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हैंडपंप कब दुरुस्त हाेंगे सरकार!
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Sun, 30 Aug 2015 12:07 AM IST
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जिले में हैंडपंपों की मरम्मत को लेकर चरितार्थ हो गई। गर्मी का मौसम अब
अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ चला है और जिले में खराब पड़े हैंडपंपों का
दुरस्तीकरण कार्य न हो सका। आलम यह है कि जो हैंडपंप रिबोर होने थे, उन्हें
भी रिबोर कर पेयजल की उपलब्धता नहीं कराई जा सकी।
दरअसल सर्वे और सूचियों के मकड़जाल में फंस कर रह गया हैंडपंपों को दुरुस्त करने का कार्य जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। हर साल गर्मी का मौसम शुरू होते ही शासन द्वारा हैंडपंपों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए जाते हैं, ताकि गर्मी में बढ़ने वाली पेयजल की मांग को लेकर लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
इस क्रम में इस वर्ष भी अप्रैल में हैंडपंपों को दुरुस्त कराने की कवायद शुरू हुई। जिसके लिए कराए गए सर्वे में करीब छह हजार हैंडपंप खराब पाए गए। इनमें से लगभग 31 सौ हैंडपंप रिबोर होने योग्य पाए गए। जिसके लिए प्रशासन द्वारा संबंधित ग्राम पंचायतों को हैंडपंपों की मरम्मत कराने एवं रिबोर होने योग्य हैंडपंपों को दुरुस्त कराने के निर्देश जल निगम को दिए गए।
जुलाई तक यही तय न हो सका कि इन 31 सौ हैंडपंपों में प्राथमिकता पर किन हैंडपंपों को रिबोर कराया जाए। इसके लिए जल निगम द्वारा जिला प्रशासन से मार्गदर्शन चाहा गया कि रिबोर करने के लिए शासन से 950 हैंडपंपों का लक्ष्य है, ऐसे में सर्वे में आई संख्या में 950 का चयन कैसे किया जाए।
जिस पर जिला प्रशासन ने तहसीलों को प्राथमिकता वाले रिबोर होने योग्य हैंडपंपों की सूची जल निगम को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए ताकि हैंडपंपों को चालू किया जा सके, पर तहसीलों से सूचियां न मिल सकी और लक्ष्य 950 में एक भी हैंडपंप रिबोर होकर चालू न हो सके।
इसके साथ ही अन्य रिबोर योग्य हैंडपंपों के लिए शासन से बजट प्राप्त करने एवं मरम्मत योग्य हैंडपंपों की मरम्मत कराने की कार्रवाई भी तमाम ग्राम पंचायतों से न हो सकीं। पूरे मामले में जिम्मेदारों की उदासीनता ने मामले को उलझा कर रख दिया।
दरअसल सर्वे और सूचियों के मकड़जाल में फंस कर रह गया हैंडपंपों को दुरुस्त करने का कार्य जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। हर साल गर्मी का मौसम शुरू होते ही शासन द्वारा हैंडपंपों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए जाते हैं, ताकि गर्मी में बढ़ने वाली पेयजल की मांग को लेकर लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
इस क्रम में इस वर्ष भी अप्रैल में हैंडपंपों को दुरुस्त कराने की कवायद शुरू हुई। जिसके लिए कराए गए सर्वे में करीब छह हजार हैंडपंप खराब पाए गए। इनमें से लगभग 31 सौ हैंडपंप रिबोर होने योग्य पाए गए। जिसके लिए प्रशासन द्वारा संबंधित ग्राम पंचायतों को हैंडपंपों की मरम्मत कराने एवं रिबोर होने योग्य हैंडपंपों को दुरुस्त कराने के निर्देश जल निगम को दिए गए।
जुलाई तक यही तय न हो सका कि इन 31 सौ हैंडपंपों में प्राथमिकता पर किन हैंडपंपों को रिबोर कराया जाए। इसके लिए जल निगम द्वारा जिला प्रशासन से मार्गदर्शन चाहा गया कि रिबोर करने के लिए शासन से 950 हैंडपंपों का लक्ष्य है, ऐसे में सर्वे में आई संख्या में 950 का चयन कैसे किया जाए।
जिस पर जिला प्रशासन ने तहसीलों को प्राथमिकता वाले रिबोर होने योग्य हैंडपंपों की सूची जल निगम को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए ताकि हैंडपंपों को चालू किया जा सके, पर तहसीलों से सूचियां न मिल सकी और लक्ष्य 950 में एक भी हैंडपंप रिबोर होकर चालू न हो सके।
इसके साथ ही अन्य रिबोर योग्य हैंडपंपों के लिए शासन से बजट प्राप्त करने एवं मरम्मत योग्य हैंडपंपों की मरम्मत कराने की कार्रवाई भी तमाम ग्राम पंचायतों से न हो सकीं। पूरे मामले में जिम्मेदारों की उदासीनता ने मामले को उलझा कर रख दिया।