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सांसद ने संसद में की राजा महेंद्र प्रताप को भारत रत्न देने की मांग
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। सांसद राजेश कुमार दिवाकर ने लोकसभा सत्र के दौरान राजा महेंद्र प्रताप को भारत रत्न दिए जाने की मांग की है। सांसद ने मुरसान रेलवे स्टेशन का नाम राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर रखने के साथ हाथरस कलेक्ट्रेट परिसर में उनकी मूर्ति लगवाने की भी मांग की है।
सांसद ने कहा कि हाथरस के राजा महेंद्र प्रताप सिंह जो कि एक सच्चे देश भक्त, क्रांतिकारी, पत्रकार और समाज सुधारक थे। उन्होंने 29 अक्तूबर 1914 को अफगानिस्तान में अस्थायी आजाद हिंद सरकार का गठन किया। अस्थायी सरकार के वह स्वयं राष्ट्रपति थे।
उन्होंने अपनी आर्य परंपरा का निर्वाह करते हुए 32 वर्ष तक देश के बाहर रहकर अंग्रेज सरकार को न केवल तरह-तरह से ललकारा, बल्कि अफगानिस्तान में बनाई अपनी आजाद हिंद फौज’ द्वारा कबाईली इलाकों पर हमला करके कई इलाके अंग्रेजों से छीनकर अपने अधिकार में ले लिए थे।
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उन्होंने कहा है कि मेरे संसदीय क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर ऐसे राष्ट्रवादी वीर सपूत को भारत रत्न से विभूषित करना चाहिए। कलेक्ट्रेट परिसर में उनकी विशाल मूर्ति स्थापित की जाए, ताकि उनके बलिदान और यादों को वर्षों तक याद किया जा सके।
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हाथरस। सांसद राजेश कुमार दिवाकर ने लोकसभा सत्र के दौरान राजा महेंद्र प्रताप को भारत रत्न दिए जाने की मांग की है। सांसद ने मुरसान रेलवे स्टेशन का नाम राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर रखने के साथ हाथरस कलेक्ट्रेट परिसर में उनकी मूर्ति लगवाने की भी मांग की है।
सांसद ने कहा कि हाथरस के राजा महेंद्र प्रताप सिंह जो कि एक सच्चे देश भक्त, क्रांतिकारी, पत्रकार और समाज सुधारक थे। उन्होंने 29 अक्तूबर 1914 को अफगानिस्तान में अस्थायी आजाद हिंद सरकार का गठन किया। अस्थायी सरकार के वह स्वयं राष्ट्रपति थे।
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उन्होंने अपनी आर्य परंपरा का निर्वाह करते हुए 32 वर्ष तक देश के बाहर रहकर अंग्रेज सरकार को न केवल तरह-तरह से ललकारा, बल्कि अफगानिस्तान में बनाई अपनी आजाद हिंद फौज’ द्वारा कबाईली इलाकों पर हमला करके कई इलाके अंग्रेजों से छीनकर अपने अधिकार में ले लिए थे।
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उन्होंने कहा है कि मेरे संसदीय क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर ऐसे राष्ट्रवादी वीर सपूत को भारत रत्न से विभूषित करना चाहिए। कलेक्ट्रेट परिसर में उनकी विशाल मूर्ति स्थापित की जाए, ताकि उनके बलिदान और यादों को वर्षों तक याद किया जा सके।