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Hardoi News: चार दिन से मेडिकल कॉलेज में नहीं हो रहे एक्सरे, मरीजों की बढ़ी परेशानी
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज में एक्सरे की सुविधा लगातार चौथे दिन भी बहाल नहीं हो सकी। एक्सरे मशीन खराब होने के कारण ओपीडी में आने वाले मरीजों को जांच के लिए परेशान होना पड़ रहा है। डॉक्टर की सलाह पर एक्सरे कराने पहुंचे मरीजों को मजबूरन निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार और जांच के लिए पहुंचते हैं। इनमें हादसों में घायल मरीजों के अलावा हड्डी, छाती और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज भी शामिल होते हैं। पिछले चार दिनों से एक्सरे जांच प्रभावित होने के कारण ऐसे मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
डॉक्टर से परामर्श के बाद जांच के लिए पहुंचे मरीजों को एक्सरे न होने की जानकारी मिलती है तो वह लोग निजी केंद्रों पर जांच कराने पहुंचते हैं। मरीजों को बाहर से एक्सरे कराने में अतिरिक्त समय और रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। बता दें, कि डिजिटल एक्सरे मशीन में तकनीकी खराबी आने के बाद उसे दुरुस्त कराने की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल पोर्टेबल मशीन से सिर्फ इमरजेंसी और अंत: रोगी विभाग में भर्ती मरीजों के ही एक्सरे किए जा रहे हैं। ऐसे में ओपीडी में आने वाले गंभीर मरीजों को भी अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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निजी केंद्रों पर जांच भी नहीं आ रही सही
आर्थिक रूप से कमजोर मरीज मेडिकल कॉलेज के बाहर बने केंद्रों से एक्सरे करा लाते हैं। जहां पर 200 से 300 के बीच एक्सरे हो जाता है, जबकि बड़े सेंटरों पर अधिक रुपये में जांच होती है। ऐसे में इन केंद्रों पर एक्सरे कराने पर मरीजों को सही जांच रिपोर्ट नहीं मिल रही है। हथौड़ा गांव के रामकुमार ने भी अपने पैर का एक्सरे कराया और डॉक्टर के पास लेकर गए तो रिपोर्ट का प्रिंट काला होने की वजह से कुछ समझ ही नहीं आया। रामकुमार के परिजन भईयालाल ने बताया कि 300 रुपये में एक्सरे कराया। पैसा खर्च करने के बाद भी मरीज को बेहतर रिपोर्ट नहीं मिल रही है।
एक्सरे मशीन को बनाने के लिए इंजीनियर लगातार लगे हुए हैं। सोमवार को मशीन को बनाकर चालू करने का प्रयास किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर उपकरण मंगवाया गया है। कोशिश की जा रही है एक्सरे मशीन जल्द ही चालू होगी। -डॉ. चंद्र कुमार, सीएमएस
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मेडिकल कॉलेज में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार और जांच के लिए पहुंचते हैं। इनमें हादसों में घायल मरीजों के अलावा हड्डी, छाती और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज भी शामिल होते हैं। पिछले चार दिनों से एक्सरे जांच प्रभावित होने के कारण ऐसे मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
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डॉक्टर से परामर्श के बाद जांच के लिए पहुंचे मरीजों को एक्सरे न होने की जानकारी मिलती है तो वह लोग निजी केंद्रों पर जांच कराने पहुंचते हैं। मरीजों को बाहर से एक्सरे कराने में अतिरिक्त समय और रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। बता दें, कि डिजिटल एक्सरे मशीन में तकनीकी खराबी आने के बाद उसे दुरुस्त कराने की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल पोर्टेबल मशीन से सिर्फ इमरजेंसी और अंत: रोगी विभाग में भर्ती मरीजों के ही एक्सरे किए जा रहे हैं। ऐसे में ओपीडी में आने वाले गंभीर मरीजों को भी अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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निजी केंद्रों पर जांच भी नहीं आ रही सही
आर्थिक रूप से कमजोर मरीज मेडिकल कॉलेज के बाहर बने केंद्रों से एक्सरे करा लाते हैं। जहां पर 200 से 300 के बीच एक्सरे हो जाता है, जबकि बड़े सेंटरों पर अधिक रुपये में जांच होती है। ऐसे में इन केंद्रों पर एक्सरे कराने पर मरीजों को सही जांच रिपोर्ट नहीं मिल रही है। हथौड़ा गांव के रामकुमार ने भी अपने पैर का एक्सरे कराया और डॉक्टर के पास लेकर गए तो रिपोर्ट का प्रिंट काला होने की वजह से कुछ समझ ही नहीं आया। रामकुमार के परिजन भईयालाल ने बताया कि 300 रुपये में एक्सरे कराया। पैसा खर्च करने के बाद भी मरीज को बेहतर रिपोर्ट नहीं मिल रही है।
एक्सरे मशीन को बनाने के लिए इंजीनियर लगातार लगे हुए हैं। सोमवार को मशीन को बनाकर चालू करने का प्रयास किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर उपकरण मंगवाया गया है। कोशिश की जा रही है एक्सरे मशीन जल्द ही चालू होगी। -डॉ. चंद्र कुमार, सीएमएस