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Hardoi News: झोलाछाप के इलाज से युवक की मौत, सदमे में पिता ने भी तोड़ा दम
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरपालपुर। क्षेत्र में परचून की दुकान की तरह धड़ल्ले से झोलाछाप लोगों का इलाज कर रहे हैं। इनके इलाज से न जाने कितनी ही मौतें हो चुकीं हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुछ दिन अभियान चलाकर बैठ जाते हैं। ऐसे में आए दिन झोलाछाप के चक्कर में पड़कर लोग जान गंवा रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में बुधवार को कोतवाली क्षेत्र के अजतूपुर गांव निवासी युवक की झोलाछाप के इलाज से मौत हो गई। जवान बेटे की मौत का सदमा पिता बर्दाश्त नहीं कर सका। कुछ देर बाद उनकी भी मौत हो गई।
थाना क्षेत्र के अजतूपुर निवासी किशुनपाल खेती करता था। उसका पुत्र अतुल (20) पिछले कुछ दिनों से बीमार था। मंगलवार रात अचानक उसके पेट में तेज दर्द होने लगा। इस पर वह खसौरा गांव में एक झोलाछाप के पास दवा लेने चला गया। परिजनों के मुताबिक झोलाछाप ने अतुल के इंजेक्शन लगा दिया। इसके बाद अतुल की हालत बिगड़ गई। परिजन उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरपालपुर गए। जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बेटे की मौत की खबर सुनते ही पिता किशुनपाल (50) की हालत भी बिगड़ गई। सदमे के कारण कुछ देर बाद उसकी भी मौत हो गई। थोड़ी ही देर के अंतराल में पिता पुत्र की मौत हो जाने से न सिर्फ परिजनों में कोहराम मच गया, बल्कि ग्रामीण भी सकते में आ गए। बुधवार काे एक ही घर से पिता-पुत्र की अर्थी निकली। पुलिस को सूचना दिए बिना ही दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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इनसेट
झोलाछाप पर लगाए गंभीर आरोप
अतुल की मां सुषमा ने बताया कि पेट दर्द होने पर झोलाछाप ने अतुल को इंजेक्शन लगाया था और ड्रिप भी लगाई थी। इसके बाद अतुल का शरीर अकड़ने लगा था। परिजन उसे सीएचसी ले गए, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। सीएचसी के डाक्टर असामुद्दीन ने बताया कि जब अतुल को सीएचसी लाया गया, तो उसका शरीर पूरी तरह अकड़ा हुआ था। उपचार करने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी।
इनसेट
परचून की दुकान की तरह चल रहे नर्सिंग होम
कटरी के इलाके में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। परचून की दुकानों की तरह मेडिकल स्टोर, पैथाेलाॅजी, अल्ट्रासाउंड और झोलाछाप की दुकानें चल रही हैं। बिना लाइसेंस के ही प्राइवेट नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। झोलाछाप के इलाज से पहले भी कई मौतें हो चुकी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे है।
इनसेट
अभी कार्ड बनाने में व्यस्त, जब समय मिलेगा तब जांच करेंगे
झोलाछाप की दुकानें और अवैध मेडिकल स्टोर, पैथाेलॉजी को लेकर सीएचसी अधीक्षक बेहद लापरवाह हैं। जब उनसे झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पूछा गया, तो सीएचसी अधीक्षक डाॅ. आनंद पांडेय ने बताया कि आयुष्मान भव: योजना के तहत आयुष्मान कार्ड बनाने का कार्य चल रहा है। जब समय मिलेगा, तब गैर पंजीकृत अस्पतालों, मेडिकल स्टोर की सूची तैयार कर छापा डलवाएंगे।
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हरपालपुर। क्षेत्र में परचून की दुकान की तरह धड़ल्ले से झोलाछाप लोगों का इलाज कर रहे हैं। इनके इलाज से न जाने कितनी ही मौतें हो चुकीं हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुछ दिन अभियान चलाकर बैठ जाते हैं। ऐसे में आए दिन झोलाछाप के चक्कर में पड़कर लोग जान गंवा रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में बुधवार को कोतवाली क्षेत्र के अजतूपुर गांव निवासी युवक की झोलाछाप के इलाज से मौत हो गई। जवान बेटे की मौत का सदमा पिता बर्दाश्त नहीं कर सका। कुछ देर बाद उनकी भी मौत हो गई।
थाना क्षेत्र के अजतूपुर निवासी किशुनपाल खेती करता था। उसका पुत्र अतुल (20) पिछले कुछ दिनों से बीमार था। मंगलवार रात अचानक उसके पेट में तेज दर्द होने लगा। इस पर वह खसौरा गांव में एक झोलाछाप के पास दवा लेने चला गया। परिजनों के मुताबिक झोलाछाप ने अतुल के इंजेक्शन लगा दिया। इसके बाद अतुल की हालत बिगड़ गई। परिजन उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरपालपुर गए। जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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बेटे की मौत की खबर सुनते ही पिता किशुनपाल (50) की हालत भी बिगड़ गई। सदमे के कारण कुछ देर बाद उसकी भी मौत हो गई। थोड़ी ही देर के अंतराल में पिता पुत्र की मौत हो जाने से न सिर्फ परिजनों में कोहराम मच गया, बल्कि ग्रामीण भी सकते में आ गए। बुधवार काे एक ही घर से पिता-पुत्र की अर्थी निकली। पुलिस को सूचना दिए बिना ही दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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झोलाछाप पर लगाए गंभीर आरोप
अतुल की मां सुषमा ने बताया कि पेट दर्द होने पर झोलाछाप ने अतुल को इंजेक्शन लगाया था और ड्रिप भी लगाई थी। इसके बाद अतुल का शरीर अकड़ने लगा था। परिजन उसे सीएचसी ले गए, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। सीएचसी के डाक्टर असामुद्दीन ने बताया कि जब अतुल को सीएचसी लाया गया, तो उसका शरीर पूरी तरह अकड़ा हुआ था। उपचार करने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी।
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परचून की दुकान की तरह चल रहे नर्सिंग होम
कटरी के इलाके में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। परचून की दुकानों की तरह मेडिकल स्टोर, पैथाेलाॅजी, अल्ट्रासाउंड और झोलाछाप की दुकानें चल रही हैं। बिना लाइसेंस के ही प्राइवेट नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। झोलाछाप के इलाज से पहले भी कई मौतें हो चुकी हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे है।
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अभी कार्ड बनाने में व्यस्त, जब समय मिलेगा तब जांच करेंगे
झोलाछाप की दुकानें और अवैध मेडिकल स्टोर, पैथाेलॉजी को लेकर सीएचसी अधीक्षक बेहद लापरवाह हैं। जब उनसे झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पूछा गया, तो सीएचसी अधीक्षक डाॅ. आनंद पांडेय ने बताया कि आयुष्मान भव: योजना के तहत आयुष्मान कार्ड बनाने का कार्य चल रहा है। जब समय मिलेगा, तब गैर पंजीकृत अस्पतालों, मेडिकल स्टोर की सूची तैयार कर छापा डलवाएंगे।