकारियों के माध्यम से टिकट पाने की कोशिश कर रहे हैं। यहां भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की टकटकी इस पर लगी है कि पार्टी किसे टिकट देगी। विपक्षी भी यह जानने को बेहद उत्सुक हैं कि आखिर भाजपा इस बार सांसद के लिए किसे टिकट देगी।
हाथरस संसदीय क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां वर्ष 1991 से अब तक लगातार भाजपा या उसका गठबंधन ही जीतता रहा है। पिछले वर्ष 2014 के चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी राजेश दिवाकर ने 50 फीसदी से ज्यादा वोट पाकर विजय हासिल की थी। इस बार फिर वह टिकट के प्रबल दावेदार हैं। वहीं दूसरी ओर यहां करीब दो दर्जन और नेता टिकट मांग रहे हैं। पार्टी नेतृत्व अगले एक-दो दिन में यहां प्रत्याशी की घोषणा कर देगा। वर्तमान सांसद राजेश दिवाकर आरएसएस से जुड़े रहे हैं तो कुछ अन्य नेता भी संघ से जुड़े रहने का हवाला देकर टिकट मांग रहे हैं। वह पार्टी नेतृत्व को यह बता रहे हैं कि भाजपा सांसद की जनता के बीच छवि ठीक नहीं हैं और यदि उन्हें फिर से टिकट दिया तो पार्टी को नुकसान हो सकता है।
वहीं सांसद खेमा इसे नकार रहा है और पार्टी आलाकमान के सामने यह साबित कर रहा है कि सांसद ने क्षेत्र में काफी विकास कराए हैं और सांसद शुरू से संघ से जुड़े रहे हैं। हाथरस संसदीय क्षेत्र के भाजपा के ही कई जनप्रतिनिधियों के परिजनों से अलावा कई बाहरी प्रत्याशी भी यहां से टिकट मांग रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अलीगढ़ के एक बड़े राजनेता की भी यहां के प्रत्याशी का चयन करने में मुख्य भूमिका रहती है। ऐसे में कुछ दावेदार उस माध्यम से टिकट पाने की जुगत में है। फिलहाल अगले एक-दो दिन में प्रत्याशी तय हो जाएगा। आखिर प्रत्याशी कौन होगा। इस पर भाजपाइयों के अलावा विपक्षी दलों के नेताओं की भी टकटकी लगी है।
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भाजपा में टिकट पाने के लिए दावेदारों के बीच घमासान अब आखिरी चरण में चल रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी अगले एक-दो दिन में यहां से उम्मीदवार तय कर देगी। ज्यादातर दावेदार दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं तो कुछ आरएसएस के पदाधिकारियों के माध्यम से टिकट पाने की कोशिश कर रहे हैं। यहां भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की टकटकी इस पर लगी है कि पार्टी किसे टिकट देगी। विपक्षी भी यह जानने को बेहद उत्सुक हैं कि आखिर भाजपा इस बार सांसद के लिए किसे टिकट देगी।
हाथरस संसदीय क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां वर्ष 1991 से अब तक लगातार भाजपा या उसका गठबंधन ही जीतता रहा है। पिछले वर्ष 2014 के चुनाव में भी भाजपा प्रत्याशी राजेश दिवाकर ने 50 फीसदी से ज्यादा वोट पाकर विजय हासिल की थी। इस बार फिर वह टिकट के प्रबल दावेदार हैं। वहीं दूसरी ओर यहां करीब दो दर्जन और नेता टिकट मांग रहे हैं। पार्टी नेतृत्व अगले एक-दो दिन में यहां प्रत्याशी की घोषणा कर देगा। वर्तमान सांसद राजेश दिवाकर आरएसएस से जुड़े रहे हैं तो कुछ अन्य नेता भी संघ से जुड़े रहने का हवाला देकर टिकट मांग रहे हैं। वह पार्टी नेतृत्व को यह बता रहे हैं कि भाजपा सांसद की जनता के बीच छवि ठीक नहीं हैं और यदि उन्हें फिर से टिकट दिया तो पार्टी को नुकसान हो सकता है।
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वहीं सांसद खेमा इसे नकार रहा है और पार्टी आलाकमान के सामने यह साबित कर रहा है कि सांसद ने क्षेत्र में काफी विकास कराए हैं और सांसद शुरू से संघ से जुड़े रहे हैं। हाथरस संसदीय क्षेत्र के भाजपा के ही कई जनप्रतिनिधियों के परिजनों से अलावा कई बाहरी प्रत्याशी भी यहां से टिकट मांग रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अलीगढ़ के एक बड़े राजनेता की भी यहां के प्रत्याशी का चयन करने में मुख्य भूमिका रहती है। ऐसे में कुछ दावेदार उस माध्यम से टिकट पाने की जुगत में है। फिलहाल अगले एक-दो दिन में प्रत्याशी तय हो जाएगा। आखिर प्रत्याशी कौन होगा। इस पर भाजपाइयों के अलावा विपक्षी दलों के नेताओं की भी टकटकी लगी है।
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