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विश्व जल दिवस: जल की स्वच्छता,संरक्षण और उपलब्धता पर हुई चर्चा
Sun, 23 Mar 2025 12:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
Updated Sun, 23 Mar 2025 12:24 AM IST
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फोटो-26- संवेदना सांस्था की गोष्ठी में बोलते डॉ. ईश्वर चंद्र वर्मा। संवाद
विश्व जल दिवस: जल की स्वच्छता,संरक्षण और उपलब्धता पर हुई चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। विश्व जल दिवस पर संवेदना संस्था की ओर से जल संकट विषय पर गोष्ठी का आयोजन धर्मशाला मार्ग स्थित वेद प्रकाश अवस्थी के आवास पर किया गया। जिसमें जल की स्वच्छता,संरक्षण और उलब्धता पर चर्चा की गई। डाॅ.बीएस पांडेय की पुस्तक जल है तो जीवन है,पुस्तक का विमोचन किया गया।
गोष्ठी में बोलते हुए डॉ.ईश्वर चंद्र वर्मा ने कहा कि पानी के संकट से बचने के लिए भूमिगत जल का दोहन व दुरुपयोग रोकना होगा। वर्षा जल की एक-एक बूंद को सहजना होगा। डा.ब्रम्हस्वरूप पांडेय ने कहा कि जल संरक्षण के लिए तालाबों,जलाशयों व अन्य साधनों को पुर्नविकसित करना होगा। प्रदूषण से बचाने के लिए उसे भौतिक,रासायनिक,औद्यौगिक और कीटनाशक,मल-मूत्र आदि से बचाना होगा। डॉ.नरेश चंद्र शुक्ल ने कहा कि यदि जल संकट से नहीं निपटा गया तो अगला विश्व युद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा। डॉ.शीला पांडेय ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। सुशील वर्मा ने जल संकट पर काव्य पाठ किया। वेद प्रकाश अवस्थी,गिरिश चंद्र बाजपेई ने भी अपने विचार रखे।
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विश्व जल दिवस: जल की स्वच्छता,संरक्षण और उपलब्धता पर हुई चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। विश्व जल दिवस पर संवेदना संस्था की ओर से जल संकट विषय पर गोष्ठी का आयोजन धर्मशाला मार्ग स्थित वेद प्रकाश अवस्थी के आवास पर किया गया। जिसमें जल की स्वच्छता,संरक्षण और उलब्धता पर चर्चा की गई। डाॅ.बीएस पांडेय की पुस्तक जल है तो जीवन है,पुस्तक का विमोचन किया गया।
गोष्ठी में बोलते हुए डॉ.ईश्वर चंद्र वर्मा ने कहा कि पानी के संकट से बचने के लिए भूमिगत जल का दोहन व दुरुपयोग रोकना होगा। वर्षा जल की एक-एक बूंद को सहजना होगा। डा.ब्रम्हस्वरूप पांडेय ने कहा कि जल संरक्षण के लिए तालाबों,जलाशयों व अन्य साधनों को पुर्नविकसित करना होगा। प्रदूषण से बचाने के लिए उसे भौतिक,रासायनिक,औद्यौगिक और कीटनाशक,मल-मूत्र आदि से बचाना होगा। डॉ.नरेश चंद्र शुक्ल ने कहा कि यदि जल संकट से नहीं निपटा गया तो अगला विश्व युद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा। डॉ.शीला पांडेय ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। सुशील वर्मा ने जल संकट पर काव्य पाठ किया। वेद प्रकाश अवस्थी,गिरिश चंद्र बाजपेई ने भी अपने विचार रखे।
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