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धूं धूं कर जला बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रावण
Updated Fri, 19 Oct 2018 11:56 PM IST
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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
हाथरस। जनपद भर में उत्साहपूर्वक विजय दशमी पर्व मनाया गया। प्रतीकात्मक रावण जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया गया। भगवान राम की जय जयकार की गई। देर शाम पॉलीटेक्निक मैदान में रावण दहन हुआ। वहां इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। देहात से भी लोग रावण दहन देखने के लिए पहुंचे।
करीब 15 दिन की मेहनत के बाद दशानन का 85 फीट ऊंचा, दस सिर वाला पुतला तैयार किया गया था। शाम को पुतले को पॉलीटेक्निक मैदान में खड़ा कर दिया गया। दिनभर दूर दराज से लोग आकर चांट पकौड़ी का आनंद लेने में व्यस्त दिखाई दिए। रावण दहन होने से पहले पॉलीटेक्निक मैदान भीड़ से भर चुका था। रात साढ़े आठ बजे भगवान श्री राम, लक्ष्मण के स्वरूप मैदान पहुंच गए। यहां काफी देर युद्ध का मंचन किया गया।
इसके बाद विभीषण के कहने पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने रावण की नाभि को निशाना बनाते हुए अग्निबाण छोड़ दिया। कुछ ही देर में अंहकारी रावण धू धू कर जलने लगा। दूर दूर तक आग की लपटें पहुंचने लगी। रंगीन आतिशबाजी और पटाखों की तेज आवाज दूर दूर सुनाई दे रही थी। लोग भगवान राम की जय जयकार कर रहे थे। लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मना रहे थे। दूर से लोग रावण दहन का नजारा देख रहे थे।
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कुछ देर बाद ही रावण का पुतला धराशायी हो गया। आग की लपटें शांत हुई तो मौजूद लोग रावण के पुतले के अस्थि पंजर (बांस) निकाल कर ले जाने लगे। इस दौरान पुलिस ने लाठियां फटकारी रावण दहन के बाद लोग बहुत खुश थे। रावण वध के बाद भगवान राम और जानकी जी का मिलन हुआ। शुक्रवार की देर शाम तक बड़ी संख्या में लोग पॉलीटेक्निक मैदान में जमे रहे। भीड़ भाड़ के मद्देनजर हाथरस आगरा मार्ग से यातायात को डायवर्ट कर दिया गया। सुरक्षा के चलते बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मैदान व आसपास तैनात रहा।
हाथरस। जनपद भर में उत्साहपूर्वक विजय दशमी पर्व मनाया गया। प्रतीकात्मक रावण जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया गया। भगवान राम की जय जयकार की गई। देर शाम पॉलीटेक्निक मैदान में रावण दहन हुआ। वहां इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। देहात से भी लोग रावण दहन देखने के लिए पहुंचे।
करीब 15 दिन की मेहनत के बाद दशानन का 85 फीट ऊंचा, दस सिर वाला पुतला तैयार किया गया था। शाम को पुतले को पॉलीटेक्निक मैदान में खड़ा कर दिया गया। दिनभर दूर दराज से लोग आकर चांट पकौड़ी का आनंद लेने में व्यस्त दिखाई दिए। रावण दहन होने से पहले पॉलीटेक्निक मैदान भीड़ से भर चुका था। रात साढ़े आठ बजे भगवान श्री राम, लक्ष्मण के स्वरूप मैदान पहुंच गए। यहां काफी देर युद्ध का मंचन किया गया।
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इसके बाद विभीषण के कहने पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने रावण की नाभि को निशाना बनाते हुए अग्निबाण छोड़ दिया। कुछ ही देर में अंहकारी रावण धू धू कर जलने लगा। दूर दूर तक आग की लपटें पहुंचने लगी। रंगीन आतिशबाजी और पटाखों की तेज आवाज दूर दूर सुनाई दे रही थी। लोग भगवान राम की जय जयकार कर रहे थे। लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मना रहे थे। दूर से लोग रावण दहन का नजारा देख रहे थे।
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कुछ देर बाद ही रावण का पुतला धराशायी हो गया। आग की लपटें शांत हुई तो मौजूद लोग रावण के पुतले के अस्थि पंजर (बांस) निकाल कर ले जाने लगे। इस दौरान पुलिस ने लाठियां फटकारी रावण दहन के बाद लोग बहुत खुश थे। रावण वध के बाद भगवान राम और जानकी जी का मिलन हुआ। शुक्रवार की देर शाम तक बड़ी संख्या में लोग पॉलीटेक्निक मैदान में जमे रहे। भीड़ भाड़ के मद्देनजर हाथरस आगरा मार्ग से यातायात को डायवर्ट कर दिया गया। सुरक्षा के चलते बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मैदान व आसपास तैनात रहा।