GST: 300 कारोबारी नहीं दाखिल कर पाए जीएसटी रिटर्न, अब भुगत रहे जुर्माना, एक माह का और मांग रहे समय
कारोबारियों और कर सलाहकारों ने शासन से मांग की है कि जीएसटीआर-9 और जीएसटीआर-9सी दाखिल करने की अंतिम तिथि को कम से कम एक माह और बढ़ाया जाए।
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निर्धारित तिथि तक जीएसटी का सालाना रिटर्न दाखिल न करने वाले जिले के 300 व्यापारियों पर प्रतिदिन 200 रुपये का जुर्माना लग रहा है। कर अधिवक्ताओं का कहना है कि आयकर विभाग की ओर से ऑडिट बैलेंस शीट जारी होने के बाद जीएसटी के रिटर्न के लिए केवल एक माह का ही समय दिया गया, जो कि अपर्याप्त है। इसे एक माह और बढ़ाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि जीएसटी के अंतर्गत दो करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए जीएसटीआर-9 और पांच करोड़ रुपये से अधिक सालाना टर्न ओवर वाले कारोबारियों के लिए जीएसटीआर-9 सी दाखिल करना अनिवार्य है।
कर अधिवक्ताओं का कहना है कि ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने, खातों का मिलान करने, चार्टर्ड अकाउंटेंट से सत्यापन कराने और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी करने में काफी समय लग जाता है। इसी कारण बड़ी संख्या में कारोबारी समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए हैं।
कारोबारियों और कर सलाहकारों ने शासन से मांग की है कि जीएसटीआर-9 और जीएसटीआर-9सी दाखिल करने की अंतिम तिथि को कम से कम एक माह और बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि यदि अतिरिक्त समय दिया जाता है तो अधिकतर कारोबारी बिना किसी जुर्माने के अपना रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए समय-सीमा में राहत दी जानी चाहिए। ऐसा न होने पर जुर्माने की वजह से व्यापारियों की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इसका असर जिले की व्यावसायिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है। सहायक आयुक्त प्रशासन मयंक जैन ने बताया कि रिटर्न दाखिल करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। अंतिम तिथि बढ़ाने का अधिकार हमारा नहीं है।
आयकर की ऑडिट बैलेंस शीट जारी करने की आखिरी तारीख एक माह पहले ही थी। जीएसटीआर-9 व 9 सी में इस बैलेंस शीट की आवश्यकता होती है। ऐसे में हमारे कई उद्यमियों का 9 व 9 सी रिटर्न दाखिल नहीं हो पाया है। इसमेंं कम से कम एक माह का और समय मिलना चाहिए, ताकि जुर्माने से कारोबारी बच जाएं।-अंकुर गोयल, कर अधिवक्ता।
जीएसटीआर-9 व 9 सी की अंतिम तिथि को बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही इसमें कुछ विसंगति हैं। इनमें भी सुधार होना चाहिए। दो करोड़ से नीचे वालों को स्वैच्छिक रूप से रिटर्न दाखिल करना होता है, उस पर नियमानुसार 50 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना है, जो कि 200 रुपये रोज का लगाया जा रहा है।-गिरीशचंद्र शर्मा, कर अधिवक्ता।