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जब तक कौमी एकता नहीं, तब तक विकास नहीं-अंसारी
ब्यूूराे/अमर उजाला, हरदाेई
Updated Thu, 01 Oct 2015 11:52 PM IST
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उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि नागरिकता की
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सुरक्षा सबसे ऊपर है। सरकारों के भरोसे बैठने की बजाय हर नागरिक को दूसरे
की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके लिए कौमी एकता को मजबूत करना
होगा। कोमी एकता के बिनी तरक्की नहीं हो सकती।
वह गुरुवार को सांसद नरेश अग्रवाल के जन्मदिन पर आयोजित कौमी एकता सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। शहर के जीआईसी परिसर में हुए सम्मेलन में उपराष्ट्रपति कुछ पल के लिए दार्शनिक अंदाज में नजर आए। निर्धारित 10 मिनट के भाषण में उन्होंने नागरिकता का पाठ पढ़ाया।
आपसी सौहार्द, सामाजिक समरसता का बार-बार जिक्र किया। सवाल किया, आखिर बदलते परिवेश में कौमी एकता की जरूरत क्यों पड़ रही है? अगले ही पल इसका जवाब भी दिया। कहा- हर भारतीय को यह समझने की जरूरत है कि उसकी कौम एक है। हर भारतीय की धार्मिक किताब है संविधान।
संविधान का पालन करते हुए हमें अपने आसपास रहने वाले हर नागरिक की सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए। इसके लिए सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। विकास की चर्चा करते हुए कहा कि जब तक नागरिक की सुरक्षा नहीं होगी और दिल नहीं मिलेंगे, तब तक तरक्की नहीं हो सकती।
उन्होंने हरदोई के बिलग्राम, संडीला आदि कसबों के विद्वानों का जिक्र करते हुए कौमी एकता की नजीर पेश की। विशिष्ट अतिथि प्रदेश के गवर्नर राम नाईक ने भी वास्तविक विकास के लिए कौमी एकता पर जोर दिया। स्वामी विवेकानंद के शिकागो के वक्तव्य का जिक्र करते हुए कहा कि सभी धर्म मानवता का संदेश देते हैं।
दुर्भाग्य से देश में एकता का संकट दिख रहा है। इस संकट से लड़ने के लिए एकता को हथियार बनाएं। सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि कौमी एकता टूटी तो प्रजातंत्र तबाह हो जाएगा। किसी भी धर्म में हिंसा का संदेश नहीं है। उन्होंने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को कौमी एकता का प्रतीक बताए हुए संकल्प दोहराया कि वह ताउम्र इस संघर्ष को कायम रखेंगे।
इस दौरान नरेश ने न सिर्फ प्रदेश सरकार के कार्यों को गिनाया बल्कि उपराष्ट्रपति और गवर्नर से मुखातिब होते हुए भरोसा भी दिया कि सरकार प्रदेश की जनता के बीच सामाजिक समरसता कायम करने की दिशा में निरंतर प्रयास करेगी। कार्यक्रम तय होने के बाद भी सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के न आने पर उन्होंने सफाई दी और गवर्नर राम नाईक की मौजूदगी पर भी खुलकर बोले।
बिना किसी का नाम लिए कहा कि गवर्नर का कार्यक्रम तय होने के बाद कुछ लोग सम्मेलन के निहितार्थ निकाल रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि यह सम्मेलन दलगत राजनीति से हटकर सामाजिक समरसता कायम करने की दिशा में प्रयास है। प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
वह गुरुवार को सांसद नरेश अग्रवाल के जन्मदिन पर आयोजित कौमी एकता सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। शहर के जीआईसी परिसर में हुए सम्मेलन में उपराष्ट्रपति कुछ पल के लिए दार्शनिक अंदाज में नजर आए। निर्धारित 10 मिनट के भाषण में उन्होंने नागरिकता का पाठ पढ़ाया।
आपसी सौहार्द, सामाजिक समरसता का बार-बार जिक्र किया। सवाल किया, आखिर बदलते परिवेश में कौमी एकता की जरूरत क्यों पड़ रही है? अगले ही पल इसका जवाब भी दिया। कहा- हर भारतीय को यह समझने की जरूरत है कि उसकी कौम एक है। हर भारतीय की धार्मिक किताब है संविधान।
संविधान का पालन करते हुए हमें अपने आसपास रहने वाले हर नागरिक की सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए। इसके लिए सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। विकास की चर्चा करते हुए कहा कि जब तक नागरिक की सुरक्षा नहीं होगी और दिल नहीं मिलेंगे, तब तक तरक्की नहीं हो सकती।
उन्होंने हरदोई के बिलग्राम, संडीला आदि कसबों के विद्वानों का जिक्र करते हुए कौमी एकता की नजीर पेश की। विशिष्ट अतिथि प्रदेश के गवर्नर राम नाईक ने भी वास्तविक विकास के लिए कौमी एकता पर जोर दिया। स्वामी विवेकानंद के शिकागो के वक्तव्य का जिक्र करते हुए कहा कि सभी धर्म मानवता का संदेश देते हैं।
दुर्भाग्य से देश में एकता का संकट दिख रहा है। इस संकट से लड़ने के लिए एकता को हथियार बनाएं। सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि कौमी एकता टूटी तो प्रजातंत्र तबाह हो जाएगा। किसी भी धर्म में हिंसा का संदेश नहीं है। उन्होंने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को कौमी एकता का प्रतीक बताए हुए संकल्प दोहराया कि वह ताउम्र इस संघर्ष को कायम रखेंगे।
इस दौरान नरेश ने न सिर्फ प्रदेश सरकार के कार्यों को गिनाया बल्कि उपराष्ट्रपति और गवर्नर से मुखातिब होते हुए भरोसा भी दिया कि सरकार प्रदेश की जनता के बीच सामाजिक समरसता कायम करने की दिशा में निरंतर प्रयास करेगी। कार्यक्रम तय होने के बाद भी सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के न आने पर उन्होंने सफाई दी और गवर्नर राम नाईक की मौजूदगी पर भी खुलकर बोले।
बिना किसी का नाम लिए कहा कि गवर्नर का कार्यक्रम तय होने के बाद कुछ लोग सम्मेलन के निहितार्थ निकाल रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि यह सम्मेलन दलगत राजनीति से हटकर सामाजिक समरसता कायम करने की दिशा में प्रयास है। प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।