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अफसरों-नेताओं से निराश ग्रामीणों ने लॉकडाउन में बना डाला पुल
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हरदोई में ग्रामीणों द्वारा बनाया गया कच्चा पुल। संवाद
- फोटो : HARDOI
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बघौली (हरदोई)। लॉकडाउन के दौरान अहिरोरी विकास खंड के ग्राम मसीत व आसपास के गांवों के लोगों ने एक मिसाल कायम कर दी। कई बार आवागमन बाधित होने की शिकायत के बाद भी प्रशासन के ध्यान न देने पर ग्रामीणों ने फावडे़ उठा लिए। सहयोग से चंदा कर सईं नदी पर चार दिन में ही 18 मीटर कच्चा पुल तैयार कर दिया। पुल के निर्माण से आसपास के 50 गांवों के हजारों लोगों को अब सात किमी का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
अहिरोरी विकास खंड में बर्रा डाल सिंह-अहिरोरी मार्ग पर सईं नदी है। इस नदी पर कोई पुल नहीं था। कुछ वर्ष पहले करीमनगर सैदापुर व बल्लीपुर के लोगों ने अपने स्तर से यहां पाइप डलवा दिए थे। कुछ दिन तक जैसे-तैसे इस पर आवागमन हो सका, लेकिन फिर लोगों को परेशानी होने लगी। दरअसल सईं नदी पर पुल न होने के कारण मसीत, करीमनगर सैदापुर, केशवन, कैनखेड़ा, रामनगरिया, सैदापुर, काईमऊ, बर्रा डाल सिंह आदि गांवों के लोगों को हरदोई-लखनऊ मार्ग पर पहुंचने के लिए 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता था।
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लॉकडाउन के दौरान घरों में रह रहे ग्रामीणों ने समस्या का हल निकालने की चर्चा शुरू की। ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार से उन लोगों ने मिलकर पुल बनाने का कार्य शुरू किया था। शुक्रवार देर शाम पुल निर्माण का कार्य पूरा हो गया। पुल की लंबाई लगभग 18 मीटर है। इसमें चार हजार बोरियां, मिट्टी, हृयूम पाइप, बांस, लकड़ी का इस्तेमाल भी किया गया है। 50 ग्रामीणों ने पुल के निर्माण में मजदूरी भी की और आवागमन की राह सुलभ कर ली। निर्माण के दौरान जेसीबी की व्यवस्था मसीत के प्रधान रईस अहमद ने की।
40 हजार रुपये आई लागत
बोरी खरीदने के लिए ग्रामीणों ने चंदा किया। किसी ने पांच सौ रुपये दिए तो किसी ने एक हजार। किसी ने सहयोग के लिए मजदूरी भी की। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 40 हजार रुपये में पुल का निर्माण पूरा कर लिया। सहयोग करने वालों में पंकज शर्मा, पिंटू सिंह, छुन्ना सिंह, सूरज सिंह शामिल हैं।
नियमावली आ रही थी आड़े : नोडल अधिकारी
लोक निर्माण विभाग के नोडल अधिकारी वीरेंद्र चौधरी ने बताया कि ये सही है कि कई बार ग्रामीणों ने वहां पर पुल का निर्माण कराने की मांग की, लेकिन नियमावली के चलते पुल बनाना संभव नहीं था। नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में 10-10 किलोमीटर की दूरी पर पुल का निर्माण नहीं कराया जा सकता। संबंधित स्थान से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर सईं नदी पर ही एक पुल बना है।
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अहिरोरी विकास खंड में बर्रा डाल सिंह-अहिरोरी मार्ग पर सईं नदी है। इस नदी पर कोई पुल नहीं था। कुछ वर्ष पहले करीमनगर सैदापुर व बल्लीपुर के लोगों ने अपने स्तर से यहां पाइप डलवा दिए थे। कुछ दिन तक जैसे-तैसे इस पर आवागमन हो सका, लेकिन फिर लोगों को परेशानी होने लगी। दरअसल सईं नदी पर पुल न होने के कारण मसीत, करीमनगर सैदापुर, केशवन, कैनखेड़ा, रामनगरिया, सैदापुर, काईमऊ, बर्रा डाल सिंह आदि गांवों के लोगों को हरदोई-लखनऊ मार्ग पर पहुंचने के लिए 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता था।
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लॉकडाउन के दौरान घरों में रह रहे ग्रामीणों ने समस्या का हल निकालने की चर्चा शुरू की। ग्रामीणों का कहना है कि मंगलवार से उन लोगों ने मिलकर पुल बनाने का कार्य शुरू किया था। शुक्रवार देर शाम पुल निर्माण का कार्य पूरा हो गया। पुल की लंबाई लगभग 18 मीटर है। इसमें चार हजार बोरियां, मिट्टी, हृयूम पाइप, बांस, लकड़ी का इस्तेमाल भी किया गया है। 50 ग्रामीणों ने पुल के निर्माण में मजदूरी भी की और आवागमन की राह सुलभ कर ली। निर्माण के दौरान जेसीबी की व्यवस्था मसीत के प्रधान रईस अहमद ने की।
40 हजार रुपये आई लागत
बोरी खरीदने के लिए ग्रामीणों ने चंदा किया। किसी ने पांच सौ रुपये दिए तो किसी ने एक हजार। किसी ने सहयोग के लिए मजदूरी भी की। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 40 हजार रुपये में पुल का निर्माण पूरा कर लिया। सहयोग करने वालों में पंकज शर्मा, पिंटू सिंह, छुन्ना सिंह, सूरज सिंह शामिल हैं।
नियमावली आ रही थी आड़े : नोडल अधिकारी
लोक निर्माण विभाग के नोडल अधिकारी वीरेंद्र चौधरी ने बताया कि ये सही है कि कई बार ग्रामीणों ने वहां पर पुल का निर्माण कराने की मांग की, लेकिन नियमावली के चलते पुल बनाना संभव नहीं था। नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में 10-10 किलोमीटर की दूरी पर पुल का निर्माण नहीं कराया जा सकता। संबंधित स्थान से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर सईं नदी पर ही एक पुल बना है।