फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   Ventilators also in need of breath; shortage of trained staff.

Hardoi News: वेंटिलेटरों को भी सांसों की दरकार, प्रशिक्षित स्टाफ की कमी

Sat, 12 Sep 2026 11:14 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 11:14 PM IST
विज्ञापन
Ventilators also in need of breath; shortage of trained staff.
फोटो- 27- पीकू वार्ड में रखा धूल खा रहा वेंटिलेटर।
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटरों की मौजूदगी के बावजूद गंभीर मरीजों की सांसें थम रही हैं। मशीनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए न तो प्रशिक्षित स्टाफ है और न ही ऑक्सीजन प्लांट से वेंटिलेटर के अनुकूल पर्याप्त प्रेशर मिल पा रहा है। ऐसे में आईसीयू में दो और पीकू वार्ड स्थित एक वेंटिलेटर महज शोपीस बनकर रह गया है। हालांकि वेंटिलेटरों को चलाने के दावे तो कई बार किए गए लेकिन हर बार कोई न कोई कमी बताकर वेंटिलेटर चलाए नहीं जा सके।
विज्ञापन

जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान वर्ष 2021 में पीएम केयर फंड से जिले को 39 पोर्टेबल वेंटिलेटर मिले थे। तब एक वेंटिलेटर पर लगभग पौने दो लाख रुपये खर्च हुए थे। कुछ दिनों तक जैसे तैसे वेंटिलेटरों का इस्तेमाल किया गया और बाद में इन्हें एक हॉल में बंद कर दिया गया। बाद में आठ वेंटिलेटर और मंगवाए गए थे। इस लिहाज से देखें तो मेडिकल कॉलेज में कुल 47 वेंटिलेटर हैं लेकिन इनमें से एक का भी इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
विज्ञापन

गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर सबसे महत्वपूर्ण उपकरण माना जाता है, जिन मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है उन्हें तत्काल ही लखनऊ रेफर कर जिम्मेदार पल्ला झाड़ लेते हैं। वेंटिलेटरों की समस्या पर अमर उजाला ने कई बार प्रश्न उठाया लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने हर बार सिर्फ दावा किया और उस पर वह खुद खरे नहीं उतर सके। आईसीयू में दो और पीकू वार्ड में एक वेंटिलेटर रखा है लेकिन इनको चलाने के लिए संसाधन ही नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



नहीं मिल रहा ऑक्सीजन प्रेशर
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन प्लांट तो हैं लेकिन यह वेंटिलेटर को आवश्यक दबाव की ऑक्सीजन सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं। कार्यदायी संस्था सॉयरिक्स कंपनी के इंजीनियर आशुतोष राय का कहना है कि वेंटिलेटर को ठीक से काम करने के लिए ऑक्सीजन सप्लाई का प्रेशर 50 से 65 पीएसआई (4.5 से 5 बार या 0.4 से 0.5 एमपीए) के बीच होना चाहिए। इससे कम पर वेंटिलेटर का काम कर पाना मुश्किल हो जाता है।


पैरामेडिकल स्टाफ भी नहीं प्रशिक्षित
वेंटिलेटर का संचालन करने के लिए स्टाफ का भी प्रशिक्षित होना आवश्यक है। वैसे तो मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी प्रभारी डॉ. अमित आनंद, एनेस्थेटिस्ट डॉ. विकास चंद्रा, सर्जन डॉ. बीएमएस पोखरिया को प्रशिक्षण दिया जा चुका है लेकिन करीब आठ पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण नहीं मिला। इसके पीछे वजह है कि फरवरी 2024 से राज्य स्तर पर प्रशिक्षण ही नहीं हो हुआ जबकि मेडिकल कॉलेज से पैरामेडिकल स्टाफ के नाम भेज जा चुके हैं।


वेंटिलेटर होता तो बच जाती जान
केस-1- फर्रुखाबाद के अहमदपुर गांव निवासी अहिरुराम अपनी रिश्तेदारी में बहन के घर आगमपुर आए थे। शुक्रवार देर रात उनके सीने में दर्द हुआ। भांजा अंकित उन्हें शनिवार सुबह मेडिकल कॉलेज लेकर आया। मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया। डॉ. विकास ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर कम हो रहा था और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। अगर वेंटिलेटर की सुविधा होती तो उनकी जान बच सकती थी।


.....क्या याद है सुखवारा
केस-2- नवंबर 2025 में मल्लावां में ईंट भट्ठे पर काम करने वाली सुखवारा की मौत ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर नहीं मिला। लखनऊ रेफर किया गया तो वहां भी समय रहते वेंटिलेटर न मिलने से उनकी जान चली गई थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य ने कम से कम दो वेंटिलेटर चलवाने का दावा किया था लेकिन अभी तक वह भी पूरा नहीं हो सका।



वेंटिलेटर संचालन के लिए ऑक्सीजन प्रेशर की समस्या दूर करने के लिए एक संस्था को जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने साइट विजिट भी कर लिया है। तकनीकी समस्या दूर कर स्टाफ के प्रशिक्षण के बाद सुविधा मरीजों के लिए शुरू कर दी जाएगी। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज

फोटो- 27- पीकू वार्ड में रखा धूल खा रहा वेंटिलेटर।

फोटो- 27- पीकू वार्ड में रखा धूल खा रहा वेंटिलेटर।

फोटो- 27- पीकू वार्ड में रखा धूल खा रहा वेंटिलेटर।

फोटो- 27- पीकू वार्ड में रखा धूल खा रहा वेंटिलेटर।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article