{"_id":"693eeef20243d8e5410bdec9","slug":"yash-enhanced-the-prestige-of-the-region-by-becoming-a-lieutenant-in-the-army-hardoi-news-c-213-1-hra1004-141846-2025-12-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: सेना में लेफ्टिनेंट बनकर यश ने बढ़ाया क्षेत्र का मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: सेना में लेफ्टिनेंट बनकर यश ने बढ़ाया क्षेत्र का मान
विज्ञापन
भरावन। अतरौली क्षेत्र के ग्राम भोगीपुर निवासी एक नौजवान के सेना में लेफ्टिनेंट बनकर क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया। छावन डाकघर में पोस्टमास्टर पद पर कार्यरत पिता भी अपने बेटे की सफलता पर फूले नहीं समा रहे हैं। रविवार को ट्रेनिंग पूरी कर लौटे रंगरूट का जोरदार स्वागत किया गया।
क्षेत्र के गांव भोगीपुर निवासी आदित्य शुक्ला छावन डाकघर में पोस्टमास्टर पद पर तैनात हैं। उनका बेटा यश शुक्ला का चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद पर हो गया है। पोस्टमास्टर पिता ने बताया कि उनका बेटा काफी समय से तैयारी कर रहा था। प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद उसका चयन इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून में हो गया। वहीं से ही उसकी लेफ्टिनेंट की ट्रेनिंग हुई है। ट्रेनिंग पूरी करके वह रविवार को घर लौटा है। बताया कि बेटे के लेफ्टिनेंट बनने से घर में खुशी का माहौल है।
गांव और आसपास के लोग भी उन्हें बधाई देने पहुंच रहे हैं। मां सुनीता शुक्ला का कहना है कि मातृभूमि की सेवा में जाकर बेटे गौरव बढ़ाया है। यश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने बाबा दयाशंकर शुक्ला और शिक्षक मामा शितांशू पांडेय को दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
क्षेत्र के गांव भोगीपुर निवासी आदित्य शुक्ला छावन डाकघर में पोस्टमास्टर पद पर तैनात हैं। उनका बेटा यश शुक्ला का चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद पर हो गया है। पोस्टमास्टर पिता ने बताया कि उनका बेटा काफी समय से तैयारी कर रहा था। प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद उसका चयन इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून में हो गया। वहीं से ही उसकी लेफ्टिनेंट की ट्रेनिंग हुई है। ट्रेनिंग पूरी करके वह रविवार को घर लौटा है। बताया कि बेटे के लेफ्टिनेंट बनने से घर में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन
गांव और आसपास के लोग भी उन्हें बधाई देने पहुंच रहे हैं। मां सुनीता शुक्ला का कहना है कि मातृभूमि की सेवा में जाकर बेटे गौरव बढ़ाया है। यश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने बाबा दयाशंकर शुक्ला और शिक्षक मामा शितांशू पांडेय को दिया है।
विज्ञापन