जानलेवा हमले में 10 साल कैद
अब न्यायालय में हाजिर होने पर तीसरे अभियुक्त को भी 10 साल की कैद एवं 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर अभियुक्त को पांच महीने का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोतवाली सादाबाद पुलिस को विलियम सिंह ग्राम सरौठ ने एक तहरीर दी। इसमें आरोप था कि 22 जुलाई 2014 को सुबह बजे उसका भाई बंटी उर्फ सूरज प्रताप अपने घर से खेत पर जाने के लिए निकला।
तभी रास्ते में घर से बाहर निकलते ही गुड्डू उर्फ हेमराज और श्यामसुंदर पुत्रगण बच्चू सिंह एवं दीपू पुत्र हेमराज ने गाली-गलौज देते हुए उसे रोक लिया। उसके भाई ने गाली देने से मना किया तो गुड्डू और दीपू ने अपने तमंचे से गोली मारना शुरू कर दिया।
उसके भाई के एक गोली बाजू में और दूसरी पेट में लगी। गोली की आवाज सुनकर गांव के बहुत से लोग आ गए और उन्होंने उसके भाई को बचाया। यह लोग मौके से भागते समय भविष्य में परिवार सहित जान से मारने की धमकी देते हुए चले गए।
यह दबंग और गुंडे किस्म के लोग हैं। न्यायालय ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुनने के बाद न्यायालय में उपस्थित हुए गुड्डू उर्फ हेमराज और दीपू उर्फ दिगपाल को जानलेवा हमले के आरोप में दो दिन पूर्व ही सजा सुना दी थी, लेकिन तीसरे अभियुक्त श्यामसुंदर के अनुपस्थित रहने पर धारा 82-83 की कार्रवाई करने के पुलिस को आदेश दिए थे।
इसके बाद श्यामसुंदर भी न्यायालय में प्रस्तुत हुआ। उसके भी न्यायालय ने सजा के बिंदु पर सुनवाई की। इसे धारा 307 में 10 वर्ष का कारावास और 20 हजार अर्थदंड एवं धारा 25 आयुध अधिनियम में भी तीन वर्ष के कारावास और तीन हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। वादी की ओर से पैरवी एडीजीसी राजेंद्र वार्ष्णेय ने की।
वहीं अपर सत्र न्यायाधीश पंचम एवं गैंगस्टर एक्ट सुरेंद्र मोहन सहाय के न्यायालय ने संगठित गिरोह चलाकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के एक अभियुक्त को दोषी माना है। न्यायालय ने उसे दो वर्ष छह माह के कारावास एवं पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त कारावास भी भोगना होगा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक थाना हसायन पुलिस ने आरोपी जयराम निवासी बरसौली हसायन के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के मामले में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया, जिसमें हाथरस और अन्य जनपदों में जयराम पर गिरोह चलाकर आर्थिक लाभ उठाने के लिए लूट और चोरी आदि की घटनाओं को अंजाम देने का आरोप था।
आरोप पत्र में उसे गिरोह का सरगना बताया और उसके दो अन्य साथी विपिन और श्रीनिवास के होने की भी पुष्टि की। पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ हसायन थाने के अलावा जिला आगरा में भी की गई आपराधिक घटनाओं को भी गैंगस्टर चार्ट में शामिल किया। अभियुक्त ने न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान गवाहों की गवाही के साथ खुद भी अपना जुर्म स्वीकार किया, जिससे उसकी पत्रावली शेष अभियुक्तों से अलग कर दी गई, जिसमें न्यायालय ने सजा का फैसला सुनाया।