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खेती लायक नहीं रह गई जिले की मिट्टी

Wed, 24 Aug 2016 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई Updated Wed, 24 Aug 2016 12:05 AM IST
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You can not cultivate the soil of the district
किसान परेशान

जिले के खेतों की मिट्टी बेहतर खेती के लायक नहीं रह गई है। अगर किसान नहीं चेते तो खेत बंजर हो जाएंगे। सभी ब्लॉकों की मिट्टी की जांच में नाइट्रोजन की भारी कमी पाई गई है। इस कमी को केवल गोबर खाद और हरी खाद से ही दूर किया जा सकता है।

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कृषि विभाग की ओर से जिले के सभी 19 ब्लाक क्षेत्रों के अलग-अलग किसानों के खेतों की मिट्टी के 26322 नमूनों के परीक्षण में नाइट्रोजन की मात्रा कम पाई गई। उच्च स्तर और मध्यम स्तर माटी की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है मगर कहीं भी नाइट्रोजन का यह स्तर नहीं पाया गया। कहीं नाइट्रोजन का स्तर न्यून (लो) तो कहीं अति न्यून पाया (वेरी लो) पाया गया। जो कि चिंता का विषय है। विभागीय जानकारों का मानना है कि नाइट्रोजन के घटते स्तर से खेताें की मिट्टी बीमार हो गई है। इसके उपचार के लिए किसानों को जैविक खादों एवं हरी खाद, गोबर खाद के प्रयोग को अमल में लाना चाहिए।
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कई ब्लाक क्षेत्रों में हालात ज्यादा बिगड़े
कोथावां, भरावन,  संडीला, भरखनी, अहिरोरी व सुरसा ब्लाक क्षेत्र में हालात ज्यादा बिगड़ गए हैं। इन क्षेत्रों के खेतों की मिट्टी में नाइट्रोजन का स्तर वेरी लो यानि अति न्यून स्तर पर पहुंच गया है। जिसके चलते उत्पादकता पर विपरीत असर पड़ रहा है। कृषि विभाग के मृदा परीक्षणशाला प्रभारी विक्रम सिंह ने बताया कि खेत में नाइट्रोजन, फासफोरस व पोटाश की बराबर मात्रा होनी चाहिए। इसमें नाइट्रोजन सबसे महत्वपूर्ण है। इन तत्वों की कमी होने पर मिट्टी अनुपजाऊ हो जाती है।
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गड्ढे की गोबर खाद ही बेहतर
लैब प्रभारी विक्रम सिंह ने बताया कि गड्ढे में गोबर डालकर बनाई गई खाद ही खेत के लिए बेहतर होती है। मैदान में पड़े घूरे से बारिश होने पर गोबर से उपजाऊ तत्व बह जाते हैं। इससे वह खाद उपजाऊ नहीं रह जाती। इसके अलावा नाइट्रोजन की कमी ढैंचा, सनई से बनी हरी खाद से भी पूरी की जा सकती है। वर्मी कंपोस्ट खाद भी बेहतर विकल्प है।
 

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