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41 विद्यालयों के नाम पर 24.92 करोड़ की बंदरबाट
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वीरेंद्र पाल सिंह ने मदरसों सहित जिले के 41 विद्यालयों में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के नाम पर धनराशि का बंदरबांट किया था। रिपोर्ट में जांच अधिकारी परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण ने बैंक कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध दर्शाई थी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के नेशनल खातों के स्टेटमेंट व भौतिक सत्यापन से यह बात सामने आई कि वर्ष 2012-13 में 41 विद्यालयों को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि दी गई। हैरानी की बात यह है कि जांच अधिकारियों को प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति वर्ष 2011-12 एवं 2012-13 के भुगतान की कोई भी पत्रावली अथवा अभिलेख कार्यालय अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी में नहीं मिले।
इन संस्थाओं को दी गई थी धनराशि
आलीशान तालीम घर सिकंदराराऊ, भूरी देवी जूहा खेम गांधी हाथरस, सेंट्रल पब्लिक स्कूल मोतीराय, हजरत ख्वाज गरीब नमाज मदरसा सिकंदराराऊ, जगन सिंह जूहा हाथरस, जनसेवा जूहा भुर्रका, जनता जूहा खेडा सुल्तानपुर, लालाराम हा माधुरी अगसौली, एमडीएम पब्लिक जूहा ढकपुरा, मदरसा अब्दुल हमीद स्लामियां एजूकेशन एकडेमी मौतीराय, मदरसा अब्दुल कलाम बरसला, मदरसा अल हिंद सईन एजूकेशन, मदरसा अल सबा एजूकेशन सिंकदराराऊ, मदरसा दादा हैदर शाह सिकंदराराऊ, मदरसा फजाने स्लाम, मदरसा हाजी गुलाम फारुक मेमोरियल एजूकेशन सिकंदराराऊ, मदरसा जामियां बरकातिया गरीब नमाज, मदरसा मौलाना एजूकेशन, मदरसा रफीक अबुल कलाम शशि, मदरसा रस खान सीतापुर, मदरसा रसखान, मदरसा तालीमुल स्लाम, मो. शहाब स्लामियां शिक्षण संस्थान, एनएसएलआर जूहा, नोवतराम अंबेडकर जूहा, प्रकाश बिहार पब्लिक जूहा उमरावपुर, आरएल जूहा, प्रकाश बिहार पब्लिक जूहा उमरावपुर, आरएल जूहा, रजिया बेगम स्लामियां मदरसा, श्रावस्ती जूहा मलाई स्माइलपुर, हरप्यारी देवी इंटर कॉलेज, गोविंद सिंह हाइस्कूल बाईपास, हर प्रसाद मान सिंह जूहा नांगला, पोखरन सिंह इंका भुर्रका, प्रार्थी सिंह स्मारक इंका, हरप्यारी देवी इंका, श्रीमती प्रभा यादव, स्वामी शिवानंद हा स्कूल कचौरा, टैगोर इंटर नेशनल, राजपाल सिंह कपसिया, हरप्यारी देवी कन्या रोहई।
डीएम ने गबन की पत्रावलियां की तलब, अन्य आरोपी पर भी जल्द कसेगा शिकंजा
अल्पसंख्यक विभाग में हुए घोटालों में अब कार्रवाई शुरू हो गई है। पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद जिले के शिक्षा माफियाओं में खलबली मच गई है। इस गिरफ्तारी की खबर से जिले भर के शिक्षा माफियों और इस छात्रवृत्ति के गबन में शामिल कॉलेज संचालकों के पसीने छूट गए हैं। इस गबन में शामिल अन्य आरोपियों पर भी जल्द ईओडब्ल्यू की टीम अपना शिकंजा कस सकती है। सोमवार को उक्त मामले को लेकर जिला प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने इस गबन से संबंधित सभी पत्रावलियों को तलब किया है।
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उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012-13 में जिले के अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में प्राप्त धनराशि के वितरण की जांच परियोजना निदेशक द्वारा की गइ थी। परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण द्वारा एनआईसी से प्राप्त विद्यालय बार डाटा वेस एवं एसबीआई हाथरस के छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के खाते की समीक्षा करने पर यह पाया कि तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वीरेंद्र पाल सिंह द्वारा भारत सरकार की प्री मेट्रिक स्कालरशिप प्राप्त करने के लिए विभिन्न संस्थाओं के नाम फर्जी व मनमाने तरीके से फीड कर धनराशि की मांग की गई थी। न ही संस्थाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में वीरेंद्र पाल सिंह को 24.92 करोड रुपये के दुरुपयोग का दोषी माना गया था। इस आधार पर कार्रवाई की संस्तुति तत्कालीन डीएम ने की थी। अब इस मामले में रविवार को ईओडब्ल्यू कानपुर की टीम ने पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वीरेंद्र पाल सिंह की गिरफ्तारी की है। इस गिरफ्तारी के बाद जिले भर के शिक्षा माफियाओं में खलबली मच गई है। इस मामले में फरार आरोपियों पर जल्द ही शिकंजा कसे जाने की तैयारी की जा रही है। वहीं मामले के उजागर होने के बाद डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने उक्त छात्रवृत्ति घोटाले संबंधी पत्रावलियों का तलब किया है। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारी को इन पत्रावलियों के बारीकी से अवलोकन करने के निर्देश दिए हैं।
अल्पसंख्यक विभाग से छात्रवृत्ति घोटाले संबंधी पत्रावली मांगी गई है। इन पत्रावलियों का अवलोकन किया जाएगा। - प्रवीण कुमार लक्षकार, डीएम
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पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वीरेंद्र पाल सिंह ने मदरसों सहित जिले के 41 विद्यालयों में छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के नाम पर धनराशि का बंदरबांट किया था। रिपोर्ट में जांच अधिकारी परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण ने बैंक कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध दर्शाई थी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के नेशनल खातों के स्टेटमेंट व भौतिक सत्यापन से यह बात सामने आई कि वर्ष 2012-13 में 41 विद्यालयों को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि दी गई। हैरानी की बात यह है कि जांच अधिकारियों को प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति वर्ष 2011-12 एवं 2012-13 के भुगतान की कोई भी पत्रावली अथवा अभिलेख कार्यालय अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी में नहीं मिले।
इन संस्थाओं को दी गई थी धनराशि
आलीशान तालीम घर सिकंदराराऊ, भूरी देवी जूहा खेम गांधी हाथरस, सेंट्रल पब्लिक स्कूल मोतीराय, हजरत ख्वाज गरीब नमाज मदरसा सिकंदराराऊ, जगन सिंह जूहा हाथरस, जनसेवा जूहा भुर्रका, जनता जूहा खेडा सुल्तानपुर, लालाराम हा माधुरी अगसौली, एमडीएम पब्लिक जूहा ढकपुरा, मदरसा अब्दुल हमीद स्लामियां एजूकेशन एकडेमी मौतीराय, मदरसा अब्दुल कलाम बरसला, मदरसा अल हिंद सईन एजूकेशन, मदरसा अल सबा एजूकेशन सिंकदराराऊ, मदरसा दादा हैदर शाह सिकंदराराऊ, मदरसा फजाने स्लाम, मदरसा हाजी गुलाम फारुक मेमोरियल एजूकेशन सिकंदराराऊ, मदरसा जामियां बरकातिया गरीब नमाज, मदरसा मौलाना एजूकेशन, मदरसा रफीक अबुल कलाम शशि, मदरसा रस खान सीतापुर, मदरसा रसखान, मदरसा तालीमुल स्लाम, मो. शहाब स्लामियां शिक्षण संस्थान, एनएसएलआर जूहा, नोवतराम अंबेडकर जूहा, प्रकाश बिहार पब्लिक जूहा उमरावपुर, आरएल जूहा, प्रकाश बिहार पब्लिक जूहा उमरावपुर, आरएल जूहा, रजिया बेगम स्लामियां मदरसा, श्रावस्ती जूहा मलाई स्माइलपुर, हरप्यारी देवी इंटर कॉलेज, गोविंद सिंह हाइस्कूल बाईपास, हर प्रसाद मान सिंह जूहा नांगला, पोखरन सिंह इंका भुर्रका, प्रार्थी सिंह स्मारक इंका, हरप्यारी देवी इंका, श्रीमती प्रभा यादव, स्वामी शिवानंद हा स्कूल कचौरा, टैगोर इंटर नेशनल, राजपाल सिंह कपसिया, हरप्यारी देवी कन्या रोहई।
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डीएम ने गबन की पत्रावलियां की तलब, अन्य आरोपी पर भी जल्द कसेगा शिकंजा
अल्पसंख्यक विभाग में हुए घोटालों में अब कार्रवाई शुरू हो गई है। पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद जिले के शिक्षा माफियाओं में खलबली मच गई है। इस गिरफ्तारी की खबर से जिले भर के शिक्षा माफियों और इस छात्रवृत्ति के गबन में शामिल कॉलेज संचालकों के पसीने छूट गए हैं। इस गबन में शामिल अन्य आरोपियों पर भी जल्द ईओडब्ल्यू की टीम अपना शिकंजा कस सकती है। सोमवार को उक्त मामले को लेकर जिला प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने इस गबन से संबंधित सभी पत्रावलियों को तलब किया है।
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उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012-13 में जिले के अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति में प्राप्त धनराशि के वितरण की जांच परियोजना निदेशक द्वारा की गइ थी। परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण द्वारा एनआईसी से प्राप्त विद्यालय बार डाटा वेस एवं एसबीआई हाथरस के छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के खाते की समीक्षा करने पर यह पाया कि तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वीरेंद्र पाल सिंह द्वारा भारत सरकार की प्री मेट्रिक स्कालरशिप प्राप्त करने के लिए विभिन्न संस्थाओं के नाम फर्जी व मनमाने तरीके से फीड कर धनराशि की मांग की गई थी। न ही संस्थाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में वीरेंद्र पाल सिंह को 24.92 करोड रुपये के दुरुपयोग का दोषी माना गया था। इस आधार पर कार्रवाई की संस्तुति तत्कालीन डीएम ने की थी। अब इस मामले में रविवार को ईओडब्ल्यू कानपुर की टीम ने पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वीरेंद्र पाल सिंह की गिरफ्तारी की है। इस गिरफ्तारी के बाद जिले भर के शिक्षा माफियाओं में खलबली मच गई है। इस मामले में फरार आरोपियों पर जल्द ही शिकंजा कसे जाने की तैयारी की जा रही है। वहीं मामले के उजागर होने के बाद डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार ने उक्त छात्रवृत्ति घोटाले संबंधी पत्रावलियों का तलब किया है। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारी को इन पत्रावलियों के बारीकी से अवलोकन करने के निर्देश दिए हैं।
अल्पसंख्यक विभाग से छात्रवृत्ति घोटाले संबंधी पत्रावली मांगी गई है। इन पत्रावलियों का अवलोकन किया जाएगा। - प्रवीण कुमार लक्षकार, डीएम