{"_id":"9a512ef7eee98501d469dc1f40f770a0","slug":"we-respect-the-guests-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘अतिथियों का करें सम्मान’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘अतिथियों का करें सम्मान’
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Thu, 03 Sep 2015 11:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अतिथि देवो भव भारतीय संस्कृति का आदर्श है। हम घर आए हुए अतिथियों को देवता मानें और इसके बाद उनका स्वागत और सम्मान करें। उक्त
विज्ञापन
उद्गार सीएसएन कालेज में डा. महेंद्र वर्मा मधुप की पुस्तक अतिथि देवो भव
के विमोचन समारोह में एडीएम लक्ष्मीशंकर सिंह ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि पौराणिक आधार पर लिखी गई यह पुस्तक अत्यंत ही सुंदर एवं पढ़ने योग्य है। सिटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र मोहन ने कहा कि रामायण काल में भी हमारे यहां अतिथि को देवता मानने की परंपरा रही है। इस परंपरा को अपने गीतों के माध्यम से आगे बढ़ाने का काम किया गया, जो सराहनीय है।
एसडीएम डीडी यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शत्रु को भी अतिथि मानकर की गई सेवा परम फलदायक होती है। यह बात इस पुस्तक से सिद्ध होती है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम अतिथियों का सम्मान करें। प्राचार्य डा. अनिल सिंह ने कहा कि यह कृति डा. वर्मा की 26वीं कृति है, जो उनकी रचनाधर्मिता का प्रमाण है।
इससे पूर्व डा. वर्मा ने अपनी कृति का विस्तार पूर्वक परिचय दिया। उन्होंने अपनी रचना के गीतों को भोजपुरी बोली में सस्वर गायन किया। डा. संदीप सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन करते हुए डा. महेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि डा. मधुप की रचनाओं के लाखों पाठक हैं। जो किसी रचनाकार के लिए गौरव की बात है।
इस मौके पर डा. अमृत लाल कनौजिया, डा. पुष्पा रानी गंगवार, डा. आभा सिंह, शैलेंद्र पाठक, सुभाष पांडे, रागिनी सिंह, मदन पाल, पूनम सिंह, रामलड़ैते वर्मा, माया प्रकाश आदि मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि पौराणिक आधार पर लिखी गई यह पुस्तक अत्यंत ही सुंदर एवं पढ़ने योग्य है। सिटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र मोहन ने कहा कि रामायण काल में भी हमारे यहां अतिथि को देवता मानने की परंपरा रही है। इस परंपरा को अपने गीतों के माध्यम से आगे बढ़ाने का काम किया गया, जो सराहनीय है।
एसडीएम डीडी यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शत्रु को भी अतिथि मानकर की गई सेवा परम फलदायक होती है। यह बात इस पुस्तक से सिद्ध होती है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम अतिथियों का सम्मान करें। प्राचार्य डा. अनिल सिंह ने कहा कि यह कृति डा. वर्मा की 26वीं कृति है, जो उनकी रचनाधर्मिता का प्रमाण है।
इससे पूर्व डा. वर्मा ने अपनी कृति का विस्तार पूर्वक परिचय दिया। उन्होंने अपनी रचना के गीतों को भोजपुरी बोली में सस्वर गायन किया। डा. संदीप सिन्हा ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन करते हुए डा. महेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि डा. मधुप की रचनाओं के लाखों पाठक हैं। जो किसी रचनाकार के लिए गौरव की बात है।
इस मौके पर डा. अमृत लाल कनौजिया, डा. पुष्पा रानी गंगवार, डा. आभा सिंह, शैलेंद्र पाठक, सुभाष पांडे, रागिनी सिंह, मदन पाल, पूनम सिंह, रामलड़ैते वर्मा, माया प्रकाश आदि मौजूद थे।