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आलू किसानों को सता रहा पाले का डर
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
आलू की फसल में पिछले कई दिनों से पाले का असर दिखाई देने लगा है। इसे लेकर किसान काफी परेशान नजर आ रहे हैं। इसे लेकर किसान जिला कृषि रक्षा अधिकारी व कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ले रहे हैं।
आलू किसानों की कमर प्रकृति के प्रतिकूल होने से टूट गई है। कुछ ही दिनों पूर्व किसानों को शीतगृह में रखा पुराना आलू खरीदारों के अभाव में कूड़े में फेंकने को मजबूर होना पड़ा। वहीं अब खेतों में खड़ी आलू की फसल पर कोहरे व शीतलहर का प्रतिकूल असर पड़ा है।
इससे फसल में पाले का असर भी अब नजर आने लगा है। पाले से आलू की फसल को बचाने के लिए विभिन्न तरह के कीटनाशक व अन्य दवाइयों का आलू की फसल पर किसान छिड़काव कर रहे हैं।
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तापमान में गिरावट से आलू की फसल पर पाला के प्रकोप का संकट है। आलू की फसल को पिछैती झुलसा से बचाने के लिए जिनब 75 प्रतिशत, डब्लूपी 2 किलोग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 को प्रति हेक्टेअर की दर से 750 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। वहीं टमाटर, मिर्च और आम सहित अन्य बागवानी फसलों की सही ढंग से देखभाल और सिंचाई करें। ताकि फसल को रोग व कीटों के प्रकोप से बचाया जा सके।
- यतेंद्र सिंह, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
पौधों को पाले से बचाने के लिए किसान खेतों में नमी बनाए रखें। सिंचाई के बाद पौधों के ऊपर छप्पर अथवा पाली हाउस बनाकर पाला से बचाया जा सकता है। आलू में 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहें। इससे पाला व झुलसा रोग का प्रकोप नहीं होगा। सरसों में माहो रोग के नियंत्रण के लिए मैंकोजेब और कास्केमिठान का दो ग्राम एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
- डॉ.श्यौराज सिंह, कृषि वैज्ञानिक
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आलू की फसल में पिछले कई दिनों से पाले का असर दिखाई देने लगा है। इसे लेकर किसान काफी परेशान नजर आ रहे हैं। इसे लेकर किसान जिला कृषि रक्षा अधिकारी व कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ले रहे हैं।
आलू किसानों की कमर प्रकृति के प्रतिकूल होने से टूट गई है। कुछ ही दिनों पूर्व किसानों को शीतगृह में रखा पुराना आलू खरीदारों के अभाव में कूड़े में फेंकने को मजबूर होना पड़ा। वहीं अब खेतों में खड़ी आलू की फसल पर कोहरे व शीतलहर का प्रतिकूल असर पड़ा है।
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इससे फसल में पाले का असर भी अब नजर आने लगा है। पाले से आलू की फसल को बचाने के लिए विभिन्न तरह के कीटनाशक व अन्य दवाइयों का आलू की फसल पर किसान छिड़काव कर रहे हैं।
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तापमान में गिरावट से आलू की फसल पर पाला के प्रकोप का संकट है। आलू की फसल को पिछैती झुलसा से बचाने के लिए जिनब 75 प्रतिशत, डब्लूपी 2 किलोग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 को प्रति हेक्टेअर की दर से 750 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। वहीं टमाटर, मिर्च और आम सहित अन्य बागवानी फसलों की सही ढंग से देखभाल और सिंचाई करें। ताकि फसल को रोग व कीटों के प्रकोप से बचाया जा सके।
- यतेंद्र सिंह, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
पौधों को पाले से बचाने के लिए किसान खेतों में नमी बनाए रखें। सिंचाई के बाद पौधों के ऊपर छप्पर अथवा पाली हाउस बनाकर पाला से बचाया जा सकता है। आलू में 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहें। इससे पाला व झुलसा रोग का प्रकोप नहीं होगा। सरसों में माहो रोग के नियंत्रण के लिए मैंकोजेब और कास्केमिठान का दो ग्राम एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
- डॉ.श्यौराज सिंह, कृषि वैज्ञानिक