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Hardoi News: जागे प्रधान, आश्रयस्थलों में शुरु हुई चारा बुआई
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हरदोई। संरक्षित मवेशियों को 12 महीने तक हरा चारा मिलने की आस जाग गई है। गांवों के प्रधान जागे हैं और आश्रयस्थल से सटे चरागाहों में चारा की बुआई करा रहे हैं। इससे मवेशियों को भूसा के साथ हरा चारा भी मिलने लगेगा और खर्च भी बचेगा।
निराश्रित मवेशियों को संरक्षित कराए जाने के साथ ही इनके भरण-पोषण के लिए पशुपालन विभाग की ओर से एक मवेशी के लिए प्रतिदिन 50 रुपये के हिसाब से दिए जा रहे हैं। जिले में 366 आश्रयस्थलों में से 305 आश्रय स्थलों पर ही चरागाह की भूमि की मैपिंग कराई गई है। 66 आश्रयस्थलों पर हरा चारा की बुआई कराई थी, शेष पर भूमि खाली पड़ी थी। इससे चारा की बुआई न करने वाले पशु आश्रय स्थलों की स्थिति पर अमर उजाला ने 21 जून के अंक में बजट और भूमि भरपूर, मवेशी हरे चारा से दूर शीर्षक से प्रमुखता से खबर दी थी।
खबर का संज्ञान लेते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह ने ऐसे पशु आश्रयस्थलों का जायजा लिया और पशु चिकित्साधिकारियों और प्रधानों को हरा चारा की बुआई के लिए प्रेरित किया। थानगांव पशु आश्रयस्थल पर पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विजय कुमार जायसवाल ने खुद ही ट्रैक्टर से जोताई कर चारा की बुआई की। पड़रा लखनपुर सहित अन्य आश्रयस्थलों में भी चारा की बुआई कराई गई है। कोथावां के थानगांव सहित पशु आश्रयस्थल की भूमि पर अब चारा बुवाई शुरू कर दी गई है।
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निराश्रित मवेशियों को संरक्षित कराए जाने के साथ ही इनके भरण-पोषण के लिए पशुपालन विभाग की ओर से एक मवेशी के लिए प्रतिदिन 50 रुपये के हिसाब से दिए जा रहे हैं। जिले में 366 आश्रयस्थलों में से 305 आश्रय स्थलों पर ही चरागाह की भूमि की मैपिंग कराई गई है। 66 आश्रयस्थलों पर हरा चारा की बुआई कराई थी, शेष पर भूमि खाली पड़ी थी। इससे चारा की बुआई न करने वाले पशु आश्रय स्थलों की स्थिति पर अमर उजाला ने 21 जून के अंक में बजट और भूमि भरपूर, मवेशी हरे चारा से दूर शीर्षक से प्रमुखता से खबर दी थी।
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खबर का संज्ञान लेते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह ने ऐसे पशु आश्रयस्थलों का जायजा लिया और पशु चिकित्साधिकारियों और प्रधानों को हरा चारा की बुआई के लिए प्रेरित किया। थानगांव पशु आश्रयस्थल पर पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विजय कुमार जायसवाल ने खुद ही ट्रैक्टर से जोताई कर चारा की बुआई की। पड़रा लखनपुर सहित अन्य आश्रयस्थलों में भी चारा की बुआई कराई गई है। कोथावां के थानगांव सहित पशु आश्रयस्थल की भूमि पर अब चारा बुवाई शुरू कर दी गई है।
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