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रोडवेज बसस्टैंड पर दो माह से नहीं बन रहे स्मार्ट कार्ड व एमस्टी, यात्री झेल रहे दिक्कतें
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
रोडवेज बस में हर रोज सफर करने वाले यात्री एमएसटी और स्मार्ट कार्ड की समस्या से जूझ रहे हैं, क्योंकि दो माह से कार्ड और एमएसटी बनाने पर मुख्यालय से ही रोक लगी हुई है। इस कारण यात्रियों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। नकद में टिकट लेने पर यात्रियों के साथ परिचालक खुले पैसे का खेल खेल रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में यात्रियों की सुविधा के लिए मल्टी पर्पज स्मार्ट कार्ड योजना को शुरू किया था। यह कार्ड 50 रुपये के पंजीकरण शुल्क पर यात्रियों को मुहैया कराया गया था। धीरे-धीरे स्मार्ट कार्ड इस्तेमाल करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ी। इन कार्ड को रिचार्ज करने के लिए बस स्टैंड पर काउंटर भी खोला गया। स्मार्ट कार्ड से सफर करने वाले यात्रियों को दस से बीस प्रतिशत की छूट प्रदान की गई। इन दिनों बस स्टैंड पर स्मार्ट कार्ड और एमएसटी नहीं बन रही हैं। इस कारण यात्री बस स्टैंड से बैरंग लौट रहे हैं।
कैश में टिकट देने में हो रहा खेल
रोडवेज बसों में स्मार्ट कार्ड से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से चेकिंग दस्तों को बसों में बेटिकट यात्री मिलना कम हो गए थे। स्मार्ट कार्ड बनाना बंद होने से यात्रियों को कैश में टिकट लेना पड़ रहा है। खुले पैसे के नाम परिचालक खेल खेल रहे हैं। इस मामले में हाथरस डिपो एआरएम शशी रानी का कहना है कि स्मार्ट कार्ड व एमएसटी बनना कुछ समय से मुख्यालय से ही बनना बंद हो गए हैं। कोई परिचालक टिकट देने के बाद पैसे नहीं दे रहा है तो यात्री शिकायत करें। पैसा लेना यात्री की भी जिम्मेदारी है।
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रोडवेज बस में हर रोज सफर करने वाले यात्री एमएसटी और स्मार्ट कार्ड की समस्या से जूझ रहे हैं, क्योंकि दो माह से कार्ड और एमएसटी बनाने पर मुख्यालय से ही रोक लगी हुई है। इस कारण यात्रियों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। नकद में टिकट लेने पर यात्रियों के साथ परिचालक खुले पैसे का खेल खेल रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में यात्रियों की सुविधा के लिए मल्टी पर्पज स्मार्ट कार्ड योजना को शुरू किया था। यह कार्ड 50 रुपये के पंजीकरण शुल्क पर यात्रियों को मुहैया कराया गया था। धीरे-धीरे स्मार्ट कार्ड इस्तेमाल करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ी। इन कार्ड को रिचार्ज करने के लिए बस स्टैंड पर काउंटर भी खोला गया। स्मार्ट कार्ड से सफर करने वाले यात्रियों को दस से बीस प्रतिशत की छूट प्रदान की गई। इन दिनों बस स्टैंड पर स्मार्ट कार्ड और एमएसटी नहीं बन रही हैं। इस कारण यात्री बस स्टैंड से बैरंग लौट रहे हैं।
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कैश में टिकट देने में हो रहा खेल
रोडवेज बसों में स्मार्ट कार्ड से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से चेकिंग दस्तों को बसों में बेटिकट यात्री मिलना कम हो गए थे। स्मार्ट कार्ड बनाना बंद होने से यात्रियों को कैश में टिकट लेना पड़ रहा है। खुले पैसे के नाम परिचालक खेल खेल रहे हैं। इस मामले में हाथरस डिपो एआरएम शशी रानी का कहना है कि स्मार्ट कार्ड व एमएसटी बनना कुछ समय से मुख्यालय से ही बनना बंद हो गए हैं। कोई परिचालक टिकट देने के बाद पैसे नहीं दे रहा है तो यात्री शिकायत करें। पैसा लेना यात्री की भी जिम्मेदारी है।
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